-देवभूमि की नारी अपने दृढ़ निश्चय से हरसंभव चुनौती से निपटने में सक्षम: राज्यपाल
-शिक्षा एवं स्वच्छता के क्षेत्र में नैनीताल जिले से विद्या मर्ताेलिया को मिला पुरस्कार

समाचार सच, देहरादून। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने आई.आर.डी.टी सभागार देहरादून में राज्य स्तरीय तीलू रौतेली एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ती पुरस्कार में बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग किया। इस कार्यक्रम में महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती रेखा आर्या भी उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली प्रदेश की 12 महिलाओं और किशोरियों को तीलू रौतेली पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अलावा आंगनवाड़ी के क्षेत्र में 35 महिलाओं को राज्य स्तरीय आंगनवाड़ी कार्यकर्ती सम्मान प्रदान किया गया। राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि देवभूमि की नारी शक्ति में वह क्षमता है कि वह अपने दृढ़ निश्चय से हरसंभव चुनौती से निपटने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में महिलाओं को ईश्वर का अलग ही वरदान मिला है। वे अपने जज्बे और क्षमता से बदलाव की क्रांति लाने में सक्षम हैं। राज्यपाल ने कहा कि हमारे परिवार में सबसे ताकतवर, सशक्त व क्षमतवान सदस्य हमारी महिलाएं हैं।
राज्यपाल ने कहा कि महिला सशक्तिकरण और बालिका शिक्षा एवं कल्याण उनके मिशन में सबसे ऊपर है। उन्होंने कहा कि यहां की महिलाओं में अद्भुत क्षमता है, उन्हें तकनीकी, अवस्थापना सुविधाओं के माध्यम से मदद देकर उत्तराखण्ड की अर्थव्यवस्था में एक नई क्रांति लायी जा सकती है। उन्होंने महिलाओं से आह्वान किया कि उत्तराखण्ड के बिजिनेस को लोकल से ग्लोबल तक पहुंचाने के लिए नवीन तकनीकों, डिजिटल माध्यमों से जुडें। उन्होंने महिलाओं से कहा कि उत्तराखण्ड की धरती पर जन्म लेने वाली वीरांगना तीलू रौतेली से सीख लेते हुए अपने आप को सशक्त करें। राज्यपाल ने कहा कि तीलू रौतेली के शौर्य और बलिदान की भावना हमें प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि तीलू रौतेली जैसी अनेक वीरांगनाएं पैदा हुईं हैं, उन सभी के महान कार्यों को हमें जन-जन तक पहुंचाना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों के प्रवास पर उत्तराखण्ड की नारी शक्ति के कार्यों को देखने व अनुभव करने का मौका मिला। इससे यह साबित हो गया कि यहां मातृशक्ति ही हमें समृद्ध बना रही है। उन्होंने कहा कि वे आशा, आंगनबाडी और स्वयं सहायता के कार्यों से बेहद प्रभावित हुए हैं। राज्यपाल ने सम्मानित होने वाली सभी महिलाओं को बधाई व शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे अन्य महिलाओं के लिए भी एक प्रेरणा स्त्रोत हैं। कार्यक्रम में उपस्थित विशिष्ट अतिथि कैबिनेट मंत्री श्रीमती रेखा आर्या ने अपने विचार रखते हुए कहा कि नारी शक्ति के अमूल्य योगदान से राज्य विकास के पथ पर अग्रसर है।
उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने में आगंनवाड़ी कार्यकत्रियों को अहम योगदान है। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि महिलाएं पुरुषों से किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं, वे हर कार्य करने में सक्षम हैं। उन्होंने पुरस्कृत होने वाली सभी महिलाओं को शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे स्थानीय विधायक खजान दास ने भी अपने विचार इस कार्यक्रम के दौरान रखे। इस अवसर पर सचिव एवं निदेशक महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास हरि चंद्र सेमवाल के अलावा विभागीय अधिकारी, पुरस्कृत एवं सम्मानित होने वाली महिलाएं उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में 12 महिलाओं को तीलू रौतेली पुरस्कार एवं 35 महिलाओं को राज्य स्तरीय आंगनवाड़ी कार्यकर्त्री पुरस्कार प्रदान किया गया।
कौन थी तीलू रौतेली
तीलू रौतेली का जन्म 8 अगस्त को हुआ था. तिलोत्तमा देवी गढ़वाल, उत्तराखण्ड की एक ऐसी वीरांगना थी जो केवल 15 वर्ष की उम्र में रणभूमि में कूद पड़ी थी. सात साल तक जिसने अपने दुश्मन राजाओं को कड़ी चुनौती दी थी. 22 वर्ष की आयु में सात युद्ध लड़ने वाली तीलू रौतेली एक वीरांगना थीं. तीलू रौतेली उर्फ तिलोत्तमा देवी भारत की रानी लक्ष्घ्मीबाई, चांदबीबी, झलकारी बाई, बेगम हजरत महल के समान ही देश विदेश में ख्घ्याति प्राप्घ्त हैं.
