समाचार सच, स्वास्थ्य डेस्क। योगी को जब कोई कष्ट होता है तो वह अपना उपचार स्वयं करता है। योगाभ्यास द्वारा गले में दर्द, खराश, खांसी, टान्सिल आदि तकलीफों को केवल एक आसन द्वारा दूर किया जा सकता है सिंहासन
इस प्रकार करें – सिंहासन बैठकर भी किया जा सकता है और खड़ रह कर भी इस आसान से पूर्णतया लाभ पाने के लिए इसके साथ उददीयनबंध भी करें। सिंहासन में उद्दीयनबंध शामिल करने से पाचक तंत्र में अद्भुत सुधार होता है। वैसे आप अपना उद्देश्य केवल सिंहासन से भी पूरा कर सकते हैं। अपने घुटने मोड़कर इस तरह बैठ जायें जैसे न माज के लिए बैठा जाता है। दायां हाथ दाएं घुटने पर और बायां हाथ बाएं घुटने पर रखें। हाथ् सीधे रहें। अपने शरीर को कमर से थोड़ा सा सामने की ओर झुकाएं किन्तु रीढ़ जरा भी मुड़ने न पाए।
तीन या चार गहरे श्वांस लें, उसके बाद पूरी तरह श्वांस निकाल लें। पेट को अन्दर की ओर खींचे, जितना अधिक से अधिक हो सके मुंह खोलें ओर जीभ को बाहर निकाल दें। जितना अधिक संभव हो दोनेां आंखे खोल दें और बिल्कुल सीध में देखें। जीभ उसी तरह सीधी बाहर को निकालें जैसे शेर निकालता है। इस आसन में सांस निकालकर फेफड़ों को रिक्त करेन की क्रिया उद्दीयनबंध है। इस स्थिति में जितनी देर रह सकें। अर्थात् श्वांस निकालने के बाद जितनी देर बिना श्वांस के रह सकें। अंत में मुंह बंद करें, श्वांस खींचे ओर समस्त मांसपेशियों को ढीला छोड़ दें। कुछ सेकेण्ड आराम करेन के बाद दोबारा यह आसन करें। दो या तीर बार दोहरा लें तो काफी है। आरंभ में कुछ सेकेण्ड तक ही आप बिना श्वांस के रह सकेंगे, किन्तु धीरे-धीरे यह अवधि अपने आप बढ़ती जायेगी।
सिंहासन खड़े रह कर करना चाहते हैं तो इसमें आपको घुटने जरा सा मोड़ लेना है। शेष वही सब करेंगे जो बैठ कर करने के लिए बताया गया है।
गले में यदि तकलीफ हो गयी है तो इसे सिंहासन से दूर किया जा सकता है। और यदि आप यह आसन नियमित करते रहें तो हमेशा गले की तकलीफों से बचें रहेंगे। इससे गले की मांसपेशियां सुदृढ़ बनती हैं। इससे रक्त प्रवाह रोग ग्रस्त क्षेत्र में पहुंचता है और इसके साथ ही उपचार की प्रक्रिया आरंभ हो जाती है।
कब करें – सिंहासन सदैव सुबह के समय खाली पेट करना चािहए। यदि आवश्यकता अनुभव हो तो दिन भर में एक बार से अधिक भी किया जा सकता है। किन्तु सिंहासन के साथ उद्दीयनबंध एक ही बार करे।
योगाभ्यास प्राकृतिक चिकित्सा का महत्वपूर्ण अंग है। गले की तकलीफ दूर करने के उद्देश्य से सिंहासन करते हुए आपको कुछ अतिरिक्त उपाय भी करने चाहिए। सुबह के समय एक गिलास में गुनगुना पानी लीजिए और उसमें चुटकी भर नमक मिला लें। एक दूसरे गिलास में घड़े का ठण्डा पानी लें। इसमें नमक न मिलायें। दो बार गुनगुने पानी से गरारा करें, उसके बाद एक बार ठण्डे पानी से। दस से बीस बार तक इसी क्रम में गरारा करें। (साभार: हर्बल हेल्थ)

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