दोस्ती का जश्न मातम में बदला: घर से मुस्कुराकर निकला हल्द्वानी का आदित्य, चांफी के गधेरे ने छीन ली माता-पिता की दुनिया

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समाचार सच, हल्द्वानी। रिपोर्ट- अजय चौहान
रविवार को देशभर में मित्रता दिवस (फ्रेंडशिप डे) का उत्साह था। युवा अपने दोस्तों के साथ घूमने-फिरने और यादगार पल बिताने की तैयारी में थे। लेकिन हल्द्वानी के मुखानी बमौरी निवासी एक परिवार के लिए यही दिन जिंदगी का सबसे बड़ा दर्द बन गया। दोस्तों के साथ घूमने गया 19 वर्षीय आदित्य पाठक अब कभी घर नहीं लौटेगा। भीमताल के चांफी गधेरे में नहाते समय वह गहरे पानी में समा गया और देखते ही देखते एक परिवार का इकलौता चिराग हमेशा के लिए बुझ गया।

जानकारी के अनुसार आदित्य अपने रिश्ते के भाई सहित सात दोस्तों के साथ रविवार को चांफी घूमने गया था। पहाड़ों की खूबसूरत वादियों के बीच बहते गधेरे में सभी दोस्त मौज-मस्ती कर रहे थे। किसी ने शायद यह नहीं सोचा था कि कुछ ही पलों में यह सैर जिंदगी की सबसे दर्दनाक याद बन जाएगी।

नहाने के दौरान अचानक आदित्य गहरे पानी में चला गया और डूबने लगा। उसके साथ पानी में उतरे अन्य दोस्तों ने उसे बचाने की भरपूर कोशिश की, लेकिन तेज बहाव और गहराई के आगे उनके प्रयास नाकाम साबित हुए। शोर सुनकर आसपास मौजूद स्थानीय लोग भी मौके पर पहुंचे और काफी मशक्कत के बाद उसे बाहर निकाला। तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भीमताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

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हादसे की खबर जैसे ही मुखानी स्थित घर पहुंची, वहां खुशियों की जगह चीख-पुकार गूंज उठी। बेटे के इंतजार में बैठे माता-पिता को यह विश्वास ही नहीं हुआ कि उनका लाल अब इस दुनिया में नहीं रहा। इकलौते बेटे की असमय मौत से परिवार पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूटा है, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है।

आदित्य के पिता दीपक पाठक मंडी समिति में संविदा पर सहायक लेखाकार के पद पर कार्यरत हैं, जबकि मां नेहा डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय मेडिकल कॉलेज में सेवाएं दे रही हैं। आदित्य भीमताल के एक निजी कॉलेज में बीसीए का छात्र था। परिजनों और परिचितों के अनुसार वह पढ़ाई में मेधावी, व्यवहार में विनम्र, संस्कारी और सभी का प्रिय था। उसकी मुस्कान और सरल स्वभाव ने उसे हर किसी का चहेता बना दिया था।

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सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद जब आदित्य का पार्थिव शरीर घर पहुंचा तो पूरे क्षेत्र का माहौल गमगीन हो गया। रिश्तेदार, मित्र और आसपास के लोग नम आंखों से उसे अंतिम विदाई देने पहुंचे। हर किसी की जुबान पर एक ही बात थीकृकाश, उस दिन वह गधेरे में नहाने नहीं उतरा होता।

यह हादसा एक बार फिर चेतावनी देता है कि बरसात के मौसम में नदी, गधेरों और झरनों का पानी जितना सुंदर दिखाई देता है, उतना ही खतरनाक भी हो सकता है। थोड़ी-सी लापरवाही एक परिवार की जिंदगी हमेशा के लिए बदल सकती है। ऐसे पर्यटन स्थलों पर युवाओं को विशेष सतर्कता बरतने और जोखिम भरे स्थानों पर पानी में उतरने से बचना चाहिए।

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