समाचार सच, हल्द्वानी। पर्यावरण संरक्षण की अलख जगाने और नई पीढ़ी को प्रकृति के प्रति जिम्मेदार बनाने के उद्देश्य से 5 अगस्त को गौलापार स्थित वेंडी कॉन्वेंट स्कूल परिसर में साथी संगठन, हल्द्वानी के सौजन्य से पौधरोपण एवं पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पर्यावरणविद् एवं पूर्व जिला आयुर्वेद अधिकारी डॉ. आशुतोष पन्त ने पौधों का सहयोग प्रदान करते हुए विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण, वृक्षों के महत्व तथा पॉलीथीन के बढ़ते दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया।
कार्यक्रम में विद्यालय परिसर में विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया। इस अवसर पर डॉ. आशुतोष पंत ने कहा कि बढ़ता प्रदूषण और अंधाधुंध प्लास्टिक का उपयोग प्रकृति के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। यदि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण देना है तो प्रत्येक व्यक्ति को अधिक से अधिक पौधे लगाने और सिंगल यूज पॉलीथीन का उपयोग पूरी तरह बंद करने का संकल्प लेना होगा। उन्होंने छात्रों से अपने जन्मदिन एवं अन्य विशेष अवसरों पर पौधे लगाने तथा उनकी नियमित देखभाल करने की अपील भी की।
कार्यक्रम में वन विभाग से सेवानिवृत्त मदन बिष्ट ने वन संपदा के संरक्षण और जैव विविधता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वृक्ष केवल पर्यावरण को संतुलित नहीं रखते, बल्कि मानव जीवन के अस्तित्व का आधार भी हैं। वहीं प्रोफेसर शंकर दत्त तिवारी ने विद्यार्थियों को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने और पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाने का संदेश दिया।
विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने भी पौधरोपण अभियान में उत्साहपूर्वक भाग लिया और पर्यावरण संरक्षण की शपथ ली। कार्यक्रम के दौरान पॉलीथीन से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान, जल स्रोतों पर इसके दुष्प्रभाव और स्वच्छ पर्यावरण की आवश्यकता पर विस्तार से जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के सफल आयोजन पर डॉ. आशुतोष पंत ने साथी संगठन, हल्द्वानी के सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायी पहल बताया। साथ ही विद्यालय के प्रबंधक पी.सी. बवाड़ी का आभार व्यक्त किया, जिनके सहयोग से यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
इस अवसर पर उपस्थित सभी अतिथियों ने एक स्वर में कहा कि यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में कम से कम एक पौधा लगाकर उसका संरक्षण करने का संकल्प ले, तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी और पर्यावरण बचाने का सकारात्मक संदेश छोड़ते हुए हरित भविष्य की नई उम्मीद जगाई।

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