समाचार सच, स्वास्थ्य डेस्क। जावित्री का नाम तो आपने सुना ही होगा। कुछ लोग इसे जायफल की जुड़वां बहन भी कहते हैं। जायफल की तरह ही जावित्री के फायदे भी अनेक हैं, जिसके बारे में हम इस लेख में बता रहे हैं। जावित्री क्या है और जावित्री का उपयोग कैसे करना है, इसकी जानकारी आपको इस लेख में मिलेगी।
आखिर जावित्री क्या है? हम आपको बता दें कि जायफल और जावित्री एक ही मायरिस्टिका फ्रैगरैंस नामक पेड़ से मिलते हैं। हालांकि, कई बार लोग जायफल और जावित्री दोनों को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। जायफल इस पेड़ का बीज होता है और इसे ढकने वाली रेशेदार परत को जावित्री कहा जाता है। जावित्री का वानस्पतिक नाम मायरिस्टिका फ्रैगरैंस और अंग्रेजी नाम मेस है। अन्य मसालों की तरह यह भी लगभग हर घर की रसोई में पाया जाता है। यह मसाला हल्के पीले, नारंगी या सुनहरे रंग का होता है। यह न सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाता है, बल्कि कई वर्षों से औषधीय गुणों के कारण भी इसका उपयोग किया जा रहा है।
जावित्री क्या है? यह जानने के बाद अब बात करते हैं जावित्री के फायदों के बारे में।
जावित्री के फायदे –
- पाचन के लिए जावित्री
व्यस्त दिनचर्या के कारण ज्यादा बाहरी खाना या ठीक वक्त पर न खाने से पेट और पाचन संबंधी समस्याएं आम हैं। कई लोग तो पाचन क्रिया को ठीक रखने के लिए दवाइयों के आदी हो चुके हैं, जो कि सही नहीं है। ऐसी में जैसे जायफल पाचन के लिए फायदेमंद है, वैसे ही जावित्री भी पेट और पाचन के लिए लाभकारी है। एक रिसर्च के अनुसार, जायफल और जावित्री दोनों को पाचन शक्ति बढ़ाने के लिए उपयोग किया जा सकता है। - डायबिटीज के लिए जावित्री
आजकल डायबिटीज आम बीमारी हो गई है, जो किसी को भी हो सकती है। एक वक्त था, जब कुछ लोगों को ही यह समस्या होती थी और एक उम्र के बाद होती थी, लेकिन आज ऐसा नहीं है। इस स्थिति में जावित्री के सेवन से डायबिटीज की परेशानी काफी हद तक कम हो सकती है। जावित्री में मौजूद एंटी-डायबिटिक गुणों के कारण ऐसा संभव हो सकता है। - दांतों के लिए जावित्री
दांतों की देखभाल जरूरी होती है। अगर दांतों और मुंह के स्वास्थ्य का सही तरीके से ख्याल नहीं रखा जाए, तो इसका असर सेहत पर पड़ता है। ऐसे में जावित्री का उपयोग काफी फायदेमंद हो सकता है। इसमें मौजूद एंटीबैक्टीरियल और एंटी-कार्सिनोजेनिक गुण दांतों की समस्या से राहत दिला सकते हैं। यह दांतों को कैविटी की समस्या से बचा सकते हैं। इतना ही नहीं यह एंटी-कैंसर की तरह कार्य करता है और मुंह के कैंसर से बचाव कर सकता है । - किडनी के लिए जावित्री
जावित्री किडनी के लिए भी बहुत लाभकारी है, यह किडनी संबंधी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद कर सकती है । आजकल की बिगड़ी जीवनशैली की वजह से किडनी से जुड़ी बीमारियां भी बढ़ गई है। ऐसे में इससे बचने के लिए जावित्री का सेवन उपयोगी साबित हो सकता है। - सर्दी-जुकाम के लिए जावित्री
मौसम बदलने से सर्दी-जुकाम या बुखार की समस्या सामान्य है। इस स्थिति में तुरंत डॉक्टर के पास जाने से पहले कुछ घरेलू उपाय आजमाएं। ऐसे में जावित्री एक अच्छा घरेलू उपचार है। इसे कई वर्षों से उपयोग भी किया जा रहा है। इसके एंटी-एलर्जी, एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्मेटरी गुण सर्दी-जुकाम जैसी एलर्जिक समस्याओं से बचाव कर सकते हैं। इसलिए, कई बार आपने सुना होगा कि छोटे बच्चों को जावित्री या जायफल चटाने की बात कही जाती है। हालांकि, शिशु को किस उम्र में और कितनी मात्रा में जावित्री या जायफल देना चाहिए, इस बारे में डॉक्टर ही बेहतर बता सकते हैं। - भूख बढ़ाने के लिए जावित्री
कई बार बाहर का खाना खाने से पेट और पाचन संबंधी समस्याएं जैसे – एसिडिटी व पेट में संक्रमण हो जाता है, जिस कारण भूख कम हो जाती है। ऐसे में कई बार लोग लगातार दवाइयां लेने के आदी हो जाते हैं, जो ठीक नहीं है। ऐसे में जावित्री के उपयोग से पाचन शक्ति में सुधार आता है और भूख भी बढ़ती है। - लिवर के लिए जावित्री
