समाचार सच, हल्द्वानी। बनभूलपुरा के इंदिरा नगर के निवासियों को अब नाले के प्रदूषण से निजात मिलने की उम्मीद जगने लगी है। इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर कार्य योजना बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। नगर निगम, सिंचाई विभाग व पेयजल निगम इस नाले का निरीक्षण करेंगे और तीन दिन में रिपोर्ट तैयार कर आयुक्त को सौंपेंगे। इसके बाद प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।
बनभूलपुरा के इंदिरा नगर में दूषित नाले की समस्या वर्षों से चली आ रही है। इसके प्रदूषण से यहां रहने वाले लोग खासे परेशान हैं। लेकिन बरसात में यह समस्या और विकराल रूप धारण कर लेती है। इस नाले के प्रदूषण से निजात दिलाने की मांग भी समय-समय पर उठती रही है। नाले के प्रदूषण से निजात दिलाने की प्रशासनिक योजना कई बार बनी, लेकिन परवान न चढ़ने के कारण समस्या जस की तस बनी रही। इस नाले के प्रदूषण से निजात दिलाने की कवायद एक बार फिर शुरू हो गई है। इसके लिए कुमाऊं कमिश्नर अरविन्द सिंह हयांकी ने सोमवार को विभागीय अधिकारियों के साथ गहन मंत्रणा की। आयुक्त ने नाले से दूषित जल निकासी के लिए नगर आयुक्त, मुख्य अभियन्ता सिंचाई व पेयजल निगम के अधिकारियों को संयुक्त निरीक्षण कर तीन सप्ताह मे रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिये। कहा कि अधिकारी इस नाले को एसटीपी में छोड़ने का प्लान बनायें और नाले को रेलवे लाइन के नीचे से ले जाने के लिए रेलवे से संपर्क स्थापित करें। जिससे राष्ट्रीय राजमार्ग पर कल्वर्ट (स्कवर) बनाकर नाला पास कराने हेतु रेलवे व राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारियों से वार्ता कर एनओसी प्राप्त करते हुए डीपीआर प्रस्तुत की जा सके। इसके लिए उन्होंने अधिकारियों को निरीक्षण कर तीन दिन में रिपोर्ट पेश करने को कहा है। रिपोर्ट आने के बाद इस परियोजना का प्रस्ताव स्वीकृति हेतु शासन को भेजा जायेगा।
आयुक्त ने मुख्य अभियन्ता पेयजल निगम को यह भी निर्देश दिये कि वह गौलापार में बनाये जा रहे एसटीपी की क्षमता का भी आंकलन कर लें, ताकि इंदिरा नगर के दूषित जल को एसटीपी में डाला जा सके। मुख्य अभियन्ता ने आयुक्त के सामने इसकी रिपोर्ट पेश की। बताया कि एसटीपी घरेलू सीवरेज के लिए डिजाइन है, मगर वर्षाकाल में इन्दिरा नगर नाले में वर्षा काल में पानी अत्यधिक आने के चलते पूर्व में ही गेट-वे बनाकर इसे डाइवर्ट किया जायेगा। बाकी समय में एसटीपी में नाले को डाला जा सकता है। बैठक में विधायक लालकुआं नवीन दुम्का ने कहा कि इंदिरा नगर नाले का गन्दा पानी बरेली रोड में डाल देने से गंदगी फैल जाती है, इससे यहां के निवासियों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ता है, इसे देखते हुए इस पर जल्द काम करने की आवश्यकता है। जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा कि डीपीआर में नाला निर्माण में जिन विभागों की परिसम्पत्ति आती है उन्हें हटाने अथवा विस्थापन के साथ ही 5 वर्षों तक नाले का ऑपरेशन व मेंटीनेंस धनराशि भी रखी जाए। उन्होंने रकसिया नाले की सफाई व अन्तिम छोर का विस्तार करने पर भी बल दिया, ताकि रकसिया नाले का पानी गांव में न फैलकर जंगल में छोड़ा जा सके। इसके उन्होंने अधीक्षण अभियन्ता सिंचाई को सर्वे कराने के निर्देश भी दिये। बैठक में अपर आयुक्त संजय खेतवाल, नगर आयुक्त सीएस मर्तोलिया, मुख्य अभियन्ता सिंचाई एमसी पाण्डे, पेयजल एसके पंत, अधीक्षण अभियन्ता सिंचाई संजय शुक्ला, पेयजल निगम ओपी सिह, जल संस्थान विशाल सक्सेना, अधिशासी अभियन्ता सिंचाई तरूण बंसल, अरविन्द कटारिया आदि मौजूद रहे।

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