समाचार सच, स्वास्थ्य डेस्क। चौबीस घंटे और सातों दिन जागने वाली दुनिया में रात के खाने को टालने की बात करना सही नहीं होगा। देर रात में भोजन करना कुछ के लिए मजबूरी है तो बहुतों की आदत बन गई है। लेकिन सेहत को भी नुकसान न हो, इसके लिए खाने में बेहतर विकल्पों का चुनाव किया जा सकता है। क्या खाएं, क्या नहीं, बता रहे हैं संत समीर पिछले दिनों अमेरिका के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में देर रात में खाने की आदत पर एक शोध हुआ। वैज्ञानिक डा. डान लाह और साइकिएट्री बायोविहैवियरल साइंसेज के प्रोफेसर डा. क्रिस कालवेल के इस प्रोजेक्ट के निष्कर्ष के अनुसार रात में देर से खाने की आदत का दिमाग पर बुरा प्रभाव पड़ता है। शोध के अनुसार गलत समय पर खाने से दिमाग और शरीर की जैव घड़ियों का आपसी तालमेल गड़बड़ा जाता है और नई चीजें सीखने और उन्हें याद रखने में दिक्कतें आने लगती हैं। एक और अमेरिकी शोध का निष्कर्ष है कि दिन में काम करने वालों की तुलना में रात की पाली में काम करने वाले लोग ज्यादा खाने के आदी हो जाते हैं और इस रह कैलोरी लेने के समय का भी कोई नियम नहीं बना रह पाता। नतीजतन, वजन बढ़ने की समस्या से दो-चार होना पड़ जाए तो आश्चर्य नहीं। टाइप-2 डायबिटीज और हाइपर एसिडिटी के साथ ग्रासनली के कैंसर का खतरा भी ऐसे लोगों के लिए बढ़ जाता है। खाने के बाद तुरंत सोने से हृदयाघात की आशंका बढ़ जाती है। खतरे तमाम, पर करना ही पड़े कामकृतो आप क्या करेंगे? आज के समय में देर रात तक जागना पड़े, रात की पाली वाली ड्यूटी निभानी पड़े, तो सेहत को तमाम खतरे हो जाते हैं। ऐसा इसलिए कि इन स्थितियों में देर रात में खाना खाने की भी मजबूरी बन जाती है। कुछ समय पहले हुए होम कुकिंग एंड ईिटंग हैबिटर ग्लोबल सर्वे के अनुसार 63: भारतीय 8 से 9 बजे के बीच भोजन करते हैं तो 28: उससे भी देर में। खास बात यह है कि देर रात में खाने वालों का यह प्रतिशत लगातार तेजी से बढ़ रहा है। जो सेहत के लिहाज से अच्छी खबर नहीं है। रात के भोजन को 7 बजे से पहले करने पर यकीन रखने वाले आहार विशेषज्ञों की मानें तो इन दिनों रात 8 बजे के बाद टीवी के सामने बैठे हुए कुछ भी खाते रहने की लोगों की आदत उनके तन और मन दोनों पर विपरीत असर डाल रही है।
जरूरी है रात का खाना: तो क्या देर रात में खाने के इन नुकसानों को जानने के बाद रात के खाने से तौबा ही कर लिया जाए? नहीं ऐसा नहीं करें। रात के खाने के फायदे-नुकसान इस बात पर विशेष रूप से निर्भर हैं कि आप क्या खाते हैं? पिछले दिनों लंदन के किंग्स कालेज में एक शोध हुआ, जिसका दिलचस्प निष्कर्ष यह था कि रात आठ बजे के बाद खाने का बच्चों के मोटापे की समस्या के साथ कोई सीधा संबंध नहीं है। मोटापा इस बात पर अधिक निर्भर करता है कि खाने में कौन-सी चीजें हैं और कितनी हैं। पोषण विशेषज्ञ भी रात में खाली पेट सोने के लिए मना करते हैं। यदि आप दिन के भोजन के बाद रात का भोजन नहीं करते हैं तो कई घंटे खाली पेट रहने से एसिडिटी, जी मिचलाना, कमजोरी और अनिद्रा जैसे कई