समाचार सच, स्वास्थ्य डेस्क। हमारे आसपास कई ऐसे पेड़-पौधे मौजूद है जोकि औषधिय गुणों से भरपूर है। कोरोना वायरस के आते ही लोगों के बीच आयुर्वेदिक औषधियों के बारे में जानने की इच्छा काफी तेजी से बढ़ रही हैं। अधिकतर लोग गिलोय, हल्दी, तुलसी, अश्वगंधी, मुलेठी जैसी चीजों के बारे में काफी जान गए हैं। इन्हीं में एक एक औषधि है -निर्गुण्डी जो कई बीमारियों से आपको कोसों दूर रख सकती है। निर्गुण्डी को कफ और वात नाशक औषधि माना जाता है। इसका इस्तेमाल करके आसानी से सूजन और दर्द की समस्या से छुटकारा पाया जाता है। जानिए निर्गुण्डी के बेहतरीन फायदों के बारे में।
क्या है निर्गुण्डी?
आपको बता दें कि निर्गुण्डी सफेद, नीले और काले रंग के भिन्न-भिन्न फूलों वाली होती है। इसे पेड़ खुद की उत्पन्न होते हैं। इसके पत्तो को मसलने में एक प्रकार की दुर्गन्ध उत्पन्न होती है।
निर्गुण्डी का कितनी मात्रा में करें सेवन
निर्गुण्डी के रस और चूर्ण का सेवन किया जाता है। इसलिए अगर आप रस का सेवन कर रहे हैं तो 10-20 मिली से ज्यादा न करें। इसके साथ ही पाउडर 3-6 ग्राम से ज्यादा न करें।
निर्गुण्डी के फायदे –
सिर दर्द से दिलाए छुटकारा
निर्गुण्डी के पत्तों को लाकर पीस लें। इसके बाद सिर पर इसका लेप लगाए। इसके आपको लाभ मिलेगा। इसके अलावा निर्गुण्डी के फल के 2-4 ग्राम पाउडर लेकर दिन में तीन बार शहद के साथ खा लें।
मुंह में छाले
अगर आपके मुंह में छाले हैं तो निर्गुण्डी के पत्तों को पानी के साथ उबाल लें। इसके बाद इस पानी से कुल्ला करें। इससे आपको लाभ मिलेगा।
पेट संबंधी समस्या
अगर आप हमेशा पेट दर्द, एसिडिटी आदि समस्या से परेशान रहते हैं तो निर्गुण्डी के पत्तों को 10 मिलीलीटर रस में 2 दाने काली मिर्च और थोड़ा सा अजवाइन का पाउडर मिलाकर दिन में 2 बार सेवन करें। इससे आपको लाभ मिलेगा।
जोड़ों के दर्द के लिए
जोड़ों के दर्द के लिए निर्गुण्डी का काढ़ा काफी कारगर साबित हो सकता है। इसके लिए एक गिलास पानी में 10-12 निर्गुण्डी की पत्तियां डालकर उबाले। जब पानी आधा बच जाए तो इसका सेवन करें।
स्लिप डिस्क
निर्गुण्डी स्लिप डिस्क की समसया से छुटकारा दिलाने में काफी कारगर है। आयुर्वेद के अनुसार निर्गुण्डी में वात दोष को शांत करने के गुण पाए जाते हैं।
साइटिका का दर्द
निर्गुण्डी के रस में बराबर मात्रा में कैस्टर ऑयल मिलाकर इसका इस्तेमाल करें। इससे कमर दर्द की समस्या से छुटकारा मिल जाएगा। इसके अलावा निर्गुण्डी के पत्तों को तेल के साथ पकाकर इससे मालिश करें। इससे भी आपको लाभ मिलेगा।
मोच आने पर
निर्गुण्डी के पत्तों को पीसकर इसे मोच वाली जगह पर लगाकर ऊपर से पट्टी बांध लें। इससे आसानी से आपकी सूजन के साथ-साथ दर्द भी गायब हो जाएगा।
बुखार
निर्गुण्डी के 20-21 पत्तों को 2 गिलास पानी में उबाल लें। जब पानी एक चौथाई बचें तो इसमें 2 ग्राम पिपली का पाउडर डाल दें। इसके बाद इसका सेवन करें। इसके सथ ही मलेरिया के बुखार या सर्दी के कारण छाती में होने वाले जकड़न से छुटकारा पाने के लिए निर्गुण्डी के तेल की मालिश करें।



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