शनि मंदिर को लेकर सोशल मीडिया पर ‘भ्रामक प्रचार’ का आरोप, समिति ने प्रेसवार्ता कर बताई 20 साल पुरानी पूरी कहानी

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समाचार सच, हल्द्वानी।
श्री शनिदेव जी महाराज एवं नवग्रह मंदिर को लेकर पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर चल रही चर्चाओं के बीच मंदिर समिति अब खुलकर सामने आई है। मंदिर समिति ने प्रेसवार्ता आयोजित कर मंदिर के इतिहास, स्थापना, धार्मिक गतिविधियों और समिति द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी सार्वजनिक की। समिति ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों द्वारा मंदिर को लेकर गलत और भ्रामक प्रचार किया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं और शनि भक्तों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।

मंदिर के संस्थापक नंदन सिंह डांगी ने प्रेसवार्ता में मंदिर की स्थापना से जुड़े विभिन्न पहलुओं को सामने रखते हुए बताया कि मंदिर की भूमि पूजा वर्ष 2005 में श्री चित्रेश्वर महादेव मंदिर, रानीबाग के तत्कालीन मुख्य पुजारी स्वर्गीय दयाल गिरि गोस्वामी द्वारा कराई गई थी।

उन्होंने बताया कि मंदिर निर्माण के बाद वर्ष 2007 में विभिन्न देवी-देवताओं की विधि-विधान से प्राण-प्रतिष्ठा एवं स्थापना की गई। इनमें श्री अर्धनारीश्वर जी महाराज, श्री पंचमुखी हनुमान जी, श्री शनिदेव जी महाराज, नवग्रह, आठ वाहनों पर विराजमान शनिदेव जी महाराज तथा शिव परिवार शामिल हैं। मंदिर के मुख्य द्वार के समीप भगवान गणेश जी के मंदिर की भी स्थापना की गई।
समिति के अनुसार, इन सभी धार्मिक कार्यों को स्वर्गीय दयाल गिरि गोस्वामी के कार्यकाल में मंदिर समिति के माध्यम से संपन्न कराया गया था।

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शनिवार को उमड़ते हैं श्रद्धालु, लगातार होते हैं धार्मिक आयोजन
मंदिर समिति ने बताया कि स्थापना के समय से ही प्रत्येक शनिवार और विशेष धार्मिक आयोजनों के अवसर पर शनि मंदिर के साथ गणेश मंदिर, श्री चित्रेश्वर महादेव मंदिर, मां गार्गी, भैरव मंदिर, मां जिया रानी और मां काली मंदिर में पूजा-पाठ, आरती और भोग की व्यवस्था समिति की ओर से की जाती रही है।
मंदिर के पुजारी नवीन चंद्र जोशी ने बताया कि प्रत्येक शनिवार सहित अन्य विशेष अवसरों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं। श्रद्धालु शनि दोष, साढ़ेसाती, ढैय्या और अन्य ग्रहों से संबंधित मान्यताओं के निवारण के लिए यज्ञ, पूजा, हवन और भंडारे जैसे धार्मिक आयोजन कराते हैं।

चित्रेश्वर महादेव मंदिर के जीर्णोद्धार का भी किया दावा
मंदिर समिति ने श्री चित्रेश्वर महादेव मंदिर के जीर्ण-शीर्ण होने का भी उल्लेख किया। समिति के अनुसार मंदिर की स्थिति खराब होने और गुम्बद क्षतिग्रस्त होने के कारण बारिश का पानी मंदिर के भीतर आने लगा था।
समिति के मुताबिक तत्कालीन मुख्य पुजारी स्वर्गीय दयाल गिरि गोस्वामी के अनुरोध पर मंदिर समिति ने आर्थिक सहयोग देकर श्री चित्रेश्वर महादेव मंदिर का जीर्णोद्धार कराया।
समिति ने कहा कि वर्तमान में भी शनि मंदिर, गणेश मंदिर, श्री चित्रेश्वर महादेव मंदिर, मां गार्गी और भैरव मंदिर में पूजा-पाठ, आरती और भोग की धार्मिक व्यवस्थाएं महंत स्वर्गीय दयाल गिरि गोस्वामी के पुत्र कमल गिरि गोस्वामी द्वारा संपन्न कराई जाती हैं।

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‘भ्रामक प्रचार से भक्तों को भ्रमित न किया जाए’
प्रेसवार्ता के दौरान मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि मंदिर से संबंधित किसी भी विषय पर यदि किसी व्यक्ति को कोई जानकारी या आपत्ति है तो उसे तथ्यों के आधार पर सामने रखा जाना चाहिए। सोशल मीडिया पर अधूरी अथवा गलत जानकारी प्रसारित करने से धार्मिक आस्था से जुड़े लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।
समिति ने दावा किया कि मंदिर वर्षों से धार्मिक गतिविधियों का केंद्र रहा है और यहां आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था एवं धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना लगातार संचालित होती रही है।
मंदिर समिति ने लोगों से अपील की कि सोशल मीडिया पर प्रसारित किसी भी जानकारी पर विश्वास करने से पहले उसकी वास्तविकता और तथ्य की पुष्टि अवश्य करें।

प्रेसवार्ता में संस्थापक नंदन सिंह डांगी, हेमंत कुमार भईयू, नवीन चंद्र जोशी, हर्षवर्धन पांडे, महंत कमल गिरि गोस्वामी, महंत विवेक शर्मा, पूर्व अध्यक्ष अमित आसवानी, पदम पाल, दिनेश गुप्ता, नरेश भंडारी, रोहित बिष्ट, यश गुप्ता, शुभम मेलकानी, गौरव सिंह न्याल, रोहित गुप्ता, अमन जायसवाल, प्रमोद आर्या, सूरज आर्या सहित कई शनि सेवक, धार्मिक संगठनों से जुड़े लोग और समाजसेवी मौजूद रहे।

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