समाचार सच, स्वास्थ्य डेस्क। ऐसी कोई रसोई नहीं होगी जिसमें गृहिणी अपने मसालेदानी में लौंग, इलायची, सौंफ के साथ तेजपत्ता न रखे। पुलाव, दम आलू और बंगाली व्यंजन पायेश की महक बिना तेजपत्ते के अधूरी होती है। तेजपत्ते को बोटेनिकल भाषा में लॉरेस नोबिल्स कहा जाता है। इसकी लंबाई 3 इंच तक होती है, यह दिखने में हरा और चमकदार होता है। हमेशा हरे रहने वाले तमाल वृक्ष के पत्ते, जिन्हें संस्कृत में तमालपत्र कहा जाता है, बोलचाल की भाषा में इसे तेजपत्ता या तेजपात भी कहा जाता है।
औषधीय महत्व:
पाचन से जुड़े रोग में चाय में तेजपत्ते का इस्तेमाल करके कब्ज, एसिडिटी या मरोड़ से मुक्ति पा सकते हैं। इसका इस्तेमाल टाइप-2 डायबिटीज में करना फायदेमंद होता हैं यह हमारे शरीर में ब्लड शुगर को सामान्य बनाये रखता है और दिल की कार्यप्रणाली पर सकारात्मक असर डालता है। किडनी के स्टोन और किडनी से जुड़ी समस्याओं के लिए तेजपत्ते का इस्तेमाल फायदेमंद होता हैं यह एक दर्दनिवारक है। दर्द प्रभावित जगह पर इसके तेल की मालिश करने से फायदा पहुंचता है। सिर में दर्द हो तो इसके तेल की मसाज करनी चाहिए। यह अल्मोइजर, बांझपन, खांसी-जुकाम, जोड़ों के दर्द, ठंड लगने जैसे अनेक रोगों में उपयोगी होता है।
भोजन परोसने के बाद
अपनी रसोई में भोजन पकाने में अगर तेजपत्ते का इस्तेमाल किया जाता है तो इन्हें पूरे पत्तों के रूप में ही डाला जाता है और भोजन परोसने से पहले इसे हटा दिया जाता हैं कई व्यंजनों में तेजपत्ते को खाना पकाने से पहले कुचला या पीसा जाता है। कुचलकर तेजपत्ता जब डाला जाता है तो वह ज्यादा खुशबू देता है, लेकिन उन्हें पके भोजन से हटाना मुश्किल होता है, इसलिए एक मलमल के बैग या चाय की थैली में रखकर का इसका इस्तेमाल किया जाता है।

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