रमजान मुबारक महीने के आखिरी दिन पहला रोजा रखकर लिया उक्त फैसला
समाचार सच, हल्द्वानी। देश में जहां कोरोना जैसी महामारी के चलते लगे लॉकडाउन से आर्थिक तंगी से जूझ रहे गरीब व असहाय लोगों की मदद को कई समाजसेवी संगठन आगे आ रहे हैं, वहीं बनभूलपुरा निवासी समाजसेवी जहीर अंसारी की सात वर्षीय सुपुत्री आफिया में भी मदद करने का जज्बा देखने को मिला। आफिया ने रमजान मुबारक महीने के आखिरी दिन अपनी जिंदगी का पहला रोजा रखकर गरीबों की मदद करने की इच्छा जाहिर की हैं। इसके लिये उन्होंने इस बार ईंद पर अपने नए कपड़े भी नहीं बनवाये है।
ज्ञात हो कि आफिया सेंट थेरेसा स्कूल काठगोदाम में कक्षा दो कि छात्रा हैं। आफिया ने माहे रमजान में नमाज की पाबंदी की और अपनी जिंदगी का पहला रोजा रविवार को मुकम्मल तरीके से अदा किया। रोजदार आफिया ने अपने नए कपड़े ना बना कर उन पैसों से गरीबों की मदद करने की इच्छा जाहिर की हैं। उनका कहना है कि यह जब्जा उनको अपने पिता के कार्यों को देखकर मन में आया है।
उनके पिता जहीर अंसारी ने बताया कि उनके परिवार में सभी रोजे नमाज की पाबंदी करते आ रहे हैं। उनके दो बेटों ने भी पूरे रोजे रख रहे हैं। छोटी बेटी ने भी आज माहे रमजान के आखरी रोजे को अपना पहला रोजा रखकर इबादत की अल्लाह से दुआ की कि मुल्क में अमन-चैन और पूरी दुनिया से करो ना वायरस की बीमारी से निजात मिल सके।

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