शोध के पांच साल सिर्फ डिग्री के लिए नहीं, समाज के काम आने चाहिए: यूओयू में शोधार्थियों को मिला संदेश

खबर शेयर करें

समाचार सच, हल्द्वानी। उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय में शोध की गुणवत्ता, सामाजिक सरोकार और आधुनिक तकनीक के उपयोग को लेकर दो दिवसीय शोध कार्यशाला की शुरुआत हुई। निदेशालय शोध एवं नवाचार की ओर से आयोजित इस कार्यशाला में पीएचडी शोधार्थियों की छमाही प्रगति की समीक्षा के साथ शोध की दिशा और उसके सामाजिक प्रभाव पर विशेषज्ञों ने मंथन किया।

विश्वविद्यालय के सीडीएस जनरल बिपिन रावत बहुउद्देशीय सभागार में आयोजित उद्घाटन सत्र का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और विश्वविद्यालय के कुलगीत के साथ हुआ। निदेशक शोध प्रो. गिरिजा प्रसाद पाण्डे ने शोधार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि आज पूरी दुनिया में रिसर्च एंड डेवलपमेंट को लेकर तेजी से काम हो रहा है। ऐसे में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल केवल कॉपी-पेस्ट तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका उपयोग शोध की गुणवत्ता और मौलिकता बढ़ाने के लिए किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि शोधार्थी अपने जीवन के चार-पांच वर्ष शोध में लगाते हैं, इसलिए इस मेहनत का लाभ केवल डिग्री तक सीमित न रहकर राज्य, देश और वैश्विक समाज तक पहुंचना चाहिए।

यह भी पढ़ें -   रक्षाबंधन पर बहनों को धामी सरकार की सौगात, 28-29 अगस्त को रोडवेज बसों में मुफ्त सफर

कार्यशाला में महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी के पूर्व कुलपति एवं चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के राजनीति विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. संजीव शर्मा ने ‘Emerging Dimensions of Social Science Research’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने शोध के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि करोड़ों लोगों में से किसी एक व्यक्ति का पीएचडी तक पहुंचना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है, लेकिन इसके साथ उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है।

उद्यमी, अभिनेता एवं समाजसेवी द्वारिका प्रसाद रतूड़ी ने ‘Cross-Cultural Entrepreneurship and Global Strategy’ विषय पर शोधार्थियों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि फिल्म सेट हो या बिजनेस बोर्ड रूम, सफलता के लिए प्रोफेशनलिज्म, समय की पाबंदी, तैयारी, अनुशासन और टीम के प्रति सम्मान बेहद जरूरी हैं। उन्होंने शोधार्थियों से बड़े लक्ष्य निर्धारित करने, अलग-अलग संस्कृतियों से सीखने और अपनी जड़ों से जुड़े रहने का आह्वान किया।

यह भी पढ़ें -   भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा में जहीर अंसारी को बड़ी जिम्मेदारी, बने प्रदेश प्रवक्ता

कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी क्षमता का बेहतर उपयोग करना चाहिए। विश्वविद्यालय का प्रयास है कि विद्यार्थी अध्ययन पूरा करने के बाद भी विश्वविद्यालय से जुड़े रहें। उन्होंने शोध में एआई के उपयोग को गुणवत्ता बढ़ाने वाला माध्यम बनाने पर जोर दिया।

कुलपति ने कहा कि किसी शोध की वास्तविक सफलता तब मानी जानी चाहिए, जब उसके निष्कर्ष जमीन पर दिखाई दें और समाज को उसका प्रत्यक्ष लाभ मिले।

उद्घाटन सत्र के समापन पर धन्यवाद ज्ञापन के बाद राष्ट्रगान हुआ। इसके बाद कार्यशाला के दूसरे चरण में विश्वविद्यालय के विभिन्न विषयों के पीएचडी शोधार्थियों ने अपने-अपने शोध कार्य की छमाही प्रगति प्रस्तुत की। विशेषज्ञों और समीक्षा समिति के सदस्यों ने प्रस्तुतियों पर सवाल पूछे तथा शोधार्थियों को आवश्यक सुझाव दिए।
दो दिवसीय कार्यशाला का समापन 19 अगस्त को होगा।

ADVERTISEMENTSAd Ad Ad

सबसे पहले ख़बरें पाने के लिए -

👉 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ें

👉 फेसबुक पर जुड़ने हेतु पेज़ लाइक करें

👉 यूट्यूब चैनल सबस्क्राइब करें

हमसे संपर्क करने/विज्ञापन देने हेतु संपर्क करें - +91 70170 85440