समाचार सच, हल्द्वानी (धीरज भट्ट)। जिस उम्र में बच्चा पढ़ाई में व्यस्त रहता है। वहीं छोटी उम्र में पर्यावरण और उससे जुड़े मामलों को गहरे से समझने वाली रिद्धिमा पांडेय का सम्बन्ध उत्तराखण्ड से है। जलवायु परिवर्तन के मसले पर देश के शीर्षस्थ संस्थाओं में ले जाने का बीड़ा भी पांडेय ने उठाया। हालांकि रिद्धिमा की उम्र अभी छोटी है, लेकिन भविष्य में उसमें एक बड़े पर्यावरण कार्यकर्ता का अक्स अभी से दिखता है।

रिद्धिमा पांडेय दुनिया के उन 16 बच्चों में शामिल है जिन्होंने यूएन में शिकायत दर्ज कराकर दुनिया भर के देशों पर जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए कुछ न करने का आरोप लगाया था। उसने स्वीडन की पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थुनबर्ग और अन्य युवा कार्यकर्ताओं के साथ जर्मनी, फ्रांस, ब्राजील, अर्जेन्टीना और तुर्की की आलोचना की थी।
गौरतलब है कि रिद्धिमा पांडेय ने 2013 में जलवायु में रूचि लेनी शुरू कर दी थी, जब उत्तराखण्ड के केदारनाथ में बाढ़ आयी थी इसके पीछे पर्यावरण का नुकसान भी जिम्मेदार माना गया था। इससे प्रेरित होकर उसने पर्यावरण के प्रति कार्य करने का जज्बा जागा।
वर्तमान में रिद्धिमा पांडेय अपने पापा व पर्यावरण कार्यकर्ता दिनेश पांडेय व मम्मी विनीता पांडेय के साथ हरिद्वार में रह रही हैं। हरिद्वार में गंगा नदी में बढ़े प्रदूषण पर भी रिद्धिमा खासी चिन्तित हैं। हालांकि केन्द्र सरकार ने नमामि गंगे योजना चलायी है। लेकिन अरबों खर्च होने के बावजूद अभी भी नदी की स्थिति संतोषजनक नहीं है।
इधर रिद्धिमा पांडेय को प्रकृति प्रेम की प्रेरणा अपने पिता से मिली है। उनके पिता दिनेश पांडेय बांघों के संरक्षण व पर्यावरण से जुड़े तमाम मामलों में सक्रिय रहे हैं। उन्होंने भी एनीजीटी समेत तमाम मंचों पर पर्यावरण की लड़ाई लड़ी है। इधर रिद्धिमा सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल बंद कर हम बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
पर्यावरण के पहरूओं का केन्द्र उत्तराखण्ड
गौरा देवी, चंडी प्रसाद भट्ट, सुन्दरलाल बहुगुणा, दामोदर राठौर, विशेश्वर दत्त सकलानी, सच्चिदानंद भारती, प्रो. अजय रावत, कल्याण सिंह रावत।
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