12 महिलाओं को मिला तीलू रौतेली पुरस्कार
इसी बात को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड सरकार ने तीलू देवी के नाम पर एक योजना शुरू की है, जिसका नाम तीलू रौतेली पेंशन योजना है. यह योजना उन महिलाओं को समर्पित है, जो कृषि कार्य करते हुए विकलांग हो चुकी हैं। इस योजना का लाभ उत्तराखंड राज्घ्य की बहुत सी महिलायें उठा रहीं हैं. वहीं उसके बाद प्रदेश सरकार ने वीरबाला तीलू रौतेली के नाम पर वर्ष 2006 से तीलू रौतेली पुरस्कार शुरू किया।
इस वर्ष तीलू रौतेली पुरस्कार पाने वाली महिलायें:
अल्मोड़ा जिले से साहित्यिक क्षेत्र में कार्य के लिए डॉ. शशि जोशी, खेल के क्षेत्र में कार्य के लिए बागेश्ववर जिले से दीपा आर्य, चमोली जिले से सामाजिक क्षेत्र में कार्य के लिए मीना तिवाड़ी, बालिका शिक्षा एवं सामाजिक कार्य के लिए चंपावत जिले से मंजू बाला, पत्रकारिता के क्षेत्र में देहरादून जिले से नलिनी गुसाईं, खेल के क्षेत्र में हरिद्वार जिले से प्रियंका प्रजापति, शिक्षा एवं स्वच्छता के क्षेत्र में नैनीताल जिले से विद्या मर्ताेलिया, अदम्य साहसिक कार्य के लिए पौड़ी से सावित्री देवी, महिला स्वयं सहायता के क्षेत्र में कार्य के लिए पिथौरागढ़ जिले से दुर्गा खड़ायत, आजीविका संवर्द्धन के क्षेत्र में कार्य के लिए रुद्रप्रयाग जिले से गीता रावत, सामाजिक क्षेत्र में कार्य के लिए उत्तरकाशी जिले से लता नौटियाल एवं खेल के क्षेत्र में कार्य के लिए ऊधमसिंहनगर जिले से प्रेमा नौटियाल को पुरस्कृत किया गया।
इस वर्ष आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पुरस्कार पाने वाली महिलायें: अल्मोड़ा से सुनीता कोहली, कुसुम बिष्ट, जानकी व कमला नेगी, बागेश्वर जिले से हेमा सती, चमोली जिले से भागा देवी, शोभा व अभिलाषा देवी, चंपावत जिले से अनिता रावत, देहरादून जिले से अर्चना राणा, सरोज सुयाल व किर्तना शर्मा, हरिद्वार से सीमा रानी, कमलेश धीमान, रचना व उमेश कुमारी, नैनीताल से ज्योति रावत, अंजू सागर व गीता नयाल, पौड़ी से अनिता देवी, आशा देवी, मीना देवी, हेमलता बिष्ट व गिन्नी डंगवाल, पिथौरागढ़ से दीपा पांडेय व ज्योति टम्टा, रुद्रप्रयाग से रंजना अवस्थी, टिहरी से मंगला थपलियाल, उमा भट्ट व सविता सेमवाल, ऊधमसिंह नगर से स्नेहलता मलिक, रचना रानी व मीरा देवी, उत्तरकाशी से सुमित्रा और लक्ष्मी नौटियाल।



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