दलित/मुस्लिम उत्पीड़न को लेकर भीम फोर्स हुई आक्रोशित

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विरोध में दिया धरना, नगर मजिस्ट्रेट के माध्यम से दिया राष्ट्रपति को ज्ञापन

समाचार सच, हल्द्वानी। दलित/मुस्लिम उत्पीड़न को लेकर भीम फोर्स के पदाधिकारियों व सदस्यों में आक्रोश व्याप्त है। शनिवार केा बुद्धपार्क में भीम फोर्स के लोगों ने एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया और नगर मजिस्ट्रेट के माध्यम से देश के राष्ट्रपति को ज्ञापन प्रेषित किया।

धरना स्थल में आयोजित सभा में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनीष गौतम ने कहा कि संविधान रचयिता डॉ. भीमराव अंबेडकर जी के द्वारा जो संविधान बनाया गया था उस संविधान के हिसाब से इस देश को नहीं चलाया जा रहा है। संविधान में धर्मनिरपेक्ष और समतामूलक समाज बनाने का उद्देश्य दिया गया है। आज हमारे देश में जो संविधान विरोधी ताक़तें है और कुछ लोग संविधान के विरुद्ध कार्य करने वाले हैं वह लोग संविधान के ढांचे को बदलना चाहते हैं व केंद्र सरकार व यू पी ए सरकार इस देश को हिन्दू राष्ट्र बनाने के लिए हर तरीके अपना रही है, जो सरकार आर एस एस प्रमुख मोहन भागवत के अनुसार इस देश मे दलित/अल्पसब्ख्यक आदिवासी और बाहर से आये लोगों के लिए एन आर सी के तहत इस देश में क़ानून लाना छाती है जिसके अंतर्गत सबसे ज़्यादा नुकसान अल्पसंख्यक, दलित और आदिवासी लोगों के लिए होगा। उनका कहना था कि आये दिन दलितों पर अत्याचार और उनकी माता बहनों के साथ बलात्कार जैसी घटनाएं भारत देश के अंदर बढ़ती जा रही हैं। देश मे यदि इन अपराधियों से और संविधान के विरुद्ध काम करने वाली सरकार से बचना है तो अल्पसंख्यक और दलित समाज के लोगों को एक साथ होकर संविधान बचाने की सख्त ज़रूरत है।

प्रदेश अध्यक्ष सिराज अहमद ने कहा कि सदियों से दलित समाज के ऊपर बेइंतहा ज़ुल्म होता चला आ रहा है बलात्कार व अमानवीय घटनाएं तेज़ी से बढ़ रही हैं, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्यप्रदेश की वीभत्स घटनाएं यह बता रही हैं कि यह सब सुनियोजित साजिश के तहत ब्राह्मणवादी ताक़तों द्वारा किया जा रहा है और दलित/ मुस्लिम समाज को लगातार हतोत्साहित किया जा रहा है, यदि अब भी दलित/मुस्लिम समाज एक नही हुआ तो आने वाला समय बहुत ही भयानक होगा, अब अम्बेडकरवादी संघटनों द्वारा इन ताक़तों का मुकाबला सड़कों पर उतर कर ही किया जायेगा।

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महानगर अध्यक्ष नफ़ीस अहमद खान ने कहा कि भीम फोर्स का मूल उद्देश्य दलित/अल्पसंख्यको को संविधान के अनुसार मूलभूत सुविधाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रयास करना है। दलितों की विडंबना यह है कि देश की आज़ादी से आज तक समाज मे बराबरी के लिए संघर्ष कर रहा है, जब हम भारतीय समाज की प्रवृत्ति और उसकी दशा का विश्लेषण करते हैं तो एक तरफ यह पाते हैं कि संसाधनों और सत्ता पर ब्राह्मणवादियों का अधिकार है जो लगातार दलित/मुस्लिम समाज का उत्पीड़न कर रहे है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक साल 2014 में दलितों पर उत्पीड़न के 47064 अत्याचार के मुकदमे दर्ज किए गए हैं, दूसरे शब्दों में इन आंकड़ों को पेश करें तो दलितों पर प्रतिदिन 123 अत्याचार के मामले दर्ज हुए थे जो कि वर्तमान आंकड़ा इससे बहुत अधिक है। कुंभकर्ण की नींद और सत्ता के नशे में चूर सरकार को होश में लाने का समय आ चुका है।

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धरना प्रदर्शन में मुख्य रूप से राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनीष गौतम, प्रदेश अध्यक्ष सिराज अहमद, नगर अध्यक्ष नफ़ीस अहमद खान, पार्षद शकील अंसारी, अरबाज़ खान, शाहनवाज़ मलिक, कृष्णा कुमार, मोहम्मद रफीक, मनीष गुणवंत, तस्लीम अंसारी आदि उपस्थित थे।

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