भुवनेश्वर में उत्तराखंड का दमदार प्रदर्शन, अंकिता ध्यानी ने स्वर्ण जीत एशियन गेम्स 2026 का टिकट किया पक्का

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समाचार सच, देहरादून/भुवनेश्वर डेस्क। भुवनेश्वर के कलिंगा स्टेडियम में 24 से 28 जून तक आयोजित 65वीं नेशनल इंटर-स्टेट सीनियर एथलेटिक्स चौंपियनशिप में उत्तराखंड के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पांच पदक अपने नाम किए। मात्र 17 खिलाड़ियों के दल के साथ प्रतियोगिता में उतरे राज्य के एथलीटों ने देशभर के दिग्गज खिलाड़ियों के बीच अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए एक स्वर्ण, तीन रजत और एक कांस्य पदक जीतकर उत्तराखंड का गौरव बढ़ाया।

इस ऐतिहासिक सफलता की सबसे बड़ी नायिका पौड़ी गढ़वाल की धाविका अंकिता ध्यानी रहीं। उन्होंने महिलाओं की 3000 मीटर स्टीपलचेज स्पर्धा में 9 मिनट 44.05 सेकंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीतने के साथ ही 2026 में जापान के नागोया में होने वाले 20वें एशियन गेम्स के लिए भी क्वालीफाई कर लिया। इसके अलावा अंकिता ने 1500 मीटर दौड़ में 4 मिनट 20.78 सेकंड का समय निकालते हुए रजत पदक भी अपने नाम किया।

अपनी उपलब्धि पर अंकिता ने कहा कि जब लक्ष्य देश के लिए खेलने का हो तो हर चुनौती छोटी लगने लगती है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय उत्तराखंड की मिट्टी और अपने कोच के विश्वास को देते हुए कहा कि अब उनका अगला लक्ष्य एशियन गेम्स में भारत के लिए पदक जीतना है।

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उत्तराखंड एथलेटिक्स संघ के सचिव केजेएस कलसी ने बताया कि अंकिता के अलावा राज्य के तीन अन्य खिलाड़ियों ने भी पदक जीतकर प्रदेश का नाम रोशन किया। देहरादून की सोनिया ने 10,000 मीटर दौड़ में 34 मिनट 35.2 सेकंड का समय लेकर रजत पदक जीता। चंपावत के सचिन बोहरा ने 21 किलोमीटर रेस वॉक स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया, जबकि हरिद्वार की लिली ने 800 मीटर दौड़ में कांस्य पदक हासिल किया।

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कलसी ने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद उत्तराखंड के खिलाड़ियों ने जिस जुझारूपन और आत्मविश्वास का परिचय दिया है, वह पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि अंकिता ध्यानी की एशियन गेम्स के लिए क्वालीफिकेशन राज्य के खेल इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है और यह साबित करता है कि उत्तराखंड की प्रतिभाएं राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाने की क्षमता रखती हैं।

उत्तराखंड के खिलाड़ियों के इस प्रदर्शन को खेल जगत में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। खेल प्रेमियों, पूर्व खिलाड़ियों और खेल अधिकारियों ने इसे राज्य के एथलेटिक्स इतिहास की उल्लेखनीय सफलता बताते हुए उम्मीद जताई है कि आने वाले वर्षों में उत्तराखंड के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी देश का नाम रोशन करेंगे।

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