समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। नवरात्रि के नौ दिनों में भक्त माता रानी को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखते हैं और पूरे श्रद्धाभाव से उनकी आराधना करते हैं। इस दौरान कई लोग अपनी दिनचर्या में कुछ खास नियम अपनाते हैं, जिनमें नौ दिनों तक नंगे पैर रहना भी शामिल है।
मान्यता है कि चप्पल-जूते त्यागकर रहने के पीछे श्रद्धा, त्याग और समर्पण की भावना जुड़ी होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नवरात्रि में नंगे पैर चलने की परंपरा क्यों निभाई जाती है और इसके पीछे कौन-सी धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं? जानें नंगे पैर रहने के पीछे की धार्मिक मान्यता।
पवित्रता और शुद्धता का प्रतीक
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के दौरान भक्त पूजा-पाठ और साधना के जरिए तन और मन की शुद्धता पर ध्यान देते हैं। ऐसे में कुछ लोग नंगे पैर रहना भी अपनी साधना और पवित्रता से जोड़कर देखते हैं। उनके लिए यह देवी की आराधना के प्रति समर्पण दिखाने का एक तरीका है।
त्याग और संयम की भावना
नवरात्रि में व्रत रखने वाले कई भक्त अपनी रोजमर्रा की आदतों में बदलाव करते हैं। कुछ लोग भोजन में परहेज करते हैं, तो कुछ आराम और सुविधाओं को सीमित रखने का संकल्प लेते हैं।
इसी भावना के तहत कुछ भक्त नौ दिनों तक जूते-चप्पल नहीं पहनते। इसे त्याग, अनुशासन और आत्मसंयम से जोड़कर देखा जाता है।
चमड़े से बनी चीजों से दूरी
नवरात्रि में नंगे पैर रहने की एक वजह चमड़े से बनी चीजों का इस्तेमाल न करना भी मानी जाती है। पुराने समय में जूते-चप्पल बनाने के लिए चमड़े का इस्तेमाल अधिक होता था।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुछ भक्त देवी की आराधना के दौरान चमड़े से बनी वस्तुओं से दूरी रखते हैं। इसी कारण वे नंगे पैर रहना पसंद करते हैं।
देवी के प्रति श्रद्धा और समर्पण
नवरात्रि के दौरान भक्त मां दुर्गा के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने के लिए अलग-अलग धार्मिक संकल्प लेते हैं। कुछ लोग पूरे नौ दिन नंगे पैर रहने का फैसला भी करते हैं। उनके लिए यह अपनी भक्ति को व्यक्त करने का तरीका होता है।
प्रकृति से जुड़ाव की भावना
कुछ लोग नंगे पैर चलने को धरती के सीधे संपर्क और प्रकृति से जुड़ने की भावना से भी जोड़ते हैं। नवरात्रि में घटस्थापना के दौरान मिट्टी और जौ का विशेष महत्व होता है।
ऐसे में कुछ भक्त धरती के प्रति सम्मान जताने के भाव से नंगे पैर रहते हैं। हालांकि, यह एक सांस्कृतिक या व्यक्तिगत मान्यता है, सभी परंपराओं में इसे अनिवार्य नहीं माना जाता।
क्या नवरात्रि में नौ दिन नंगे पैर रहना जरूरी है?
नहीं, नवरात्रि में नौ दिनों तक नंगे पैर रहना हर भक्त के लिए जरूरी नहीं है। पूजा-पाठ, व्रत और अन्य धार्मिक नियम अलग-अलग परिवारों और परंपराओं में भिन्न हो सकते हैं। इसलिए अपनी आस्था और सुविधा के अनुसार ही संकल्प लेना चाहिए।
अगर आप नंगे पैर रहने का फैसला करते हैं, तो सड़क की गर्म सतह, कांच, नुकीली वस्तुओं और गंदगी से सावधान रहें।
नवरात्रि में आस्था के साथ सेहत का भी रखें ध्यान
नवरात्रि का उद्देश्य कई भक्तों के लिए मां दुर्गा की आराधना, आत्मसंयम और सकारात्मकता से जुड़ा होता है।
नंगे पैर रहना इसी आस्था को व्यक्त करने का एक तरीका हो सकता है, लेकिन इसे सभी के लिए जरूरी नियम नहीं समझना चाहिए।

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