समाचार सच, देहरादून। उत्तराखंड के प्रसिद्ध दयारा बुग्याल ट्रेक से लापता हुई नैनीताल निवासी 30 वर्षीय बबीता पांडे का दो सप्ताह बाद भी कोई सुराग नहीं मिल पाया है। एसडीआरएफ, पुलिस, प्रशासन, वन विभाग, स्थानीय ग्रामीणों और विशेषज्ञ बचाव दलों की टीमें लगातार खोज अभियान में जुटी हैं। हेलीकॉप्टर से हवाई निगरानी की जा रही है, जबकि गोताखोर ऊंचाई वाले तालाबों, नदी-नालों और जल स्रोतों में तलाश कर रहे हैं। इसके बावजूद बबीता का कोई पता नहीं चल सका है। ऐसे में यह मामला अब केवल एक लापता व्यक्ति की तलाश तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि दयारा बुग्याल की भौगोलिक चुनौतियों और ट्रेकिंग व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
कैसे लापता हुई बबीता?
जानकारी के अनुसार नैनीताल निवासी बबीता पांडे दस सदस्यीय ट्रेकर्स दल के साथ एक स्थानीय ट्रेकिंग एजेंसी के माध्यम से दयारा बुग्याल ट्रेक पर पहुंची थी। यह दल ट्रेकिंग और कैंपिंग के लिए गोई कैंप क्षेत्र में रुका हुआ था।
बताया जा रहा है कि 29 मई की रात बबीता अपने टेंट से बाहर निकली थीं, लेकिन इसके बाद वह वापस नहीं लौटीं। सुबह तक उनके नहीं लौटने पर साथियों ने तलाश शुरू की और बाद में प्रशासन को सूचना दी गई। तभी से लगातार सर्च ऑपरेशन जारी है।
परिवार की बढ़ती बेचौनी
बबीता के लापता होने के बाद परिवार गहरे सदमे में है। उनके पिता ने भावुक होकर कहा कि उनकी एकमात्र इच्छा है कि बेटी सुरक्षित घर लौट आए। उन्होंने बताया कि बबीता पढ़ाई में बेहद मेधावी है और वर्तमान में एमबीए की पढ़ाई कर रही है। पढ़ाई के साथ वह पार्ट-टाइम नौकरी भी करती है और अपने भविष्य को संवारने के लिए लगातार मेहनत कर रही थी।
पिता ने बताया कि लगभग पांच वर्ष पहले एक सड़क दुर्घटना में वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे और तब से पैरों से दिव्यांग हैं। उन्होंने प्रशासन से बेटी की जल्द से जल्द सुरक्षित बरामदगी की गुहार लगाई है। वहीं बबीता की दादी भी लगातार प्रशासन से अपनी पोती को खोज निकालने की अपील कर रही हैं।
दयारा बुग्यालः खूबसूरती के पीछे छिपी चुनौती
समुद्र तल से लगभग 11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित दयारा बुग्याल उत्तराखंड के सबसे खूबसूरत अल्पाइन घास के मैदानों में गिना जाता है। सर्दियों में बर्फ से ढकी ढलानें और गर्मियों में दूर-दूर तक फैले हरे-भरे बुग्याल इसे देश-विदेश के ट्रेकर्स के लिए आकर्षण का केंद्र बनाते हैं।
यहां से बंदरपूंछ, श्रीकंठ, द्रौपदी का डांडा और गंगोत्री पर्वतमाला के विहंगम दृश्य दिखाई देते हैं। हर वर्ष हजारों पर्यटक और ट्रेकर्स यहां पहुंचते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी सुंदरता के पीछे कई भौगोलिक जोखिम भी छिपे हैं।
अनुभवी ट्रेकर चिराग बताते हैं कि पहली नजर में दयारा बुग्याल खुला और आसान क्षेत्र प्रतीत होता है, लेकिन यहां मौसम अचानक बदल जाता है। घना कोहरा छा जाने पर दृश्यता बेहद कम हो जाती है। जंगलों के भीतर कई अनौपचारिक पगडंडियां हैं, जिनके कारण दिशा भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। यदि कोई व्यक्ति मुख्य ट्रेक रूट से थोड़ा भी भटक जाए तो सही रास्ते पर लौटना बेहद कठिन हो जाता है।
हालांकि चिराग का कहना है कि दयारा बुग्याल को खतरनाक ट्रेक नहीं कहा जा सकता। यह अपेक्षाकृत सुरक्षित और बेहद सुंदर ट्रेक है, लेकिन पहाड़ों में छोटी सी असावधानी भी बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है। यही वजह है कि ट्रेकिंग के दौरान समूह से अलग न होने की सलाह दी जाती है।
हर दिशा में तलाश, लेकिन सुराग शून्य
बबीता की तलाश में पिछले कई दिनों से लगातार अभियान चलाया जा रहा है। खोज अभियान अब केवल ट्रेकिंग मार्गों तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के जंगलों, गहरी घाटियों, ऊंचाई वाले तालाबों और संभावित दुर्घटना स्थलों तक विस्तारित किया जा चुका है।
एसडीआरएफ कमांडेंट अर्पण यदुवंशी के अनुसार, बचाव दल हर संभावित दिशा में सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं। गोताखोरों को भी जल स्रोतों में उतारा गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध सभी संसाधनों का उपयोग किया जा रहा है और अभियान लगातार जारी रहेगा।
जांच में सामने आई ट्रेकिंग एजेंसी की लापरवाही
मामले की जांच के दौरान ट्रेकिंग एवं कैंपिंग एजेंसी की गंभीर लापराही भी उजागर हुई है। उत्तरकाशी के जिला पर्यटन अधिकारी के अनुसार एजेंसी ने ट्रेक पर गए लोगों का पंजीकरण नियमानुसार नहीं किया था। दस्तावेजों में कई अनियमितताएं और नामों में विसंगतियां पाई गईं।
इस गंभीर चूक को देखते हुए संबंधित ट्रेकिंग एजेंसी का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया है। विभाग द्वारा आगे की कार्रवाई भी की जा रही है।
पुलिस हर एंगल से कर रही जांच
उत्तरकाशी के पुलिस अधीक्षक कमलेश उपाध्याय ने बताया कि मामले की जांच के लिए विशेष टीम गठित की गई है। टीम सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच कर रही है।
पुलिस किसी एक संभावना तक सीमित नहीं है और हर पहलू से मामले की पड़ताल की जा रही है, ताकि बबीता के लापता होने के पीछे की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाया जा सके।
सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम
लगभग दो सप्ताह बीत चुके हैं। हेलीकॉप्टर से लेकर गोताखोरों तक, हर संभव संसाधन खोज अभियान में लगाया जा चुका है। लेकिन बबीता पांडे का कोई सुराग नहीं मिल सका है।
दयारा बुग्याल की मनोरम वादियों के बीच यह रहस्य हर गुजरते दिन के साथ और गहराता जा रहा है। परिवार उम्मीद लगाए बैठा है, बचाव दल लगातार प्रयास कर रहे हैं और पूरा उत्तराखंड एक ही सवाल का जवाब तलाश रहा है- आखिर दयारा बुग्याल की इन वादियों में बबीता पांडे कहां है?



सबसे पहले ख़बरें पाने के लिए -
👉 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ें
👉 फेसबुक पर जुड़ने हेतु पेज़ लाइक करें
👉 यूट्यूब चैनल सबस्क्राइब करें
हमसे संपर्क करने/विज्ञापन देने हेतु संपर्क करें - +91 70170 85440



