आइए जानते हैं कुंडली के आठवें भाव में राहु हो तो क्या फल देता है

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समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। आठवें भाव में स्थित राहु जातक को अच्छा जीवनसाथी प्रदान करता है। जातक और उसके जीवनसाथी के बीच प्रेम बना रहता है। कुंडली के आठवें भाव में शुभ राहु जातक को अच्छी नौकरी प्रदान करते हैं और उसका व्यवसाय भी ठीक ठाक ही चलता रहता है। लेकिन यदि इस भाव में राहु खराब प्रभाव में हो तो जातक का कद नाटा हो सकता है।

अष्टम भाव में स्थित राहु का फल
वैदिक ज्योतिष में जन्मकुंडली के अष्टम भाव को मृत्यु स्थान कहा जाता है। इस भाव से जातक के आयु निर्धारण, जातक को प्राप्त होने वाले दुख, उसकी आर्थिक स्थिति, मानसिक क्लेश, जननांगों के विकार और जातक के जीवन में आने वाले अचानक संकटों का पता चलता है। जानिए राहु के अष्टम भाव में होने के प्रभाव।

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  • जन्मकुंडली के अष्टम भाव में राहु विराजमान होने पर जातक का शरीर मजबूत होता है। ऐसे जातकों को अपने जन्मस्थान से दूर रहना पड़ता है। अधिकतर ऐसे जातक विदेशों में घर से दूर निवास करते हैं। सरकारी प्रतिनिधियों, राजाओं और पंडितों की कृपा जातकों पर जीवनभर बनी रहती है। अष्टम भाव में राहु जातक को धार्मिक कार्यों की ओर प्रवृत्त करता है और जातकों का भाग्योदय छब्बीस से छत्तीस वर्ष के बीच होता है।
  • कुंडली के अष्टम भाव में राहु होने पर जातक धनवान होता है और राज्यपक्ष से उसे समय समय पर धन की प्राप्ति होती रहती है। लेकिन ऐसे जातक कई बार अपना धन बेकार के कार्यों में बरबाद करते हैं। ऐसे जातकों के पुत्रों की संख्या सामान्यता कम ही होती है। अष्टम भाव में विराजमान राहु जातक को बढ़ापे में बहुत सुखी रखते हैं। ऐसे जातकों का बुढ़ापा बहुत आराम से कटता है। यदि अष्टम भाव में राहु वाले जातकों की रुचि गाय पालने में हो तो उनके पास पशुधन अत्याधिक मात्रा में होता है और जीवन में आने वाली कई बातों का पूर्वानुमान उन्हें हो सकता है।
  • कुंडली के अष्टम भाव में राहु अशुभ हो तो जातक को भीरू और आसली बना सकते हैं। ऐसे जातक कई बार बहुत जल्दीबाजी में काम करने वाला या अत्याधिक वाचाल भी हो सकता है। जिससे उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा में कमी आती है। ऐसे जातकों को कई बार ऐसे काम भी करने लगते हैं जो धार्मिक या सामाजिक दृष्टि से अच्छे नहीं माने जाते, तथा जातक को अपनी पैतृक संपदा या जायदाद से वंचित रहना पड़ सकता है। अष्टम भाव में अशुभ राहु जातक को अत्याधिक खर्चे की ओर अग्रसित करते हैं जिससे जातक को धन संचय में परेशानी बनी रहती है और जातक के भाई बंधुओं से भी संबंध खराब ही रहता है।

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