पितृपक्ष 2026: 26 सितंबर को है पूर्णिमा का श्राद्ध, कब और कहां कर सकते हैं खुद का श्राद्ध

खबर शेयर करें

समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। हे तार्क्ष्य (गरुड़)! अपने स्वयं के हाथों से किया गया दान, वह चाहे थोड़ा-सा ही क्यों न हो, अक्षय होता है। उसका पुण्य कभी समाप्त नहीं होता। यह नियम जीवित व्यक्ति पर लागू होता है, मरने के बाद (संतान या दूसरों द्वारा) दिए गए दान का ऐसा प्रभाव नहीं होता। स्वहस्तेन कृतं दानंरू यत्किंचिदपि तार्क्ष्य वैरू।

तदक्षय्यं भवेत् सर्वंरू जीवतो न मृतस्य चरू (-गरुड़ पुराण)
लिंग पुराण के अनुसार यदि कोई जीवित व्यक्ति अपना श्राद्ध स्वयं करता है, तो अपने साथ-साथ उसके पूर्वजों को भी मुक्ति मिलती है। जब व्यक्ति को लगता है कि अब उसके परिवार में कोई वंश चलाने वाला नहीं है या उसके प्रियजन उसका शास्त्र सम्मत पितृकर्म नहीं कर पाएंगे, तो वह अपना श्राद्ध स्वयं कर सकता है। इसके अलावा संन्यास ग्रहण करने वाला व्यक्ति अपना श्राद्ध स्वयं कर सकता है।

कब और कहां कर सकते हैं खुद का श्राद्ध
आत्म श्राद्ध करने के लिए ‘गया’ में भस्मकूट चोटी पर स्थित जर्नादन मंदिर का विशेष महत्व है। कहते हैं कि यहां विष्णु स्वयं जगन्नाथ स्वामी के रूप पिंडदान स्वीकार करते हैं। आत्म श्राद्ध का अनुष्ठान पांच दिन यानी कृष्ण पक्ष की द्वादशी से शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तक चलता है।

यह भी पढ़ें -   कालाढूंगी में सड़क पर स्कूली बच्चों की मारपीट का वीडियो वायरल, एसएसपी के निर्देश पर पुलिस ने की कार्रवाई

कैसे कर सकते हैं खुद का श्राद्ध
अनुष्ठान के पहलेे दिन व्यक्ति फल्गु नदी के तट पर स्नान और मुंडन के साथ अपने जीवन में किए जाने-अनजाने पापों से मुक्ति के लिए प्रायश्चित करने का संकल्प लेता है। दूसरे दिन विष्णु की शालिग्राम रूप की पूजा करता है। साथ ही अपने जीवित रूप का मोह छोड़ने और अपने कल्याण के लिए मुख्य श्राद्ध करने का संकल्प लेता है। तीसरे दिन मानव आकृति के छोटे-से पुतले का निर्माण करके उसका दाह-संस्कार कर स्वयं के लिए पिंडदान किया जाता है। चौथे दिन भगवान का इस भाव से आशीर्वाद लिया जाता है कि मृत्यु के बाद उसेे मोक्ष की प्राप्ति हो। पांचवें दिन सपिंडीकरण श्राद्ध के साथ हवन किया जाता है। इसमें आत्मा को सांकेतिक रूप से अपने पितरों से मिलाया जाता है। इस अनुष्ठान को करने वाले व्यक्ति पर परिवार में होने वाले सूतक (जन्म) या पातक (मृत्यु) के नियम लागू नहीं होते, क्योंकि शास्त्रानुसार वह जीवन चक्र से मुक्त हो चुका होता है।

यह भी पढ़ें -   खटीमा को बड़ी सौगात: 7.23 करोड़ की हाईटेक गौशाला जनता को समर्पित, सीएम धामी ने 15 विकास योजनाओं का भी किया शिलान्यास

भाद्रपद पूर्णिमा श्राद्ध- 26 सितंबर, शनिवार- पूर्णिमा
प्रतिपदा श्राद्ध- 27 सितंबर, रविवार
द्वितीया श्राद्ध- 28 सितंबर, सोमवार
तृतीया श्राद्ध- 29 सितंबर, मंगलवार
चतुर्थी श्राद्ध- 30 सितंबर, बुधवार
पंचमी श्राद्ध- 1 अक्टूबर, गुरुवार
षष्ठी श्राद्ध- 2 अक्टूबर, शुक्रवार
सप्तमी और अष्टमी श्राद्ध- 3 अक्टूबर, शनिवार
नवमी श्राद्ध- 4 अक्टूबर, रविवार (मातृ नवमी)
दशमी श्राद्ध- 5 अक्टूबर, सोमवार
एकादशी श्राद्ध- 6 अक्टूबर, मंगलवार
द्वादशी श्राद्ध- 7 अक्टूबर, बुधवार
त्रयोदशी श्राद्ध- 8 अक्टूबर, गुरुवार
चतुर्दशी श्राद्ध- 9 अक्टूबर, शुक्रवार
अमावस्या श्राद्ध- 10 अक्टूबर, शनिवार

ADVERTISEMENTSAd Ad Ad

सबसे पहले ख़बरें पाने के लिए -

👉 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ें

👉 फेसबुक पर जुड़ने हेतु पेज़ लाइक करें

👉 यूट्यूब चैनल सबस्क्राइब करें

हमसे संपर्क करने/विज्ञापन देने हेतु संपर्क करें - +91 70170 85440