क्या है घसियारी योजना, इससे क्या-क्या होगा लाभ…

खबर शेयर करें

समाचार सच, हल्द्वानी/देहरादून। प्रदेश में सहकारिता विभाग के अंतर्गत मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना की शुरूआत हो गयी है। शनिवार को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संयुक्त रूप से इस योजना का शुभारम्भ किया था। इस योजना के जरिए अब उत्तराखण्ड की ग्रामीण महिलाओं को पशु चारा के लिए जंगलों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। साथ ही उनका मानना है कि इस योजना से ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं का जंगली जानवरों से जो संघर्ष होता था या किसी दुर्घटना से शरीरिक क्षति हो जाती थी। उन घटनाओं में भी इस योजना से कमी आयेगी। तो क्या है मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना और क्या है इस योजना से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य और इससे किसको लाभ मिलेंगा।

Ad

घसियारी योजना के तहत पशुपालकों को पशुआहार (साइलेज) के 25 से 30 किलो के वैक्यूम पैक्ड बैग उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे दुधारू पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार के साथ ही दुग्ध उत्पादन में 15 से 20 फीसद तक वृद्धि होगी। इस योजना के लागू होने से पशुओं के लिए चारा जुटाने के लिए महिलाओं के सिर से बोझ कम होगा और उनके समय और श्रम की बचत होगी।

मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना (MGKY)
उत्तराखण्ड राज्य की 70 प्रतिशत से अधिक आबादी की आजीविका को प्रमुख स्त्रीत कृषि एवं पशुपालन आदि है एवं दुचारु पशु प्रजातियों का 80 प्रतिशत से ज्यादा स्वामित्व सीमाना एवं छोटे किसान के पास है। आजीविका के मुख्य स्त्रोतों में दुग्ध उत्पादन एक महत्त्वपूर्ण व्यवसाय है। जनपद अल्मोड़ा में किये गये एक अध्ययन से पता चला है कि चारा काटने हेतु महिलाओं को 08 से 10 घंटे पैदल चलने से अत्यधिक शारीरिक बीमारियों (पीठ, कमर, घुटने, गर्दन दर्द) का सामना करना पड़ता है। सामान्यतः पर्वतीय क्षेत्रों में पशुपालकों द्वारा प्रारम्परिक चारा उपयोग में लाया जाता है जिसके मूल पोषक तत्व केवल 10 से 15 ही होते है। पौष्टिक एवं गुणवत्तायुक्त चारे की कमी के कारण दुग्ध उत्पादन में निरन्तर कमी आती जा रही है जिस कारण पर्वतीय कृषकों द्वारा पशुपालन गतिविधि में रूचि का अभाव हो रहा है। कृषकों की इस समस्या को देखते हुये परियोजना द्वारा हरा मक्का का उत्पादन कर सायलेज निर्माण किये जाने हेतु कार्य योजना तैयार की गयी है। पर्वतीय महिलाओं की कार्यबोझ से मुक्ति एवं पशुओं हेतु पौष्टिक आहार उपलब्ध कर पशुपालन गतिविधि को एक व्यवसाय के रूप में स्थापित करने हेतु मुख्यमंत्री धस्यारी कल्याण योजना का क्रियान्यवन उत्तराखण्ड राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना के अन्तर्गत किया जा रहा है। उत्तराखण्ड राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना अन्तर्गत सायलेज फेडरेशन (साईफंड) के माध्यम से संयुक्त सामूहिक खेती के अन्तर्गत मक्का की मूल्य वृद्धि श्रृंखला जनपद देहरादून की सहकारी समितियों से जुड़े 1000 कृषकों की 1000 एकड़ भूमि पर 10000 मीट्रिक टन हरे मक्का का उत्पादन किया गया है जिससे हरा मक्का उत्पादन करने वाले कृषकों को रू० 02 करोड का भुगतान वर्ष 2021-22 मे किया गया है। परियोजना द्वारा सायलेज फेडरेशन एवं कार्पाेरेट पार्टनर के साथ कॉपरेटिव कॉर्पाेरेट पार्टनरशिप मॉडल विकसित किया गया है, जिसका मुख्य लक्ष्य सामूहिक खेती के माध्यम से किसानों को बेहतर मूल्य प्रदान करना है एवं पहाड़ी जनपदों में चारा लाने के दौरान महिलाओं की दुर्घटनाओं के साथ-साथ कार्यबोझ में कमी कर राज्य में गुणवत्ता एव पौष्टिक चारा उपलब्ध कराना है।

यह भी पढ़ें -   यूपी में होंगे सात चरणों में चुनाव, जानें मतदान का पूरा कार्यक्रम…

परियोजना की मुख्य विशेषतायें
-प्रस्तावित योजना में राज्य में कृषक लाभार्थियों/पशुपालकों को सायलेज/टी०एम०आर०/चारा ब्लॉक रियायती दर पर उपलब्ध कराया जाना है।
-इस योजना के तहत लगभग 2000 से अधिक कृषक परिवारों को उनकी 2000 एकड़ से अधिक भूमि पर मक्का की सामूहिक सहकारी खेती से जोड़ा गया है। झ वित्तीय वर्ष 2021-22 के दौरान सायलेज एवं टी०एम०आर० हेतु प्रतिवर्ष 10,000 मै0 टन उत्पादन और आपूर्ति का लक्ष्य रखा गया है।
-प्रस्तावित योजना में रियायती दरों पर किसानों को साथलेज एवं टी०एम०आर० की आपूर्ति हेतु राज्य, सरकार की ओर से 50 प्रतिशत अनुदान की व्यवस्था की गयी है।
इसके एक और जहाँसो उत्पादक किसानों को उनको उपलको मूल्य दिलाए जाने की व्यवस्था की गयी है. तसक साथ ही राज्य अन्तर्गत ही सम्पूर्ण मूल्य (ब्वउचसमजम अंसनम बींपद) स्थापित कर पशुपालकों को गुणपलायुक्त सायलेज/टी०एम०आर०. उपलब्ध होगा एवं पर्वतीय महिलाओं के कन्धों से घास के महतर का बोझ भी उतारा जा सकेगा।

