जहां होता है मरीजों और नवजातों का इलाज, वहां आवारा पशुओं की आवाजाही से संक्रमण और सुरक्षा का खतरा
समाचार सच, चमोली डेस्क। उत्तराखंड के दूरदराज क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की बदहाली की तस्वीरें समय-समय पर सामने आती रहती हैं। अब चमोली जिले के थराली स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां अस्पताल परिसर में आवारा पशु खुलेआम घूमते नजर आ रहे हैं।
अस्पताल को स्वास्थ्य और सुरक्षा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील स्थान माना जाता है। यहां बीमार मरीजों का उपचार होता है, दवाइयां और चिकित्सा सामग्री रखी जाती है, प्रसव के लिए गर्भवती महिलाएं पहुंचती हैं और नवजात शिशुओं की देखभाल की जाती है। ऐसे में अस्पताल परिसर में आवारा पशुओं की आवाजाही चिंता का विषय बन गई है।
थराली विकासखंड स्थित यह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आसपास के तीन विकासखंडों के लोगों के लिए प्रमुख चिकित्सा केंद्र है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज और उनके तीमारदार इलाज के लिए यहां पहुंचते हैं। ऐसे महत्वपूर्ण अस्पताल परिसर में आवारा पशुओं के घूमने से मरीजों की सुरक्षा के साथ-साथ स्वच्छता और संक्रमण फैलने की आशंका भी बढ़ गई है।
अस्पताल परिसर में लगातार मरीजों और तीमारदारों की आवाजाही बनी रहती है। वहीं प्रसव और नवजात शिशुओं की देखभाल जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं भी यहां उपलब्ध हैं। ऐसे संवेदनशील परिसर में आवारा पशुओं का पहुंचना व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल परिसर में आवारा पशुओं की आवाजाही रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था की जानी चाहिए। प्रवेश द्वारों पर उचित निगरानी और परिसर की नियमित देखरेख जरूरी है, ताकि मरीजों, महिलाओं और नवजात शिशुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर स्वच्छता और सुरक्षा को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर आवारा पशु अस्पताल परिसर तक पहुंच कैसे रहे हैं और उन्हें रोकने के लिए जिम्मेदार विभागों की ओर से क्या इंतजाम किए गए हैं।
इस संबंध में सीएमओ डॉ. राजीव सिंह पॉल ने कहा कि अस्पताल परिसर के अंदर आवारा पशुओं के घूमने की जानकारी उनके संज्ञान में नहीं आई है। यदि अस्पताल परिसर में आवारा पशु घूम रहे हैं तो यह बेहद चिंताजनक मामला है। इस संबंध में अस्पताल प्रबंधन से जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
अब देखना होगा कि मरीजों की सुरक्षा और अस्पताल की स्वच्छता से जुड़े इस गंभीर मामले में स्वास्थ्य विभाग कब तक ठोस कदम उठाता है और थराली सीएचसी परिसर को आवारा पशुओं की आवाजाही से मुक्त कराने के लिए क्या प्रभावी व्यवस्था की जाती है।

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