कई बार ऐसा होता है कि बाहर खाना मजबूरी हो जाता है। जिस तरह की आजकल की दिनचर्या है, कभी-कभी लोग शौक के लिए भी बाहर खाते हैं। ऐसे में पेट की हालत दिन-ब-दिन खराब होते चली जाती है। तेल-मसाले वाले खाने का सीधा असर लिवर पर पड़ने लगता है और नतीजा लिवर की समस्या शुरू हो जाती है। इस स्थिति में वक्त रहते खाने-पीने पर ध्यान देना जरूरी है, साथ ही अगर जावित्री का उपयोग किया जाए तो और फायदा हो सकता है। इसका हेपटोप्रोटेक्टिव असर और एंटीऑक्सीडेंट गुण लिवर को डिटॉक्सीफाई कर उसे स्वस्थ रख सकता है (3)। इसलिए, इसे अपने डाइट में शामिल कर अपने लिवर को स्वस्थ रख सकते हैं। - गठिया के लिए जावित्री
उम्र के साथ-साथ हड्डियां कमजोर होने लगती हैं और शरीर में जगह-जगह दर्द भी होने लगता है। बढ़ती उम्र के साथ ऐसा होना सामान्य है, लेकिन आजकल की जीवनशैली और खान-पान की वजह से शरीर में पौष्टिक तत्वों की कमी हो जाती है। इस कारण से अभी के वक्त में हड्डियों से जुड़ी समस्या कम उम्र में ही होने लगती है और गठिया उन्हीं में से एक है। ऐसे में इससे बचाव के लिए आप जावित्री का सेवन कर सकते हैं। जावित्री में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। यह सूजन की वजह से जोड़ों में होने वाली समस्या, जिसे रूमेटाइड अर्थराइटिस कहते हैं, उससे बचा सकता है। रूमेटाइड अर्थराइटिस गठिया का ही एक प्रकार होता है।
बढ़ता वजन और मोटापा लगभग हर किसी की समस्या बन चुकी है। बाहरी और तैलीय खाना, व्यायाम न करना व सही वक्त पर न खाना इसकी अहम वजह है। जैसे ही मोटापा बढ़ता है, तो कई प्रकार की बीमारियां शरीर में घर करने लगती हैं। ऐसे में वक्त रहते इस पर ध्यान देना जरूरी है। सिर्फ खान-पान में बदलाव और व्यायाम ही काफी नहीं है, इसके साथ कुछ घरेलू उपाय भी जरूरी हैं। ऐसे में अगर आप जावित्री का सेवन करेंगे, तो मोटापे से काफी हद तक छुटकारा पाया जा सकता है। - अनिद्रा के लिए जावित्री
कई लोगों को आजकल अनिद्रा की समस्या होती है। काम का दबाव और तनाव के कारण नींद की कमी होना आम बात है। इस स्थिति में लोग नींद आने की दवा का सेवन करते हैं और उन्हें खुद भी पता नहीं चलता कि कब वो इसके आदी हो गए हैं। ऐसे में घरेलू नुस्खे के तौर पर आप जावित्री का उपयोग कर सकते हैं। इसके सेवन से आपके अनिद्रा की परेशानी काफी हद तक ठीक हो सकती है। इसे कई वर्षों से औषधि की तरह उपयोग किया जा रहा है। - एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर जावित्री
कई बार सूजन के कारण हमारा शरीर कई बीमरियों के चपेट में आ जाता है। जोड़ों में दर्द भी सूजन के कारण ही होता है, ऐसे में जावित्री का सेवन अच्छा विकल्प है। इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण किसी भी तरह के सूजन से काफी हद तक बचाव कर सकते हैं और शरीर को स्वस्थ्य रखने में मदद कर सकते हैं। - त्वचा के लिए जावित्री
खूबसूरत और चमकती त्वचा की चाहत लगभग हर किसी को होती है। निखरी त्वचा व्यक्तित्व को और निखारती है, लेकिन आजकल प्रदूषण भरे वातावरण में त्वचा की प्राकृतिक चमक खो रही है। ऐसे में कई बार लोग मेकअप, क्रीम और लोशन से खोई हुई चमक को वापस लाने की कोशिश करते हैं, लेकिन अफसोस कि इनका असर भी बस कुछ वक्त तक ही रहता है। यहां तक कि कई बार इसके दुष्प्रभाव के कारण त्वचा की बची-खुची चमक भी चली जाती है। इस स्थिति में घरेलू उपाय अच्छा विकल्प साबित हो सकता है। जावित्री के उपयोग से त्वचा पर न सिर्फ चमक आएगी, बल्कि उसमें मौजूद मैक्लिग्नन त्वचा को सूरज के हानिकारक किरणों से होने वाले नुकसान से भी बचाता है। - जावित्री पारंपरिक दवा की तरह
जावित्री को भारत में कई सालों से आयुर्वेदिक औषधि की तरह उपयोग किया जाता आ रहा है। इसमें एंटीफंगल, एंटीडिप्रेसेंट और पाचन बढ़ाने के गुण मौजूद हैं, जो आपके जीवन को बीमारियों से बचाकर आसान बनाने में मदद कर सकते हैं।
जावित्री का उपयोग
अगर जावित्री के फायदों को जल्दी और अच्छे तरीके से शरीर में अवशोषित करना चाहते हैं, तो इसका सही तरीके से उपयोग करना भी आवश्यक है। नीचे हम आपको जावित्री का उपयोग बता रहे हैं।
अगर जावित्री के फायदे हैं, तो उसके कुछ नुकसान भी है। नीचे हम जावित्री के कुछ नुकसान आपको बता रहे हैं।
-गर्भवती महिलाएं जावित्री के सेवन से बचें, अगर सेवन करना भी चाहती हैं, तो एक बार डॉक्टर से सलाह लें।
-स्तनपान कराने वाली मां भी इसके सेवन से बचे।
-अगर आपको जल्दी किसी चीज से एलर्जी होती है और आप पहली बार जावित्री का सेवन कर रहे हैं, तो इसका सेवन करने से पहले डॉक्टर से पूछ लें।


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