मज़दूर आंदोलन को कुचलने की साज़िश के खिलाफ एकजुट हों, फर्जी मुकदमों में फँसाए गए श्रमिकों की रिहाई की मांग

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समाचार सच, हल्द्वानी। 2 अप्रैल से गुड़गांव के मानेसर औद्योगिक क्षेत्र में होंडा कंपनी के ठेका मज़दूरों द्वारा शुरू हुई स्वतः स्फूर्त हड़ताल अब एक व्यापक मज़दूर आंदोलन का रूप ले चुकी है। यह आंदोलन मानेसर की कई कंपनियों-मुंजाल शोवा, सत्यम ऑटो, रूप पॉलिमर्स, मॉडलेमा, रिचको, रिचा ग्लोबल, प्रिकोल, फोर्जा, सरिता हांडा, सिरमा एसजीएस आदिकृसे आगे बढ़कर नोएडा, फरीदाबाद, पानीपत और भिवाड़ी तक फैल चुका है।

वेतन वृद्धि और ओवरटाइम का कानूनी रूप से दोगुना भुगतान। वर्तमान स्थिति यह है कि घोषित न्यूनतम वेतन भी बेहद कम है, जिसे भुखमरी स्तर का कहा जा सकता है, और उसका भी सही पालन नहीं हो रहा। ओवरटाइम का भुगतान भी नियमों के विपरीत किया जा रहा है, जबकि स्थायी कामों पर ठेका प्रथा के माध्यम से व्यापक शोषण जारी है।

हरियाणा में पिछले एक दशक से वेतनमान में संशोधन नहीं हुआ। वर्ष 2025 में 23,196 रुपये न्यूनतम वेतन पर सहमति बनी थी, जबकि मज़दूर संगठन 26,000 रुपये की मांग कर रहे थे। इसके बावजूद मार्च 2026 में मात्र 15,220 रुपये का न्यूनतम वेतन घोषित किया गया, जिसका भी विधिवत नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया।

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बढ़ती महंगाई, कम वेतन और हालिया अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण गैस व अन्य आवश्यक वस्तुओं के दामों में वृद्धि ने मज़दूरों की स्थिति और गंभीर बना दी। इसके परिणामस्वरूप वे सड़कों पर उतरने को मजबूर हुए।

9 अप्रैल को शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के दौरान तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं हुईं, जिनके लिए मज़दूर संगठनों का आरोप है कि इन्हें आंदोलन को बदनाम करने के उद्देश्य से अंजाम दिया गया। इसके बाद पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में मज़दूर घायल हुए, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं। 56 मज़दूरों को गिरफ्तार किया गया और उन पर गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए।

इसी क्रम में इंकलाबी मज़दूर केंद्र के कई कार्यकर्ताओंकृश्यामबीर, अजीत, पिंटू यादव, हरीश, राजू और आकाशकृको गिरफ्तार कर उन पर दंगा, आगजनी, आपराधिक षड्यंत्र और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। संगठन का आरोप है कि यह कार्रवाई पूरी तरह साज़िशन और आंदोलन को दबाने के उद्देश्य से की गई है।

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इसके अलावा, विभिन्न स्थानों पर मज़दूर नेताओं, कार्यकर्ताओं और यहां तक कि वकीलों व पत्रकारों को भी हिरासत में लिया गया है या नजरबंद किया गया है। इससे स्पष्ट है कि मज़दूर आंदोलन को संगठित होने से रोकने के लिए व्यापक दमन चलाया जा रहा है।

इंकलाबी मज़दूर केंद्र ने सभी मज़दूर, किसान, छात्र-युवा, महिला संगठनों और जनपक्षधर ताकतों से अपील की है कि वे इस दमन के खिलाफ एकजुट होकर आवाज़ उठाएं और मज़दूर आंदोलन के आपराधिककरण की इस साज़िश को विफल करें।

गिरफ्तार सभी मज़दूरों और कार्यकर्ताओं को बिना शर्त रिहा किया जाए और फर्जी मुकदमे वापस लिए जाएं।

  • 9 अप्रैल की घटनाओं की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराई जाए और दोषियों पर कार्रवाई हो।
  • घायल मज़दूरों का इलाज और मुआवजा सुनिश्चित किया जाए।
  • ठेका प्रथा समाप्त कर स्थायी रोजगार दिया जाए।
  • न्यूनतम वेतन कम से कम 30,000 रुपये प्रति माह किया जाए।
  • मज़दूर विरोधी श्रम कानूनों को वापस लिया जाए।
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