प्रेम एकता व स्वभाव का प्रतीक हैं भगवान शिव : श्री हरि चैतन्य महाप्रभु

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समाचार सच, हल्द्वानी/गढ़़ीनेगी। चैतन्य पुरी महाराज ने हरिकृपा धाम आश्रम में उपस्थित भक्त समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि गंगा, गाय, गीता, गायत्री, गोविंद ये पांचों भारतीय संस्कृति की महान धरोहर है। अन्य देशों के विचारकों ने भी इसको स्वीकार किया है और वह उसे अपनाने का प्रयास कर रहे हैं, परंतु हम भारतवासी सहज में प्राप्त इन सभी का महत्व ना समझकर इनके लाभ से वंचित रह रहे हैं। यदि हम पाँच में से किसी एक की भी शरण ले लें तो मानव का कल्याण सुनिश्चित है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव का परिवार प्रेम, एकता व सद्भाव का प्रतीक है, जो विभिन्न विषमताओं के बावजूद भी आपस में मिल जुलकर रहने की प्रेरणा देता है। भगवान शंकर गले में सर्प को धारण करते हैं तथा गणेशजी का वाहन चूहा है जो स्वाभाविक शत्रु होते हुए भी एक दूसरे को नुक़सान नहीं पहुँचाते। माता पार्वती का वाहन शेर तथा भगवान शिव का वाहन बैल है ये भी एक दूसरे के स्वाभाविक शत्रु होते हुए भी आपस में मिलजुल कर रहते हैं। भगवान कार्तिकेय का वाहन मोर जिसका आहार सर्प है फिर भी एक साथ रहते हैं एक दूसरे को हानि पहुंचाने की भावना नहीं रखते। खानपान में विषमता होने के बावजूद भी सभी आपस में प्रेम एकता व सद्भाव से रहते हैं। उन्होंने कहा कि दूसरों को नुक़सान पहुँचाने वालों का अपना ही नुक़सान होता है यदि दूसरा हमें नुक़सान पहुँचाए तो हम बचाव की स्थिति अपनाएं। आक्रमक दृष्टि न होने दें, क्षमाशील बने। क्षमा कायरों का नहीं अपितु वीरों का आभूषण है। मानव पर जगत व जगपति दोनों का अधिकार है लेकिन मानव का इन पर अधिकार मानना अज्ञानता है। “जगत की चिंता करें जगत्पति” जगत को सुधारने की चिंता यदि हम करें तो जगत सुधरेगा या नहीं पर हम ज़रूर बिगड़ जाएंगे। समाज सुधारक नहीं समाज सेवक बनने का प्रयास करें। वहां पूर्व मुख्यमंत्री उतराखंड हरीश रावत, राज्यमंत्री उतराखंड ज्योति शाह, जसपुर विधायक आदेश चौहान, मनोज जोशी, ब्लॉक प्रमुख संजय नेगी, पूर्व मंत्री पुष्कर दुर्गापाल, गिरधर बम, कमान धामी, त्रिलोक अधिकारी, रवि डोगरा, हरीश एडवोकेट, इंदु मान, जाकिर हुसैन, विकास डंगवाल, पर्ू्व विधायक शैलेंद्र मोहन सिंघल, पालिकाध्यक्ष भागीरथ चौधरी, पालिका अध्यक्ष ऊषा चौधरी, पूर्व मंत्री यूनुस चौधरी, कांग्रेस, भाजपा एंव आप पार्टी के राजनेता, अनेक अधिकारी व क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोग पहुँचे।

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