समाचार सच, दिल्ली डेस्क। देशभर में गिग वर्कर्स की हालिया हड़ताल का असर अब ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स पर साफ दिखाई देने लगा है। 25 दिसंबर और 1 जनवरी को हुई डिलीवरी पार्टनर्स की हड़ताल के बाद केंद्र सरकार ने उनकी सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाया है। सरकारी हस्तक्षेप के चलते अब 10 मिनट में डिलीवरी जैसे फास्ट डिलीवरी मॉडल को हटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया के दखल के बाद ब्लिंकिट ने अपने सभी प्लेटफॉर्म्स और ब्रांड्स से 10 मिनट में डिलीवरी का दावा हटा दिया है। यह निर्णय डिलीवरी पार्टनर्स पर बढ़ते कार्य दबाव और सड़क सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
इस मामले में श्रम मंत्रालय ने ब्लिंकिट, जेप्टो, स्विगी और जोमैटो के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में स्पष्ट किया गया कि तेज़ डिलीवरी के नाम पर डिलीवरी पार्टनर्स की जान को खतरे में नहीं डाला जा सकता। मंत्रालय ने निर्देश दिए कि समय की होड़ के बजाय श्रमिकों की सुरक्षा, कार्य परिस्थितियों और सामाजिक सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।
सूत्रों के अनुसार, अन्य ऑनलाइन डिलीवरी कंपनियों के साथ भी इस विषय पर बातचीत जारी है और आने वाले दिनों में तेज़ डिलीवरी मॉडल को लेकर और बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।

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