समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। अधिकमास की दूसरी एकादशी पदमा एकादशी जून में ही है। अभी अधिकमास चल रहा है। अधिकमास की एकादशी को पदमा एकादशी कहते हैं। इस दिन व्रत रखकर भगवान श्रीहरि की शरण मिलती है। आपको बता दें कि 15 जून से अधिकमास खत्म हो जाएगा। इसके बाद से शुभ कार्य शुरू होंगे। अधिकमास की अमावस्या इस बार बहुत पुण्य देने वाली है। इस अमावस्या पर सोमवती अमावस्या है जिस पर दान पुण्य का फल मिलता है, वहीं अमावस्या तिथि दो दिन है, पितृ कार्य के लिए अमावस्या एक दिन पहले 14 जून को हैं। यहां पढ़ें इस सप्ताह कौन-कौन से व्रत और त्योहार आएंगे। हर व्रत की तारीख पंचांग की तिथि आदि सभी यहां दी गई है।
09 जून (मंगलवार)
द्वितीय (अधिक) ज्येष्ठ कृष्ण नवमी तिथि रात्रि 02.35 मिनट तक पश्चात दशमी तिथि। पंचक इस दिन भी लगा है।
10 जून (बुधवार)
द्वितीय (अधिक) ज्येष्ठ कृष्ण दशमी तिथि रात्रि 12.58 मिनट तक। गंडमूल प्रातः 09.22 मिनट से। पंचक भी लगा है, एकादशी व्रत के नियम इस दिन से शुरू हो जाएंगे। इसलिए जो व्रत रख रहे हैं वो व्रत के नियमों का पालन करें।
11 जून (गुरुवार)
द्वितीय (अधिक) ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी तिथि रात्रि 10.37 मिनट तक। इस एकादशी पर द्वादशी तिथि और एकादशी तिथि दोनों का संयोग मिल रहा है। इस दिन पंचक भी समाप्त हो रहे हैं प्रातः 08.17 मिनट से। पुरुषोत्तमा (कमला) एकादशी व्रत। गंडमूल विचार। कहते हैं कि जो इस व्रत को करता है, श्रीहरि उससे प्रसन्न होते हैं।
12 जून (शुक्रवार)
द्वितीय (अधिक) ज्येष्ठ कृष्ण द्वादशी तिथि सायं 07.37 मिनट तक। प्रदोष व्रत इस दिन रखा जाएगा, इस दिन एकादशी व्रत का पारण भी किया जाता है। गंडमूल प्रातः 06.29 मिनट तक रहेंगे। इस समय जन्म लेने वाले शिशु की मूल शांति करानी होगी।
13 जून (शनिवार)
द्वितीय (अधिक) ज्येष्ठ कृष्ण त्रयोदशी तिथि सायं 04.08 मिनट तक। मास शिवरात्रि व्रत, इस दिन शिवजी की पूजा की जाती है।
14 जून (रविवार)
द्वितीय (अधिक) ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी तिथि दोपहर 12.20 मिनट तक पश्चात अमावस्या तिथि शुरू हो जाएगी। इस दिन पितृकार्येषु अमावस कर सकते हैं। (आज तैल स्पर्श का निषेध है)।
15 जून (सोमवार)
द्वितीय (अधिक) ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या तिथि प्रातः 08.24 मिनट तक पश्चात प्रतिपदा रात्रि 04.31 मिनट तक तदनंतर द्वितीया तिथि। स्नान दान व्रतादि की अधिक ज्येष्ठ अमावस। सोमवती अमावस। ज्येष्ठ अधिक (पुरुषोत्तम) मास समाप्त। श्री गंगा स्नान प्रारंभ। आषाढ़ संक्रांति। इस दिन सूर्य का राशि परिवर्तन भी हो रहा है। इसके अलावा इस दिन शुद्ध ज्येष्ठ शुक्ल प्रतिपदा तिथि का क्षय है। (साभार: पं. ऋभुकांत गोस्वामी)



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