समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। पितृ पक्ष में माता का श्राद्ध नवमी तिथि पर करने का विधान है…इसे मातृ नवमी के नाम से जाना जाता है…मातृ नवमी को नौमी श्राद्ध या अविधवा श्राद्ध भी कहा जाता है…मृत्यु के पश्चात माता की…


समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। पितृ पक्ष में माता का श्राद्ध नवमी तिथि पर करने का विधान है…इसे मातृ नवमी के नाम से जाना जाता है…मातृ नवमी को नौमी श्राद्ध या अविधवा श्राद्ध भी कहा जाता है…मृत्यु के पश्चात माता की…

समाचार सच, स्वास्थ्य डेस्क। इन दिनों 16 श्राद्ध चल रहे हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार जिनका भी देहांत जिस भी तिथि को हुआ है उनका श्राद्ध उन तिथि में ही किया जाता है, परंतु कुछ तिथियां महत्वपूर्ण होती है। इसमें…

समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। 15 अक्टूबर 2023 से शारदीय नवरात्रि शुरू हो जाएंगी। 30 साल बाद चित्रा नक्षत्र, बुधादित्य और वैधृति योग में इसका शुभारंभ होगा। यह संयोग 30 साल बाद बन रहा है। इसका समापन 23 अक्टूबर को रवि…

समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। पितृ पक्ष में गया जी पिंड दान करने से पितरो को मोक्ष की प्राप्ति मिलती है सोलह दिन तक चलने वाला यह श्राद्ध पक्ष विशेष कर पितरो के तर्पण के लिए पवन भूमि है गरुड़ पुराण…

Pitru Paksha 2023: Crow will be the guest in Shraddha, know the auspicious and inauspicious signs समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। निरंतर कांव-कांव बोलने वाला कौआ एक छोटा पक्षी है, जिसे दुष्ट समझा जाता है। यह छोटे-छोटे जीव एवं अन्य अनेक…

समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। धर्म ग्रंथों के अनुसार, विधि-विधान पूर्वक श्राद्ध करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। वर्तमान समय में देखा जाए तो विधिपूर्वक श्राद्ध कर्म करने में धन की आवश्यकता होती है। पैसा न होने पर…

समाचार सच, स्वास्थ्य डेस्क। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से शुरू हुआ पितृ पक्ष इस साल 14 अक्टूबर तक चलेगा। इस दौरान पितरों का सही तिथि पर तर्पण और श्राद्ध कर्म किया जाता है जिससे उनकी आत्मा को…

समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। पितृ पक्ष, हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। यह पूर्वजों को याद करने के रूप में मनाया जाता है। इसे मनाने के लिए 15 दिनों का समय होता है जो भाद्रपद माह की पूर्णिमा से…

समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। शास्त्रानुसार विष्णु को स्तुति, देवी को अर्चन, सूर्य को अर्घ्य एवं पितरों को तर्पण अतिशय प्रिय है। इसलिए श्राद्ध पक्ष में ‘कुतप’ काल में नित्य तर्पण करें। तर्पण सदैव काले तिल, दूध, पुष्प, कुश, तुलसी, नर्मदा/गंगाजल…