समाचार सच, हल्द्वानी। नर्सों ने शासन व महानिदेशालय पर उनकी अनदेखी करने का आरोप लगाया है। इसके विरोध में उत्तराखंड नर्सेज सर्विसेज एसोसिएशन के तत्वाधान में बेस अस्पताल की नर्सों ने मंगलवार को काले फीते बांधकर विरोध जताना शुरू कर दिया है। चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों का जल्द निस्तारण नहीं हुआ तो आंदोलन उग्र किया जाएगा। इस दौरान उनका कहना था कि पूरा देश वैश्विक महामारी कोविड-19 से जूझ रहा है। जिसमें नर्सों ने अग्रणी भूमिका निभाई है। अस्पताल से लेकर कोविड सेंटर तक वह मरीजों की सेवा में लगी हुई हैं। कोरोना मरीजों के संपर्क में आने की वजह से नर्सेज सबसे ज्यादा संक्रमित हो रही हैं। लेकिन इसके बाद भी नर्सों की उपेक्षा की जा रही है। शासन और महानिदेशालय स्तर से भी उनकी अनदेखी की जा रही है। जबकि दिन पर दिन पर उन पर कार्य बोझ भी बढ़ता ही जा रहा है। नर्सों का कहना है कि वह लंबे समय से अपनी मांगों को मनवाने के लिए पत्राचार कर रही हैं, लेकिन उनकी एक भी मांग पूरी नहीं हुई है। उन्होंने हर माह जोखिम भत्ता, केंद्र की भांति नर्सेज का पदनाम बदलने, केंद्र की भांति नर्सिंग भत्ता हर माह 72 सौ रूपए देने, हर महीने वर्दी भत्ता के तौर पर 1800 रुपए देने, स्टाफ नर्स को पूर्व की भांति पूर्ण वेतन पर पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिंग कराने, आईपीएचएस के मानकों के अनुसार नर्सेज की स्थायी नियुक्ति करने, नर्सेज की पदोन्नति करने, नर्सों की नियुक्ति आउटसोर्स ने करने की मांग की है। कहा कि वह 30 सितम्बर तक काली पट्टी बांधकर अपना विरोध जताऐंगी। चेतावनी दी कि यदि इस अवधि में उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता है तो कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया जाएगा। वहीं उन्होंने सरकार द्वारा एक दिन का वेतन काटने पर भी रोष जाहिर किया।
इस दौरान नरेंद्र तिवारी, भावना, नीरू, ज्योति, विद्या, माया, सरिता, रोजी, आरती समेत कई नर्सें शामिल रही।

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