यह भी पढ़ें -   उत्तराखंड में होगा एक चरण में चुनाव, 14 फरवरी को को डाले जायेंगे वोट

सायलेज फेडरेशन का लक्ष्य
-राज्य में चारे की मांग को पूरा करने के साथ पौष्टिक चारा और कुल मिश्रित राशन (टीएसआर) का प्रतिवर्ष 10000 मिट्रिक टन उत्पादन करना है। प्रस्तावित परियोजना में उत्तराखण्ड सरकार द्वारा किसानों को सायलेज एवं टीएमआर उपलब्ध कराने हेतु 50 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान की जानी है जिसके फलस्वरूप मक्का किसानों को उपज के उचित मूल्य उपलब्ध होगा अपितु पशुपालकों एवं देरी किसानों को अत्यधिक पौष्टिक चारा और कुल मिश्रित राशन (टी०एम०आर०) उपलब्ध होगा। सामाजिक दृष्टि से पहाड़ी क्षेत्रों की महिलाओं के कार्यबोझ में कमी आएगी फलस्वरूप चारा लाने के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं में भी भारी कभी आएगी। पर्वतीय जनपदों में सहकारी समितियों के माध्यम से सायलेज विपणन केन्द्रों की स्थापना कर सायलेज की उपलब्धता को निरन्तर सुनिश्चित करना। घ् 1000 पर्वतीय कृषकों के माध्यम से उनकी 1000 एकड़ भूमि पर संयुक्त सहकारी कृषि के माध्यम से हरे मक्का का उत्पादन प्रति वर्ष करना।

उद्देश्य:
-पहाड़ी क्षेत्र की महिलाओं के कार्यबोझ को कम करना।
-चारा लाने के दौरान जंगली जानवरों से संभावित जोखिम एवं दुर्घटनाओं को नियन्त्रित करना।
-फसल अवशेषों और चारे का वैज्ञानिक संरक्षण करना एवं पौष्टिक चारे की कमी को दूर करना।
-पौष्टिक आहार द्वारा पशु स्वास्थ्य में सुधार लाना एवं दुग्ध उत्पादन में वृद्धि कर किसानों की आय में वृद्धि

यह भी पढ़ें -   हल्द्वानी में दशमेश पिता श्री गुरू गोबिंद सिंह जी के प्रकाश पर्व पर निकाला गया भव्य नगर कीर्तन

सामाजिक एवं आर्थिक प्रभाव:
-परियोजना का लक्ष्य मक्का किसानों एवं डेरी किसानों की आय में वृद्धि कर सामाजिक एवं आर्थिक जीवन शैली में वृद्धि करना ।
-पशु चारा (सायलेज /टी०एम०आर०) की पहुंच सहकारी समितियों के माध्यम से घर-घर तक करना, जिससे महिलाओं का कार्यबोझ कम करने में मदद मिलेगी।
-गेहूँ एवं चावल की तुलना में मक्के की सिंचाई में कम पानी की आवश्यकता होती है। अतः पर्यावरण की दृष्टि से मक्के का उत्पादन प्रकृति एवं किसान हित में है।

परियोजना द्वारा किसानों की मक्का उत्पादन हेतु प्रदान की जा रही सुविधाएं:
-परियोजना के माध्यम से किसानों को कृषि बीज, खाद हेतु ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है एवं उत्पादित मक्के की खरीद सहकारिता के माध्यम से सुनिश्चित की जा रही है। अतः किसानों को उचित मूल्य प्राप्ति हेतु बाजार पर निर्भर नहीं रहना पड़ता है।
-मक्के की फसल 90-120 दिन में तैयार हो जाती है एवं कटाई के पश्चात किसान हरी मटर की बुवाई कर देते है। अतः कम समय में किसान अधिक उत्पादन एव लाभ प्राप्त करते है। झ सायलेज के संतुलित आहार के कारण पशुओं के दूध वसा की मात्रा 1-1.5 प्रतिशत बढ जाती है साथ ही पशुओं द्वारा दूध का उत्पादन 15-20 प्रतिशत बढ जाता है। घ् किसानों द्वारा उत्पादित उपज का उचित मूल्य पर सुनिश्चित खरीद।

क्रियान्वयन
-सायलेज उत्पादन एवं विपणन सहकारी संघ लि. देहरादून राज्य में एक पंजीकृत सहकारी संस्थान है जो कि राज्य हित की इस महत्वकांक्षी एवं कल्याणकारी परियोजना का क्रियान्वयन कर रही है।
-साईफेड का उद्देश्य राज्य के लक्षित लाभार्थि परिवारो, दुग्ध सहकारिताओं, पी०डी०एस० विक्रय केन्द्रों को विकसित कर सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से लक्षित परिवारों तक परियोजना का लाभ पहुंचाना है।
-प्रथम चरण में जनपद पौडी, रुदप्रयाग, अल्मोडा एवं चम्पावत में 50 सहकारी समितियों के माध्यम से 50 सायलेज विपणन केन्द्रों की स्थापना की गयी है।

Ad

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *