20 दिन के अनशन के बाद तड़के उठा ले गई पुलिस! जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक अस्पताल पहुंचाए गए, छात्रों में मचा हड़कंप

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पेपर लीक और शिक्षा सुधार को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच पुलिस की कार्रवाई से बढ़ा विवाद, आंदोलनकारियों ने लगाया जबरन हटाने का आरोप, पुलिस ने हाईकोर्ट के आदेश और स्वास्थ्य कारणों का दिया हवाला।

समाचार सच, नई दिल्ली। देशभर में शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के बीच शनिवार तड़के बड़ा घटनाक्रम सामने आया। करीब 20 दिन से आमरण अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस अस्पताल ले गई। इस कार्रवाई के बाद प्रदर्शन स्थल पर अफरा-तफरी मच गई और आंदोलनकारियों ने पुलिस पर जबरन उठाने तथा छात्रों के साथ धक्का-मुक्की का आरोप लगाया।

हालांकि दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया कि यह कदम दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह के आधार पर उठाया गया, क्योंकि लगातार अनशन के चलते वांगचुक की तबीयत बिगड़ रही थी।

पुलिस कार्रवाई से कुछ घंटे पहले ही सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर बताया था कि उनके आमरण अनशन को 20 दिन पूरे हो चुके हैं और इस दौरान उनका लगभग 20 प्रतिशत वजन कम हो गया है। उन्होंने कहा कि लंबे उपवास में पहले शरीर की चर्बी खत्म होती है, फिर मांसपेशियां कमजोर पड़ती हैं और अंत में शरीर के महत्वपूर्ण अंग प्रभावित होने लगते हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या देश में बच्चों की शिक्षा और उनका भविष्य महंगाई जैसे अन्य मुद्दों से भी कम महत्वपूर्ण हो गया है।

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आंदोलन से जुड़े लोगों का आरोप है कि शनिवार तड़के पुलिस पहले आंदोलन के संयोजक अभिजीत दिपके के ठिकाने पर पहुंची और उन्हें वहीं रोक दिया। इसके बाद पुलिस जंतर-मंतर पहुंची और सोनम वांगचुक को अस्पताल ले गई। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इस दौरान छात्रों के साथ धक्का-मुक्की हुई और कुछ ने लाठीचार्ज का भी आरोप लगाया, हालांकि पुलिस ने इन आरोपों की पुष्टि नहीं की है।

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वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद अनशन पर बैठे अन्य छात्रों—नेहा, आमेन और मनीष—की सुरक्षा को लेकर प्रदर्शनकारियों ने उनके चारों ओर मानव श्रृंखला बना ली। आंदोलनकारियों का कहना है कि तीनों छात्र भी अपने आमरण अनशन के 21वें दिन में प्रवेश कर चुके हैं और उन्हें हटाए जाने की आशंका बनी हुई है।

नई दिल्ली जिले के डीसीपी के अनुसार, हाईकोर्ट के निर्देश और डॉक्टरों की सलाह के बाद वांगचुक को इलाज के लिए अस्पताल ले जाना आवश्यक हो गया था। पुलिस का कहना है कि कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों ने रास्ता रोकने की कोशिश की, लेकिन पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से पूरी की गई।

जंतर-मंतर पर यह आंदोलन पिछले एक महीने से जारी है। प्रदर्शनकारी देशभर में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों पर जवाबदेही तय करने, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में सुधार लागू करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। सोनम वांगचुक इसी आंदोलन के समर्थन में आमरण अनशन पर बैठे थे।

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