समाचार सच, देहरादून।
उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच अब फ्लैश फ्लड का खतरा भी बढ़ गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के हाइड्रोमेट डिवीजन की फ्लैश फ्लड गाइडेंस सेल ने अगले 24 घंटे के लिए उत्तराखंड को लेकर चेतावनी जारी की है। इसके मुताबिक 12 जिलों के कुछ जलग्रहण क्षेत्रों और आसपास के इलाकों में कम से मध्यम स्तर के फ्लैश फ्लड का खतरा बना हुआ है।
मौसम विभाग का यह अलर्ट ऐसे समय आया है, जब चमोली में एक दिन पहले ही अचानक आए जलसैलाब ने भारी नुकसान पहुंचाया और सीमांत क्षेत्र का संपर्क प्रभावित हुआ।
फ्लैश फ्लड रिस्क बुलेटिन के अनुसार अल्मोड़ा, बागेश्वर, चमोली, चंपावत, देहरादून, टिहरी, हरिद्वार, नैनीताल, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और पौड़ी के कुछ क्षेत्रों में अचानक बाढ़ का खतरा संभावित है।
अत्यधिक बारिश के कारण ढीली मिट्टी वाले क्षेत्रों और निचले इलाकों में तेजी से सतही जल बहाव बढ़ सकता है। इससे जलभराव, छोटी नदियों-नालों में अचानक पानी बढ़ने और स्थानीय स्तर पर फ्लैश फ्लड जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
फ्लैश फ्लड की चेतावनी के बीच चमोली में 10 अगस्त को अचानक आए जलसैलाब ने तबाही मचा दी थी।
ज्योतिर्मठ-मलारी मोटर मार्ग पर तमक नाले में अचानक आए तेज जलप्रवाह में एक वैली ब्रिज और वाहन बह गया। इस घटना में एक बीआरओ कर्मी के लापता होने की सूचना भी सामने आई है।
जलसैलाब के बाद मलारी से आगे आवाजाही बाधित हो गई, जबकि चीन सीमा से लगे सीमांत गांवों का संपर्क भी प्रभावित हुआ है।
उत्तराखंड आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन के अनुसार, मौसम विभाग और अन्य तकनीकी संस्थानों से प्राप्त पूर्व चेतावनियों के आधार पर राज्य का आपदा प्रबंधन तंत्र पूरी तरह अलर्ट मोड पर है।
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) से प्रदेश की स्थिति पर 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है। सभी जिलों के आपातकालीन परिचालन केंद्रों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है।
संभावित फ्लैश फ्लड, जलभराव, भूस्खलन और नदी-नालों में अचानक जलस्तर बढ़ने की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन और संबंधित विभागों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन ने लोगों और पर्यटकों से अपील की है कि लगातार बारिश या खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें। नदी, नाले, गदेरे और बरसाती जलधाराओं के पास जाने से बचने की सलाह दी गई है।
पहाड़ों में छोटी जलधाराओं में भी अचानक तेज पानी आ सकता है। ऐसे में पुल-पुलियों, नदी किनारे और जलभराव वाले रास्तों को पार करने की कोशिश जानलेवा साबित हो सकती है।
भूस्खलन संभावित मार्गों पर भी विशेष सावधानी बरतने और यात्रा से पहले मौसम तथा सड़क की स्थिति की जानकारी लेने की अपील की गई है।
फिलहाल राज्य में मौसम की स्थिति पर प्रशासन की लगातार नजर है और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है।

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