समाचार सच, हल्द्वानी। पूर्व दर्जा राज्यमंत्री डॉ गणेश उपाध्याय ने कहा कि सरकार ने 14 फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्यों में 4 से 5 फीसदी बढ़ोत्तरी कर किसानों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने का काम किया है। किसान की मेहनत ही है, जिसके बल पर आज पूरा देश कोरोना जैसी महामारी से लड़ने का प्रयास कर रहा है।
उन्होंने कहा कि पूरे देश के लिए खाद्यान्न की व्यवस्था किसानों के गाढ़े खून पसीने की मेहनत का नतीजा है। वहीं किसानों की फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में नाममात्र की बढ़ोत्तरी करना देश के अन्नदाता का अपमान है। उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार को चाहिए कि ऐसा कानून देश के अंदर लाए जो किसानों के घर से जो उत्पाद बेचते हैं वहीं से खरीदें और जो उसका न्यूनतम समर्थन मूल्य में खरीद करे या उससे अधिक मूल्य पर खरीद होनी चाहिए। नहीं तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज होनी चाहिए। क्योंकि पूरे देश के अंदर 1 एकड़ से लेकर 3 एकड़ के बीच 80 प्रतिशत किसान खेती कर रहे हैं, ऐसे में छोटे किसान कहां और प्रदेशों में अपने उत्पाद बेच सकते हैं।
उपाध्याय कहना था कि सरकार ने मात्र 14 फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में जो वृद्धि की है वह ऊंट के मुंह में जीरा के समान है। जिससे आज प्रदेश में 13 किसान ने आत्महत्या कर चुके हैं, परन्तु सरकार के कान पर जूं तक नही रेंग रही है। प्रधानमंत्री ने कहा था कि 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करेंगे और स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करेंगे। लेकिन यही हालत रही तो अगले 10 साल में किसानों की आमदनी दोगुनी नहीं होगी। सरकार ने किसान को एक बड़ा झटका दिया है। इस सरकार ने किसानों को उनके हाल पर छोड़ दिया है।

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