पितृ पक्ष में कैसे करें श्राद्ध तर्पण और पिंडदान, जाने इसका महत्व

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समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। श्राद्ध पक्ष में पितरों का श्राद्ध और तर्पण आदि कर्मकांड करके पितरों को प्रसन्न किया जाता है और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। शास्त्रों के मुताबिक, हिन्दू सनातन धर्म में श्राद्ध पक्ष का बहुता खास महत्व है। मान्यता है कि, श्राद्ध पक्ष में किए गए दान, तर्पण और पुण्य कर्मों का फल हमारे पितरों को प्राप्त होता है और परलोक में हमारे द्वारा किए गए इस प्रकार के कार्यों का फल उन्हें प्राप्त होता है, ऐसा पुण्य कर्म करने से उनकी आत्मा तृप्त होती है और वे प्रसन्न होते हैं। तो आइए जानते हैं श्राद्ध का महत्व, पितृ पक्ष में कैसे करें श्राद्ध और पिंडदान।
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शास्त्रों में श्राद्ध का महत्व

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि, गरुड़ पुराण के अनुसार पितृ पूजन से संतुष्ट होकर पितर मनुष्यों के लिए आयु, पुत्र, यश, स्वर्ग, कीर्ति, पुष्टि, बल, वैभव, पशु, सुख, धन और धान्य देते हैं। मार्कण्डेय पुराण के अनुसार श्राद्ध से तृप्त होकर पितृगण श्राद्धकर्ता को दीर्घायु, संतति, धन, विद्या सुख, राज्य, स्वर्ग और मोक्ष प्रदान करते हैं। ब्रह्मपुराण के अनुसार जो व्यक्ति शाक के द्वारा भी श्रद्धा-भक्ति से श्राद्ध करता है, उसके कुल में कोई भी दुखी नहीं होता। देवस्मृति के अनुसार श्राद्ध की इच्छा करने वाला प्राणी निरोगी, स्वस्थ, दीर्घायु, योग्य संतति वाला, धनी तथा धनोपार्जक होता है। श्राद्ध करने वाला मनुष्य विविध शुभ लोकों और पूर्ण लक्ष्मी की प्राप्ति करता है।

श्राद्ध का विधान

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि हिंदू-शास्त्रों के अनुसार मृत्यु होने पर मनुष्य की जीवात्मा चंद्रलोक की तरफ जाती है और ऊंची उठकर पितृ लोक में पहुंचती है। इन मृतात्माओं को अपने नियत स्थान तक पहुंचने की शक्ति प्रदान करने के लिए पिंडदान और श्राद्ध का विधान है।

कैसे करे श्राद्ध

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि पितृपक्ष में हर दिन तर्पण करना चाहिए। पानी में दूध, जौ, चावल और गंगाजल डालकर तर्पण किया जाता है। इस दौरान पिंड दान करना चाहिए। श्राद्ध कर्म में पके हुए चावल, दूध और तिल को मिलकर पिंड बनाए जाते हैं। पिंड को शरीर का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान कोई भी शुभ कार्य, विशेष पूजा-पाठ और अनुष्घ्ठान नहीं करना चाहिए। हालांकि देवताओं की नित्घ्य पूजा को बंद नहीं करना चाहिए। श्राद्ध के दौरान पान खाने, तेल लगाने और संभोग की मनाही है। इस दौरान रंगीन फूलों का इस्घ्तेमाल भी वर्जित है। पितृ पक्ष में चना, मसूर, बैंगन, हींग, शलजम, मांस, लहसुन, प्घ्याज और काला नमक भी नहीं खाया जाता है। इस दौरान कई लोग नए वस्घ्त्र, नया भवन, गहने या अन्घ्य कीमती सामान नहीं खरीदते हैं।

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