आज कुमाऊं में मनाया जा रहा सातू का पर्व, महिलाओं ने की गौरी-महेश्वर की पूजा; कल होगा आठू का व्रत और प्रतिमा विसर्जन

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अमुक्ताभरण सप्तमी पर अखंड सौभाग्य और संतान सुख की कामना से धारण की जाती है सात गांठ वाली डोरक, जानिए पर्व का धार्मिक महत्व और आज का शुभ मुहूर्त

समाचार सच | अध्यात्म डेस्क।
कुमाऊं के प्रसिद्ध ऐतिहासिक और पौराणिक पर्व अमुक्ताभरण सप्तमी यानी सातू का पर्व आज 19 अगस्त 2026, बुधवार को श्रद्धा और परंपरागत विधि-विधान के साथ मनाया जा रहा है। इस पर्व का महिलाओं के लिए विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस अवसर पर महिलाएं गौरी-महेश्वर की प्रतिमा बनाकर पूजा-अर्चना करती हैं और अखंड सौभाग्य, सुख-समृद्धि तथा संतान की मंगलकामना से सात गांठ वाली डोरक की प्रतिष्ठा कर उसे धारण करती हैं।

मान्यता है कि गौरी-महेश्वर की पूजा और डोरक धारण करने से भगवान शिव एवं माता पार्वती की कृपा प्राप्त होती है। कुमारी कन्याएं भी मनोकामना पूर्ति के लिए इस पर्व का व्रत एवं पूजन करती हैं।

आज का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार आज श्रावण शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि है। स्वाती नक्षत्र शाम 6:47 बजे तक रहेगा, इसके बाद विशाखा नक्षत्र प्रारंभ होगा।
सातू पर्व के पूजन का शुभ समय सुबह 8:30 बजे से दोपहर 2:30 बजे तक बताया गया है।

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सात गांठ वाली डोरक का विशेष महत्व
सातू पर्व पर महिलाएं सात गांठ वाली डोरक की विधि-विधान से प्रतिष्ठा कर उसे हाथ में धारण करती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह डोरक अखंड सौभाग्य, सुख-समृद्धि और संतान वृद्धि का प्रतीक मानी जाती है।

डोरक धारण करते समय यह मंत्र पढ़ने की परंपरा है—
देव देव जगन्नाथ सर्व सौभाग्य दायक।
गृह्णामि डोर रुपं त्वां पुत्र पौत्र विवर्द्धनम्।।
सप्तसामोपगीतं त्वां सप्त लोक महेश्वरम्।
सूत्र ग्रन्थिस्थितं नित्यं धारयामि स्थिरोभव।।

व्रत में अग्नि में पकाया भोजन नहीं
सातू के व्रत में अग्नि में पकाया हुआ भोजन ग्रहण नहीं करने की परंपरा है। इसलिए अधिकांश श्रद्धालु इस दिन फलाहार आदि लेकर व्रत करते हैं।

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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता गिरिजा को अखंड सौभाग्य प्रदान करने वाली देवी माना गया है। मान्यता है कि माता सीता और द्वापर युग में माता रुक्मणी ने भी इच्छित मनोकामना की पूर्ति के लिए गिरिजा की स्तुति और पूजा की थी। इसी परंपरा के चलते आज भी महिलाएं और कुमारी कन्याएं अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति तथा सुख-सौभाग्य के लिए यह व्रत करती हैं।

कल मनाया जाएगा दूर्वाष्टमी यानी आठू पर्व
20 अगस्त 2026, गुरुवार को दूर्वाष्टमी यानी आठू का व्रत रखा जाएगा। इस दिन दूर्वा की प्रतिष्ठा कर उसे गले में धारण करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता में दूर्वा को अक्षय सौभाग्य और संतान प्रदान करने वाला माना गया है।
आठू पर्व के दिन ही गौरी-महेश्वर की प्रतिमाओं का विसर्जन भी किया जाएगा।
प्रस्तुतिः डॉ. नवीन चन्द्र जोशी, प्राचार्य, श्री महादेव गिरी संस्कृत महाविद्यालय, हल्द्वानी।

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