दशहरा 2023: दशहरे पर जरूर करें शमी वृक्ष की पूजा, शत्रुओं पर प्राप्त होगी विजय

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समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। नवरात्रि के दसवें दिन विजयादशमी यानी दशहरा मनाया जाता है। इस दिन भगवान राम ने लंकापति रावण का वध किया था। ऐसे में दशहरा का पावन पर्व बुराई पर अच्छाई का प्रतीक माना जाता है। देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग रीति-रिवाजों से दशहरा का त्योहार मनाया जाता है। दशहरे के दिन कई जगहों पर शस्त्र और शमी के पेड़ की पूजा की जाती है।

शमी के पेड़ की पूजा
पौराणिक कथाओं के अनुसार महाभारत के समय पांडवों ने अपने अस्त्र और शस्त्र शमी के वृक्ष पर छिपाए थे। जिसके बाद उन्होंने महाभारत के युद्ध में कौरवों पर विजय प्राप्त की थी। ऐसे में दशहरे के दिन प्रदोषकाल के दौरान शमी के पेड़ की पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है।

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भगवान शिव को शमी के फूल अति प्रिय माने जाते हैं। रोजाना पूजा के वक्त उन्हें यह फूल अर्पित करने से भगवान प्रसन्न होते हैं। शमी के पेड़की रोजाना पूजा करने से जीवन के संकटों से मुक्ति मिलती है और सुख, समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है।

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शमी की पूजा के नियम

  • सबसे पहले स्नान कर स्वच्छ कपड़े धारण कर लें।
  • शमी वृक्ष की जड़ में गंगाजल, नर्मदा जल या शुद्ध जल अर्पित करें।
  • उसके बाद तेल या घी का दीपक जलाकर उसके नीचे अपने शस्त्र रख दें।
  • अब धूप, दीप, मिठाई अर्पित कर आरती करें।

पूजा करने के बाद अगर आपको पेड़ के पास कुछ पत्ते मिले तो उसे प्रसाद के रूप में लें। साथ ही बचे हुए पत्तों को लाल कपड़े में बांधकर हमेशा के लिए अपने पास रख लें। इससे आपके जीवन की परेशानियां दूर होंगी और शत्रुओं से छुटकारा मिलेगा।

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