पर्यावरणविद् डॉ. आशुतोष पंत के 500 पौधों के सहयोग से हरियाली का महाअभियान, सांसद अजय भट्ट ने किया शुभारंभ, उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय बनेगा ‘ग्रीन कैंपस’ का मॉडल

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हरेला महोत्सव में फलोद्यान और मियावाकी वन विकसित कर देगा प्रकृति संरक्षण का नया संदेश

समाचार सच, हल्द्वानी। उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय में हरेला महोत्सव इस बार सिर्फ एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि हरित भविष्य की नींव रखने वाले जन-अभियान के रूप में शुरू हुआ। पर्यावरणविद् डॉ. आशुतोष पंत द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराए गए 500 पौधों के सहयोग से शुरू हुए इस वृहद वृक्षारोपण अभियान का शुभारंभ सोमवार को सांसद अजय भट्ट ने पौधारोपण कर किया। विश्वविद्यालय परिसर में अगले पांच दिनों में फलदार, औषधीय, छायादार और पुष्पीय पौधों से हरियाली की नई तस्वीर उभरेगी, जबकि मियावाकी पद्धति से विकसित होने वाला मिश्रित वन इसे प्रदेश के सबसे प्रेरणादायी ग्रीन कैंपस मॉडल के रूप में स्थापित करेगा।

हरेला महोत्सव के प्रथम दिवस विश्वविद्यालय परिसर में लगभग 100 फलदार पौधों का रोपण कर फलोद्यान की स्थापना की शुरुआत की गई। इस अवसर पर सांसद अजय भट्ट ने कहा कि हरेला उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक पहचान के साथ-साथ प्रकृति संरक्षण का जन-आंदोलन है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों से मुकाबला करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को वृक्षारोपण के साथ पौधों के संरक्षण का भी संकल्प लेना होगा।

वृहद वृक्षारोपण अभियान के शुभारंभ अवसर पर बोलते हुए सांसद अजय भट्ट ने कहा कि “हरेला उत्तराखण्ड की संस्कृति, प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक पर्व है। आज जलवायु परिवर्तन के दौर में वृक्षारोपण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है। उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय का यह अभियान समाज के लिए प्रेरणादायी पहल है। मेरा सभी नागरिकों से आग्रह है कि वे पौधे लगाने के साथ-साथ उनके संरक्षण का भी संकल्प लें, तभी हरित और समृद्ध उत्तराखण्ड का सपना साकार होगा।”

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विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी ने कहा कि हरेला केवल परंपरा नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी का प्रतीक है। विश्वविद्यालय इस अभियान को पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक उत्तरदायित्व और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानता है। उन्होंने कहा कि लगाए जा रहे पौधे आने वाले वर्षों में विश्वविद्यालय को हरियाली से आच्छादित करेंगे और विद्यार्थियों के लिए जीवंत पर्यावरणीय प्रयोगशाला का कार्य करेंगे।

भौमिकी एवं पर्यावरण विज्ञान विद्याशाखा के निदेशक प्रो. पी.डी. पंत ने कहा कि यह अभियान केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनभागीदारी बढ़ाने और स्वच्छ, स्वस्थ एवं हरित वातावरण तैयार करने की दिशा में सार्थक प्रयास सिद्ध होगा।

कार्यक्रम संयोजक एवं वानिकी एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग के समन्वयक डॉ. एच.सी. जोशी ने बताया कि हरेला सप्ताह के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में करीब 500 पौधे लगाए जाएंगे। उन्होंने विशेष रूप से बताया कि इस पूरे अभियान के लिए पर्यावरणविद् एवं सेवानिवृत्त जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा अधिकारी डॉ. आशुतोष पंत ने सभी पौधे निःशुल्क उपलब्ध कराए हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति डॉ. पंत का यह योगदान समाज के लिए प्रेरणा है और उनकी सहभागिता ने विश्वविद्यालय के इस अभियान को और अधिक प्रभावशाली बना दिया है।

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उन्होंने बताया कि परिसर में फलोद्यान के साथ मियावाकी तकनीक पर आधारित मिश्रित वन भी विकसित किया जाएगा, जिससे जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा, कार्बन अवशोषण बढ़ेगा और परिसर का पर्यावरणीय संतुलन मजबूत होगा। यह मॉडल भविष्य में विद्यार्थियों, शोधार्थियों और समाज के लिए प्रकृति संरक्षण का जीवंत शिक्षण केंद्र भी बनेगा।

पर्यावरणविद् एवं सेवानिवृत्त जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा अधिकारी डॉ. आशुतोष पंत ने छात्र-छात्राओं को पौधारोपण की वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक जानकारी देते हुए कहा कि “पौधा लगाना जितना महत्वपूर्ण है, उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण उसका संरक्षण और नियमित देखभाल है। यदि पौधारोपण सही विधि से किया जाए और शुरुआती वर्षों में उसकी उचित देखरेख की जाए, तो वही पौधा आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य धरोहर बन जाता है।”

उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि पौधारोपण करते समय गड्ढे का उचित आकार, अच्छी मिट्टी, जैविक खाद, पर्याप्त नमी तथा स्थानीय जलवायु के अनुरूप पौधों का चयन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि फलदार, औषधीय और देशी प्रजातियों के पौधों को प्राथमिकता देने से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ जैव विविधता को भी मजबूती मिलती है।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, शोधार्थी एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक पौधारोपण कर हरित उत्तराखण्ड के निर्माण और लगाए गए पौधों के संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया।

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