नेता प्रतिपक्ष ने दी डीए फ्रीज करने के बजाय फिजूल खर्चों में कटौती करने की नसीहत
समाचार सच, हल्द्वानी/देहरादून। नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व वित्त मंत्री डॉ0 इंदिरा हृदयेश ने कहा कि कर्मचारियों का डीए फ्रीज करने का सरकार का निर्णय गलत है। उन्होंने कहा कि केन्द्र व राज्य की सरकार के इस निर्णय से जहां कर्मचारियों के हितों को चोट पहुंची है, वहीं मध्यम वर्गीय नौकरी पेशा वर्ग के समक्ष आर्थिक संकट खड़ा हो जायेगा।
गौरतलब है कि कोरोना संकट को लेकर केंद्र सरकार ने सरकारी कर्मचारियों डीए फ्रीज करने का निर्णय लिया है। इधर इस मामले में नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने डीए फ्रीज करने को सरकार का तुगलकी फरमान करार दिया है। उन्होंने कहा कि कोरोना से जूझ रहे योद्धाओं, सेना और पेंशनरों का डीए भी फ्रीज किया गया है। यह इनके मनोबल को कम करने जैसा है। यह सिर्फ सरकारी कर्मचारियों का मसला नहीं है। 31 मार्च को राष्ट्रीय बचत की ब्याज दरों में करीब डेढ़ प्रतिशत की कटौती की गई। इसी तरह से एफडी की ब्याज दरों को घटाया गया, जिसका सीधा नुकसान मध्यम वर्ग को हुआ। सरकार को अगर पैसे ही जुटाने हैं तो अपना फिजूल खर्च कम करे। बुलेट ट्रेन से लेकर सेंट्रल विस्टा तक की योजनाओं के खर्च को सरकार ने कम नहीं किया। प्रदेश सरकार के सामने भी यह बेहतर मौका है कि वह अपने गैरजरूरी खर्च का आकलन करे और देखे कि बचत कहां और किस तरह से हो सकती है।



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