जानिए आखिर क्यों मारा भगवान श्रीराम ने बालि को छुपकर

खबर शेयर करें


समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। भगवान श्रीराम ने हमेशा धर्म के अनुसार युद्ध लड़ा व शत्रुओं का संहार किया लेकिन किष्किन्धा के राजा बालि को उन्होंने छुपकर मारा। स्वयं बालि ने मरने से पहले भगवान राम के धर्म पर प्रश्न चिन्ह लगाया व उनसे कठोर प्रश्न किए कि आखिर उन्होंने उनके सामने आकर युद्ध क्यों नही किया।बालि के सभी प्रश्नों का उत्तर भगवान श्रीराम ने उसी समय दिया व उसकी सभी शंकाओं का समाधान किया। भगवान श्रीराम का द्वारा समझाने पर बालि को भी अपने द्वारा किये गए अधर्म का ज्ञान हुआ व उसनें भगवान से क्षमा याचना की। साथ ही मरने से पहले बालि ने अपने पुत्र अंगद को भगवान श्रीराम की सेवा में सौंप दिया व प्राण त्याग दिए-

भगवान श्रीराम के द्वारा बालि की शंका का समाधान तो किया गया लेकिन आखिर उन्होंने बालि को छुपकर क्यों मारा, इसके पीछे कुछ कारण थे। आइये जानते हैं-

भगवान श्री राम ने बालि को छुपकर क्यों मारा?
बालि का वरदान

बालि को स्वयं भगवान शिव से यह वरदान प्राप्त था कि वह जब भी किसी से युद्ध करने जायेगा तो उसके शत्रु की आधी शक्ति समाप्त होकर उसके अंदर आ जाएगी। उदाहरण के लिए यदि बालि के अंदर 100 हाथियों का बल हो व भगवान श्रीराम के पास एक हज़ार हाथियों का बल हो तो भगवान श्रीराम से युद्ध करते समय उनके 500 हाथियों का बल समाप्त होकर बालि के अंदर आ जाएगा। इस प्रकार बालि के पास 600 हाथियों का बल हो जाता व श्रीराम की शक्ति आधी रहकर उनके पास केवल 500 हाथियों का बल रहता।

यह भी पढ़ें -   रामनगर के सांवल्दे पंचायत उपचुनाव में नीना बेलवाल की जीत, कमल बेलवाल को 283 वोटों से हराया

इस प्रकार वरदान के प्रभाव से भगवान श्रीराम को बालि को सामने से हराना असंभव था। यदि श्रीराम बालि को सामने से हरा भी देते तो भगवान शिव का दिया हुआ वरदान असत्य सिद्ध हो जाता। इसलिये भगवान श्रीराम को बालि को छिपकर मारना पड़ा। यही इसका मुख्य कारण था।

राजा को दंड देने का अधिकार
चूँकि संपूर्ण पृथ्वी इश्वाकू वंश के अधीन थी व उस समय अयोध्या के राजा दशरथ पुत्र व राम के छोटे भाई भरत थे। अपने राजा की आज्ञा के अनुसार भगवान श्रीराम अपने 14 वर्षों के वनवास में राक्षसों व अधर्मियों का वध कर रहे थे। राजा के द्वारा दुष्ट लोगों को दंड देना धर्म पूर्वक कार्य होता हैं। बालि ने अपने जीवन में कुछ ऐसे कर्म किये थे जिसके कारण उसको दंड दिया जाना उचित था। इसलिये भगवान श्रीराम ने उसका वध किया।

सुग्रीव से मित्रता
जब भगवान श्रीराम माता सीता की खोज में सुग्रीव के पास पहुंचे तो उनसे उनकी मित्रता हो गयी। दोनों ने मित्रता पूर्वक एक दूसरे की सहायता करने का वचन दिया। चूँकि सूर्यवंशी राजा एक बार वचन देने के बाद उससे पीछे नही हटते थे अन्यथा यह धर्म के विरुद्ध कार्य होता। अपने पिता दशरथ के इसी वचन का पालन करके के लिए प्रभु श्रीराम ने 14 वर्षों का वनवास लिया था।

यह भी पढ़ें -   शारदीय नवरात्रि 2026 : नवरात्रि के छठे दिन मां स्कंद माता की पूजा किस तरह करें जाने विधि, मंत्र, आरती और कथा

इसलिये अपने मित्र सुग्रीव को दिए वचन के अनुसार उनका बालि का वध करना निश्चित हो गया था जिसे वे झुठला नही सकते थे।

बालि की लंका नरेश रावण के साथ मित्रता
बहुत समय पहले लंका के राजा रावण व बालि के बीच भीषण युद्ध हुआ था व उसमे रावण की पराजय हुई थी। तब से रावण के क्षमा मांगने के पश्चात दोनों के बीच मित्रता हो गयी थी। चूँकि रावण ही माता सीता का अपहरण करके उन्हें लंका ले गया था इसलिये उसके ही मित्र से सहायता मांगना मुर्खता होती। इसलिये बालि को मारकर किष्किन्धा के राज सिंहासन पर अपने मित्र सुग्रीव को बिठाना आवश्यक हो गया था।

सुग्रीव को देश निकाला व रुमा को अपनी पत्नी बनाना
जैसे छोटे भाई के लिए बड़ा भाई पिता समान होता है उसी प्रकार बड़े भाई के लिए छोटा भाई अपने पुत्र समान होता है। यदि छोटे भाई से भूलवश कोई गलती हो भी जाए तो उसे क्षमा करना बड़े भाई का कर्तव्य होता है लेकिन बालि ने क्रोध में आकर ना केवल अपने छोटे भाई सुग्रीव का भरी सभा में अपमान किया बल्कि उसे ठोकरे मारकर देश से निकाल दिया।

इतना ही नही बालि ने उसकी पत्नी व अपनी पुत्रवधु समान तारा को अपनी पत्नी बनाकर राजमहल में ही रखा। अपने भाई के जीवित होते हुए व तारा की इच्छा के विरुद्ध उसने उसे अपनी पत्नी बनाया जो धर्म के अनुसार बिल्कुल अनुचित कार्य था। भगवान राम ने मुख्यतया उसे इसी अधर्म का दंड दिया।

ADVERTISEMENTSAd Ad Ad

सबसे पहले ख़बरें पाने के लिए -

👉 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ें

👉 फेसबुक पर जुड़ने हेतु पेज़ लाइक करें

👉 यूट्यूब चैनल सबस्क्राइब करें

हमसे संपर्क करने/विज्ञापन देने हेतु संपर्क करें - +91 70170 85440