रोगों के शिकार बन सकते हैं। शरीर को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए जरूरी पोषक तत्वों की पूर्ति के लिए भी थोड़े-थोड़े समयांतराल पर कुछ खाते रहें। रात में आप खा क्या रहे हैं? रात का खाना तब सेहत के लिए खतरे का सबब बन जाता है, जब हम केवल स्वाद के कारण गरिष्ठ चीजें खाने के आदी बनने लगते हैं। रात में हमारी पाचन क्रिया धीमी हो जाती है। दिन डूबने के साथ शरीर की सारी क्रियाएं शिथिल यानी धीमी पड़ने लगती हैं। यह प्रकृतिगत नियम है। जाहिर है, ऐसे में आंतों को भी भारी काम देना समझदारी नहीं है। रात का भोजन गरिष्ठ यानी पचने में भारी होगा तो आंतों को अतिरिक्त सक्रियता दिखानी होगी। नतीजा यह होगा कि नींद ठीक से नहीं आएगी और अपच, गैस, एसिडिटी, हाइपरटेंशन, बेचौनी और चिड़चिड़ेपन जैसी परेशानियां भी आएंगी। हृदय रोग विशेषज्ञ कहते हैं कि दिल को सही-रखना है तो हमें पश्चिम के लोगों की नकल से बचने की जरूरत है। जंक फूड हमारे लिए कहीं ज्यादा नुकसानदेह हो सकते हैं। रात में ज्यादा तैलीय, मसालेदार, आइसक्रीम जैसी वसायुक्त और कार्बाेहाइड्रेट वाली चीजों से बचना चाहिए।
कब और क्या खाएं: रात में देर तक काम करनेवालों को रात के भोजन की तैयारी शाम तीन-चार बजे से ही शुरू कर देनी चाहिए। यदि ड्यूटी का समय शाम तीन-चार बजे से शुरू होता है और आधी रात को खत्म होता है तो दोपहर का खाना घर से खाकर जाएं। तब रात का खाना सात-आठ बजे के आसपास बड़े आराम से खा सकते हैं। बेहतर है घर से टिफिन लेकर जाएं। जो लोग आठ बजे की शिफ्ट में काम करते हैं, वे घर से ही खाना खाकर आएं। घर का खाना खाएं या बाहर का, रात में भोजन हल्का ही करें। भोजन से पहले जी भर कर सलाद खाएं। इससे शरीर को रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले भरपूर तत्व मिलेंगे। खाने की मात्रा भी नियंत्रित रहेगी। रात में नौ-दस बजे तक भोजन कर लें। सोने से कम-से-कम दो घंटे पहले भोजन कर लें। किसी वजह से किसी दिन समय पर खाने का वक्त न निकाल पाए हों तो कुछ मौसमी फल खाएं या एक गिलास ठंडे दूध में दो चम्मच शहद और एक चम्मच शु( देशी घी मिलाकर पिएं और सो जाएं। जो लोग शाम को जल्दी खाना खा लेते हों, अनुकूल पड़े तो वे यह प्रयोग खाने के करीब दो घंटे बाद नियमित रूप से कर सकते हैं। दूध से शरीर को ज्यादातर जरूरी पोषक तत्व मिल जाते हैं। शहद में कई तरह के एंटी-आक्सीडेंट्स होते हैं। जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता तो बढ़ती ही है, नींद भी अच्छी आती है। बीमारी की स्थिति में डाक्टर की सलाह ले लें।
शाम में ग्रीन-टी जैसी चीजें ले सकते हैं, पर देर रात में चाय, काफी की तरह ग्रीन-टी भी न लें, क्योंकि कैफीन की थोड़ी भी मात्रा नींद पर असर डाल सकती है। रात के खाने में दाल, चावल, राजमा जैसी चीजों से बचें, क्योंकि ये पचने में भारी होते हैं। रात का खाना अच्छा है कि यह जैतून जैसे किसी मोनो-अनसैचुरेटेड वसा वाले तेल में बना हो। ऐसा तेल कैलोरी जलाने में सहायक तो होता ही है, मेटाबालिज्म भी बढ़ाता है। माइक्रोवेव किया हुआ ओटमील या टोस्ट खाने की नौबत हो तो इस पर दालचीनी का पाउडर बुरक कर खाएं। यह छोटी-सी सावधानी अनचाही कैलोरी से छुटकारा दिलाने में मदद करेगी। इस मौसम में रात के भोजन में सिर्फ आम और दूध से भी जरूरी सभी पोषक तत्व मिल जाते हैं।
