राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर नाबार्ड की कार्यशाला, उत्कृष्ट कार्य करने वाले 10 कारीगर सम्मानित
समाचार सच, भवाली। उत्तराखंड की पारंपरिक हथकरघा और हस्तशिल्प कला को रोजगार और ग्रामीण आजीविका से जोड़ने की दिशा में नैनीताल में पहल तेज हो रही है। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर नाबार्ड, नैनीताल की ओर से भवाली स्थित देवभूमि होमस्टे में बुनकरों और कारीगरों के लिए एक दिवसीय जागरूकता एवं संवाद कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यशाला में भीमताल विकासखंड के करीब 60 बुनकरों, कारीगरों और अन्य हितधारकों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मुख्य फोकस पारंपरिक हुनर को बाजार से जोड़ने, कारीगरों को वित्तीय सुविधाओं की जानकारी देने और उनके उत्पादों को बेहतर पहचान दिलाने पर रहा।
योजनाओं से लेकर बाजार तक हुई चर्चा
कार्यशाला में सरकारी विभागों, बैंकों और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने बुनकरों और कारीगरों को प्रशिक्षण, स्वरोजगार, ऋण एवं वित्तीय सहायता, उद्यम विकास और उत्पादों के विपणन से जुड़ी योजनाओं की जानकारी दी।
बैंक प्रतिनिधियों ने कारीगरों से औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ने और पात्रता के अनुसार ऋण सुविधाओं का लाभ उठाकर अपने कारोबार को मजबूत करने का आह्वान किया।
कारीगरों ने भी खुलकर रखी अपनी चुनौतियां
कार्यक्रम सिर्फ योजनाओं की जानकारी तक सीमित नहीं रहा। बुनकरों और कारीगरों के साथ सीधे संवाद में उन्होंने कच्चे माल, वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण, बाजार, उत्पादों की बिक्री और अन्य व्यावहारिक समस्याओं को अधिकारियों के सामने रखा।
इन समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित संस्थाओं और विभागों के माध्यम से उपलब्ध व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई।
10 बुनकर-कारीगरों का सम्मान
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर हथकरघा एवं हस्तशिल्प क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले करीब 10 बुनकरों और कारीगरों को नाबार्ड की ओर से सम्मानित किया गया।
सम्मानित कारीगरों ने इसे अपने पारंपरिक हुनर को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन बताया।
नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक मुकेश बेलवाल ने कहा कि उत्तराखंड की हथकरघा और हस्तशिल्प कला केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय पहचान का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि कारीगरों के कौशल को प्रशिक्षण, वित्तीय समावेशन, बेहतर पैकेजिंग, उत्पादों में विविधता और बाजार से सीधा संपर्क देकर उनकी आय को बढ़ाया जा सकता है।
अग्रणी जिला प्रबंधक अमित बाजपेयी ने भी बुनकरों और कारीगरों को बैंकिंग क्षेत्र में उपलब्ध वित्तीय सुविधाओं की जानकारी दी और पात्र लोगों से योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की।
कार्यक्रम में जन शिक्षण संस्थान, जिला उद्योग केंद्र, विभिन्न बैंक, गैर-सरकारी संस्थाओं और आरसेटी सहित कई संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे। आरसेटी निदेशक गितेश त्रिपाठी समेत वरिष्ठ पत्रकार और अन्य हितधारकों ने भी सहभागिता की।
कार्यशाला के माध्यम से बुनकरों, कारीगरों, बैंकों और सरकारी विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।

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