शनिवार को आखिर पीपल के पेड़ के नीचे किस तेल का दीपक जलाना चाहिए?

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समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। हिंदू धर्म में कई पेड़-पौधों को पवित्र और पूजनीय माना गया है। इन्हीं में से एक है पीपल का पेड़। हिंदू धर्म में पीपल के वृक्ष को (देव वृक्ष) माना गया है जिसमें कई देवताओं का वास होता है। धार्मिक मान्यतानुसार, पीपल के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु और महेश के साथ-साथ शनि देव का भी वास होता है। इसलिए लोग शनिवार को पीपल के पेड़ की पूजा अर्चना करते हैं और साथ ही पेड़ के नीचे दीपक जलाते हैं। लेकिन अक्सर लोगों के मन में सवाल होता है कि आखिर पीपल के पेड़ के नीचे किस तेल का दीपक जलाना चाहिए?

धार्मिक मान्यता के अनुसार शनिवार के दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक ही जलाना चाहिए। इससे नवग्रहों की शांति भी होती है। वहीं, सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाना भी सबसे लाभकारी माना जाता है। ध्यान रहे कि किसी खुशबूदार तेल जैसे केवड़े, नारियल आदि का दीपक जलाने से बचना चाहिए। दीपक जलाते वक्त कुछ उपायों से अधिक लाभ की प्राप्ति होती है।

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उपाय
दीपक में थोड़े से काले तिल जरूर डालें। सरसों का तेल शनि देव को अत्यंत प्रिय है और काले तिल राहु-केतु के दोषों को शांत करते हैं। ध्यान रहे कि किसी खुशबूदार तेल जैसे केवड़े, नारियल आदि का दीपक जलाने से बचना चाहिए। दीपक जलाते वक्त कुछ उपायों से अधिक लाभ की प्राप्ति होती है। साथ ही दीपक जलाते वक्त तेल में सिक्का भी ना डालें।

कब जलाएं दीपक
मान्यता के अनुसार पीपल के नीचे शाम 5 से 7 बजे तक दीया जलाना शुभ माना गया है, लेकिन याद रखें कि रात 9 बजे के बाद दीया जलाने से बचना चाहिए। ऐसा करने से आपको शुभ फल प्राप्त नहीं हो पाएंगे।

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नियम

  • दीपक जलाते समय ‘ऊँ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का जाप करना जरूर करें।
  • शनिवार को दीपदान के साथ-साथ पीपल के वृक्ष की सात बार परिक्रमा करें।
  • परिक्रमा करते समय शनि देव से अपने आर्थिक कष्टों को दूर करने की प्रार्थना करें।
  • इसके अलावा पीपल की जड़ में थोड़ा सा मीठा जल अर्पित करें। इससे घर में शांति आती है और लक्ष्मी जी का आगमन होता है।
  • जिनका पैसा कहीं अटका हुआ है या जिन पर कर्ज का बोझ बढ़ रहा है। दीपक जलाने के बाद बिना पीछे मुड़े अपने घर वापस आ जाएं।
    -साल के पहले शनिवार को मांस, मदिरा और तामसिक भोजन से परहेज करना चाहिए।

लाभ
-शनिवार को पीपल के पास दीपदान करने से कुंडली के शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं।

  • त्रिदेवों की कृपा साधक पर बनी रहती है।
  • भय से मुक्ति मिलती है।
  • आर्थिक स्थिति में सुधार होता है।
  • पारिवारिक कलह दूर होता है।
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