बदरीनाथ धाम चढ़ावा विवाद: भैरव सेना ने न्यायिक जांच और FIR की मांग की, BKTC बोला- जांच पूरी होने से पहले निष्कर्ष नहीं

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भैरव सेना ने चढ़ावे में कथित अनियमितता को श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा मुद्दा बताया, जबकि बदरी-केदार मंदिर समिति ने कहा— शिकायत मिलते ही जांच शुरू कर दी गई थी, रिपोर्ट के बाद ही होगी आगे की कार्रवाई।

समाचार सच, देहरादून। विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित अनियमितता के आरोपों को लेकर विवाद गहरा गया है। हिंदू संगठन भैरव सेना ने मामले की न्यायिक जांच, दोषियों के खिलाफ एफआईआर और सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) ने स्पष्ट किया है कि शिकायत मिलते ही जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी और बिना जांच पूरी हुए किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

भैरव सेना ने प्रेस वार्ता में आरोप लगाया कि यदि चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल आर्थिक अनियमितता नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर सीधा आघात होगा। संगठन ने मांग की कि पूरे मामले की जांच किसी सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित स्वतंत्र समिति से कराई जाए। साथ ही आरोपियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर उन्हें पद से हटाने की भी मांग की गई।

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संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर संतोषजनक कार्रवाई नहीं होती है तो राज्यभर में जनआंदोलन शुरू किया जाएगा। प्रदर्शन मंदिर परिसर से लेकर संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के कार्यालयों तक किए जाएंगे।

इधर मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी सोहन रांगड़ ने कहा कि समिति को 2 जुलाई को शिकायत मिली थी और 3 जुलाई को ही जांच समिति गठित कर दी गई थी। वरिष्ठ अधिकारियों की टीम पूरे मामले की जांच कर रही है और प्रारंभिक रिपोर्ट 10 जुलाई तक आने की संभावना है।

उन्होंने बताया कि जिन कर्मचारियों पर आरोप लगाए गए हैं, उन्हें संबंधित स्थान से हटा दिया गया है तथा सभी संबंधित लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। समिति ने यह भी कहा कि मंदिर परिसर में लगे हाई-रिजोल्यूशन CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी गई है और जांच के दौरान सभी तथ्यों का परीक्षण किया जाएगा।

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पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया कि आरोप लगाने वाले संगठन ने स्वीकार किया है कि उनके पास कथित अनियमितता से जुड़ा कोई प्रत्यक्ष CCTV फुटेज या दस्तावेजी साक्ष्य फिलहाल उपलब्ध नहीं है। संगठन का कहना है कि उसे मंदिर के कुछ कर्मचारियों से मिली सूचनाओं के आधार पर मामला सामने लाया गया है। वास्तविक स्थिति जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी।

वहीं मंदिर समिति का कहना है कि बिना ठोस प्रमाण केवल आरोपों के आधार पर किसी को दोषी ठहराना उचित नहीं है। समिति के अनुसार निष्पक्ष जांच पूरी होने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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