जनता के स्वास्थ्य सेवाएं देने में प्रदेश सरकार पूरी तरह नाकाम : इंदिरा
समाचार सच, हल्द्वानी। कोरोना संक्रमणकाल में अतिआवश्यकीय स्वास्थ्य सेवाएं जनता को देने में प्रदेश सरकार पूरी तरह नाकाम साबित हुई है। अस्पतालों में मरीजों को समुचित ईलाज नहीं मिल पा रहा है। जबकि स्वास्थ्य महकमा स्वयं मुख्यमंत्री संभाले हुए हैं। ऐसे में उन्हें अपनी गद्दी स्वयं ही छोड़ देनी चाहिए। यह बात नेता प्रतिपक्ष डॉ इंदिरा हृदयेश ने गुरूवार को तिकोनिया स्थित बुद्ध पार्क में कांग्रेस के एक दिवसीय उपवास कार्यक्रम के दौरान कही। प्रदेश की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं के विरोध में कार्यकर्ताओं के साथ उपवास रख नेता प्रतिपक्ष कहा कि कोरोना संक्रमणकाल के बावजूद प्रदेश की बदहाल स्वास्थ्य सुविधाओं में कोई सुधार नहीं हुआ है। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए तरह-तरह के उपाय किए जा रहे हैं। इस संक्रमणकाल में स्वास्थ्य सेवाएं सर्वाेपरि हैं। लेकिन उत्तराखंड की स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल स्थिति में हैं। अस्पतालों व क्वारेंटीन सेंटरों में मरीज उपचार के अभाव में हैं और यहां इनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया जा रहा है। अस्पतालों में सामान्य मरीज तो दूर कोरोना संक्रमितों तक को बेहतर इलाज नहीं मिल पा रहा है।
डॉ हृदयेश ने कहा कि कुमाऊं का सबसे बड़ा डॉ सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय को कोविड सेंटर के रूप में विकसित करने के दावे लगातार किये जाते रहे हैं। लेकिन प्रदेश सरकार के यह दावे हवा-हवाई साबित हुए हैं। इस अस्पताल में कोरोना संक्रमण के बीच स्वास्थ्य सुविधाओं में इजाफा होना तो दूर, उल्टा दुर्दशा हो रही है। अस्पतालों में सफाई कर्मचारी तक नहीं हैं। हालात यहां तक पहुंच चुके हैं कि जनता एसटीएच में जाने तक से घबराने लगी है। यही हाल प्रदेश के अन्य चिकित्सालयों का भी है। आए दिन अस्पतालों में मरीज दम तोड़ रहे हैं। लेकिन सरकार का ध्यान इन बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं की तरफ नहीं जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश का स्वास्थ्य महकमा स्वयं उत्तराखंड के मुखिया संभाले हुए हैं। बावजूद इसके स्वास्थ्य सेवा बदहाल स्थिति में हैं। उनका कहना था कि अगर मुख्यमंत्री से स्वास्थ्य महकमा नहीं संभल रहा है तो वह गद्दी छोड़ कर जाएं, क्योंकि सरकार की नाकामी का खामियाजा आम गरीब लोगों को अपनी जान देकर भुगतना पड़ रहा है।
नेता प्रतिपक्ष डॉ हृदयेश ने कहा कि भाजपा सरकार कोरोना की रोकथाम के लिए कदम उठाने के बजाय नाराज विधायकों को खुश करने में व्यस्त है। कहा कि यदि उपवास के बाद भी प्रदेश की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की दिशा में सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया तो कांग्रेस आंदोलन को उग्र करने के लिए बाध्य होगी। जिसकी समस्त जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की होगी।
उपवास में नेता प्रतिपक्ष के साथ पीसीसी सदस्य सुमित हृदयेश, जिला अध्यक्ष सतीश नैनवाल, महानगर अध्यक्ष राहुल छिम्वाल, पूर्व विधायक सरिता आर्या, प्रदेश महासचिव महेश शर्मा, पार्षद नरेंद्रजीत सिंह रोडू, संध्या डालाकोटी, शोभा बिष्ट, बालम बिष्ट आदि बैठे।

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