पंतनगर से उठी भविष्य की खेती की नई आवाज़, शिवराज बोले- अब सिर्फ उत्पादन नहीं, जलवायु संकट से लड़ने की तैयारी जरूरी

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पंतनगर विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र सम्मेलन में कृषि का नया विजन सामने आया, मुख्यमंत्री धामी ने भी पूर्व छात्रों को उत्तराखंड की खेती और युवाओं के भविष्य से जोड़ने का आह्वान किया।

समाचार सच, पंतनगर। कभी हरित क्रांति की शुरुआत का गवाह रहा पंतनगर विश्वविद्यालय अब भविष्य की खेती का नया मॉडल तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। दो दिवसीय पूर्व छात्र सम्मेलन में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट संदेश दिया कि आने वाले वर्षों में खेती की सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन, घटते भूजल, मिट्टी की सेहत और आधुनिक तकनीकों के साथ कृषि को जोड़ना होगा।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद केंद्रीय कृषि मंत्री ने विश्वविद्यालय को भारतीय कृषि की सबसे बड़ी प्रयोगशाला बताते हुए कहा कि देश आज खाद्यान्न उत्पादन में रिकॉर्ड बना रहा है, लेकिन अब समय नई चुनौतियों के समाधान खोजने का है। उन्होंने कहा कि बदलते मौसम और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव के बीच वैज्ञानिक अनुसंधान ही किसानों का सबसे मजबूत सहारा बनेगा।

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उन्होंने कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय ने केवल डिग्रियां नहीं दीं, बल्कि ऐसे वैज्ञानिक, कृषि विशेषज्ञ और नीति निर्माता तैयार किए, जिन्होंने देश की कृषि व्यवस्था को नई दिशा दी। विद्यार्थियों से संवाद के दौरान उन्होंने कहा कि वे यहां सीखने आए हैं, क्योंकि भविष्य की कृषि इन्हीं युवाओं के हाथों में है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड की पर्वतीय कृषि की चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि छोटे खेत, जंगली जानवरों से फसलों का नुकसान, पलायन और सीमित बाजार जैसी समस्याओं का समाधान केवल सरकारी योजनाओं से नहीं होगा। इसके लिए विश्वविद्यालय, पूर्व छात्रों, वैज्ञानिकों और किसानों के बीच मजबूत साझेदारी जरूरी है।

उन्होंने पूर्व छात्रों से अपील की कि वे केवल अपनी उपलब्धियों तक सीमित न रहें, बल्कि राज्य के युवाओं के मार्गदर्शक बनें। उन्होंने मेंटरशिप, स्टार्टअप, अनुसंधान, कृषि उद्यमिता और डिजिटल खेती जैसे क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज खेती तेजी से बदल रही है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), ड्रोन तकनीक, डेटा एनालिटिक्स, जैव प्रौद्योगिकी और डिजिटल कृषि आने वाले समय की जरूरत हैं। ऐसे में विश्वविद्यालयों और उनके पूर्व छात्रों को भी समय के साथ अपनी भूमिका को और मजबूत बनाना होगा।

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कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री और मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय परिसर में लगे स्वयं सहायता समूहों के स्टॉलों का अवलोकन किया, विद्यार्थियों से बातचीत की और धान की रोपाई में भी हिस्सा लिया। केंद्रीय मंत्री ने परिसर में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए सभी से अपने जन्मदिन पर कम से कम एक पौधा लगाने की अपील भी की।

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने पंतनगर विश्वविद्यालय को हेरिटेज विश्वविद्यालय घोषित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि राज्य गठन के बाद कृषि भूमि कम होने के बावजूद प्रदेश का कृषि उत्पादन बढ़ा है, जो किसानों और वैज्ञानिकों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है।

पूर्व छात्र सम्मेलन में देश-विदेश से आए पूर्व विद्यार्थियों, वैज्ञानिकों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने भी भाग लिया। सम्मेलन का मुख्य फोकस अनुसंधान, नवाचार, कृषि तकनीक और विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों को उत्तराखंड के विकास से जोड़ने पर रहा।

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