देर तक जगें तो ये करें: खूब पानी पिएं देर रात तक जगना पड़े तो हर घंटे-डेढ़ पर घंटे पर पानी जरूर पिएं। सोने से कुछ समय पहले एक गिलास पानी में एक नींबू का रस और दो-तीन चम्मच शहद मिलाकर पी सकते हैं। यदि भूख का एहसास हो तो कोई फल ले सकते हैं। पपीता हर मौसम के लिए मुफीद रहता है। हर्बल-टी या तुलसी का काढ़ाकृदेर रात तक जागना हो तो इसे चाय के स्थान पर ले सकते हैं। तुलसी के पत्तों के चूर्ण के साथ लौंग, इलायची, दालचीनी, तेजपत्ता, काली मिर्च, अदरक या सोंठ और मुलहठी जैसी चीजें मिलाकर बनी चाय पी सकते हैं।
ये न खाएं: देर तक जगने वालों में हल्के नाश्ते के प्रति रुचि देखी जाती है। ऐसे में तली-भुनी चीजें, पास्ता, चाकलेट, ब्रेड, टोमैटो सास, लहसुन, रेड मीट, शराब, ब्रोकली, नूडल्स, चिप्स और मैदे से बनी चीजों से परहेज करें। ये चीजें एसिडिटी करती हैं। नींद में बाधा होती है।
विकल्प रखें तैयार: वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर मूंगफली, बादाम, काजू, किशमिश और अखरोट जैसे कुछ मेवे और भुने चने वगैरह अपने पास रखें। देर तक खाने को कुछ न मिले तो थोड़ी मात्रा में इन्हें खाएं। कुछ रोगों से बचना है तो रात के भोजन में इन्हें खाएं
अम्लपित्त: सब्जियों में तोरई, लौकी, परवल, टिंडा, गाजर आदि शामिल करें। भोजन से करीब घंटे भर पहले एक गिलास गुनगुने पानी में एक नींबू निचोड़कर पिएं। भोजन के बाद कच्चा नारियल चबाएं। अम्लपित्त में ठंडा दूध भी फायदेमंद है।
अनिद्रा: सोने से पहले नींबू-शहद-पानी या दूध में दो चम्मच शहद मिलाकर पिएं। गाजर का रस, पत्तागोभी की सब्जी नींद के लिए फायदेमंद हैं।
हृदय रोग: अखरोट, बादाम, मुनक्का, पिस्ता जैसे मेवे हृदय रोगों से बचाते हैं। रात में कुछ पीने का मन है तो अंगूर, अनार, लीची, गाजर, नींबू, शहद, मौसमी, तुलसी का काढ़ा फायदा करता है। 50 मिलीलीटर लौकी के रस में बराबर मात्रा में पानी मिलाएं और इसमें चार काली मिर्च व चुटकी भर सेंधा नमक मिलाकर शाम को पिएं तो एंजाइना जैसे हृदय रोगों में काफी राहत मिल सकती है।
उच्च रक्तचाप: सब्जियों में लौकी, कच्चा पपीता, टिंडा, चौलाई, गाजर जैसी चीजें शामिल करें। सेब, पका पपीता, आंवला, तरबूज, ककड़ी, पुदीने की चटनी जैसी चीजें भी फायदेमंद रहती हैं।
डायबिटीज: करेला, भिंडी, शलगम, गाजर जैसी सब्जियां मुफीद हैं। नींबू, आंवला, जामुन, गाजर-पालक का रस, मेथी आदि लेने से मधुमेह का खतरा कम हो जाता है।
अपच: मौसमी फल सुपाच्य होते हैं और फाइबरयुक्त भी। पपीता इस मामले में अच्छा है। भोजन के बाद थोड़ी-सी अजवायन अपच में लाभ करती है। नींबू की फांक पर सेंधा नमक छिड़क कर गर्म करके चूसने से भी आराम मिलेगा।


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