उद्योग–शिक्षा साझेदारी को नई दिशा देने के लिए मंथन, इंटर्नशिप, स्टार्टअप, कौशल विकास और रोजगारोन्मुख शिक्षा पर रहा विशेष फोकस
समाचार सच, हल्द्वानी।
उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय (यूओयू) ने विद्यार्थियों को केवल डिग्री तक सीमित न रखकर उन्हें रोजगार और उद्योग की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। विश्वविद्यालय के उद्योग–अकादमिक प्रकोष्ठ की ओर से आयोजित विचार-विमर्श सत्र में उद्योग जगत के विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने मिलकर भविष्य की शिक्षा और रोजगार के बीच मजबूत सेतु बनाने पर व्यापक मंथन किया।
“उद्योग–शिक्षा सहयोग को सुदृढ़ बनाने में उद्योगों की भूमिका” विषय पर आयोजित इस विशेष सत्र का उद्देश्य विद्यार्थियों को कौशल-आधारित, रोजगारोन्मुख और व्यावहारिक शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए उद्योगों और विश्वविद्यालयों के बीच मजबूत तालमेल विकसित करना रहा।
विश्वविद्यालय के निदेशक (अकादमिक) प्रो. पी.डी. पंत ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि समय की मांग है कि शिक्षा को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप बनाया जाए। उन्होंने कहा कि उद्योगों की सक्रिय भागीदारी से विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, व्यावसायिक दक्षता और नवाचार की सोच विकसित होगी, जिससे वे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।
उद्योग–अकादमिक प्रकोष्ठ की संयोजक प्रो. मंजरी अग्रवाल ने प्रकोष्ठ की कार्ययोजना प्रस्तुत करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय उद्योगों के साथ दीर्घकालिक सहयोग स्थापित कर विद्यार्थियों को इंटर्नशिप, लाइव प्रोजेक्ट, कौशल विकास प्रशिक्षण और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता सीए नीरज शारदा (शारदा एलएलपी, हल्द्वानी) ने कहा कि आज के तकनीकी और प्रतिस्पर्धी दौर में उद्योग एवं शिक्षण संस्थानों के बीच मजबूत समन्वय बेहद जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि विश्वविद्यालयों को उद्योगों की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार करने चाहिए तथा विद्यार्थियों को इंटर्नशिप, लाइव प्रोजेक्ट, वित्तीय साक्षरता, व्यावसायिक प्रशिक्षण और व्यावहारिक अनुभव से जोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि उद्योग–अकादमिक सहयोग केवल नौकरी तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि नवाचार, अनुसंधान, स्टार्टअप संस्कृति और उद्यमिता को भी बढ़ावा देना चाहिए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने कहा कि उद्योग और विश्वविद्यालयों की मजबूत साझेदारी ही विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कुंजी है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय रोजगार क्षमता बढ़ाने, उद्योगों की अपेक्षाओं के अनुरूप पाठ्यक्रम विकसित करने और नवाचार आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। उनका कहना था कि इस तरह की पहल से उत्तराखण्ड में कौशल विकास, स्टार्टअप संस्कृति और उद्यमिता को नई गति मिलेगी।
विचार-विमर्श के दौरान प्रतिभागियों ने उद्योग–अकादमिक साझेदारी को और मजबूत बनाने के लिए नियमित संवाद, विशेषज्ञ व्याख्यान, औद्योगिक भ्रमण, संयुक्त शोध परियोजनाएं, कौशल विकास कार्यक्रम, इंटर्नशिप और विभिन्न उद्योगों के साथ समझौता ज्ञापनों (एमओयू) को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
कार्यक्रम का संचालन सोमेश पाठक ने किया, जबकि डॉ. वीरेन्द्र कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर प्रो. अशुतोष भट्ट, डॉ. सुमित प्रसाद, डॉ. कृष्ण कुमार टम्टा, डॉ. प्रिया महाजन, डॉ. ललित पंत, डॉ. कुशा सिंह सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी एवं विभिन्न संकायों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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