चंद्रमा को जल अर्पित करने का सही तरीका क्या है और इस दौरान कौन सा मंत्र पढ़ना अच्छा होगा

खबर शेयर करें

समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। आज 31 मई 2026 को ब्लू मून का दुर्लभ संयोग बन रहा है जोकि 2 से 3 साल के बाद ही नजर आता है। ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूर्णिमा की रात चंद्रमा को जल अर्पित करना बहुत ही शुभ माना जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से मन शांत रहता है और मानसिक तनाव भी कम होता है। साथ ही साथ इससे चंद्रमा से जुड़े शुभ फल मिलते हैं। हालांकि ब्लू मून एक खगोलीय घटना है लेकिन पूर्णिमा होने के कारण इस दिन पूजा पाठ करके चंद्रमा को जल अर्पित करने का विशेष महत्व होता है। तो चलिए जानते हैं कि आज चंद्रमा को जल अर्पित करने का सही तरीका क्या है और इस दौरान कौन सा मंत्र पढ़ना अच्छा होगा?

ब्लू मून पर जल अर्पित करने का सही तरीका
आज शाम को चंद्रोदय के बाद स्नान करके साफ कपड़े पहनें। इसके बाद चांदी या फिर तांबे के लोटे में साफ जल लें। आप इसमें एक चम्मच कच्चा दूध, फूल और अक्षत भी डाल सकते हैं। अब चंद्रमा की ओर अपना चेहरा करके धीरे-धीरे जल को अर्पित करें। ध्यान रखें कि जल अर्पित करते वक्त मन शांत रहे और श्रद्धा भाव भी। अब चंद्रमा से अपनी जिंदगी में सुख-शांति और समृद्धि भेजने की प्रार्थना करें। कुछ देर चांदनी रात में रहें।

यह भी पढ़ें -   विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर जागरूकता का संदेश, ‘साथी’ निकालेगा जन-जागरण रैली

जल अर्पित करते वक्त कहें ये 4 शब्द
धार्मिक मान्यता है चंद्रमा को जल अर्पित करते वक्त एक खास मंत्र का जाप जरूर करना चाहिए। इस मंत्र को आप एक बार भी बोल सकते हैं लेकिन श्रद्धानुसार 11, 21 और 108 बार इसका जाप करने से चंद्रदेव की विशेष कृपा मिलती है और मन पॉजिटिव होता है। नीचे देखें चंद्रदेव से जुड़ा ये पावरफुल मंत्र-
ऊँ सोम सोमाय नमः

यह भी पढ़ें -   खाई में समाई खुशियां… देवाल में दर्दनाक सड़क हादसा, तीन यात्रियों की मौत

आज ब्लू मून पर क्या-क्या करें?

  1. शाम के समय चंद्रमा को जल अर्पित करें।
  2. सफेद रंग की मिठाई या फिर खीर का भोग लगाएं।
  3. जरूरतमंद लोगों को सफेद वस्तुओं का दान करें।
  4. चांदनी रात में थोड़ी देर रहने की कोशिश करें।
  5. मन को शांत रखने के लिए कुछ समय ध्यान करें।

ब्लू मून को लेकर मान्यता
चंद्रमा को मन का कारक माना जाता है। ऐसे में ब्लू मून पर की गई पूजा और प्रार्थना को मन की शांति, इमोशंस के सही बैलेंस और पॉजिटिव सोच के साथ जोड़कर देखा जाता है। हालांकि इसका नाम ब्लू मून जरूर है लेकिन दिखने में ये नीला नहीं होगा। जब एक ही महीने में दो बार पूर्णिमा पड़ती है तो दूसरे वाले को ब्लू मून कहा जाता है और ये प्रक्रिया 2 से 3 साल बाद ही होती है

Ad AdAd Ad Ad Ad AdAd Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad

सबसे पहले ख़बरें पाने के लिए -

👉 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ें

👉 फेसबुक पर जुड़ने हेतु पेज़ लाइक करें

👉 यूट्यूब चैनल सबस्क्राइब करें

हमसे संपर्क करने/विज्ञापन देने हेतु संपर्क करें - +91 70170 85440