14.20 लाख ग्रामीण परिवारों तक पहुंचा नल का कनेक्शन, CM धामी ने दिए शेष काम मिशन मोड में पूरा करने के निर्देश
समाचार सच, देहरादून। उत्तराखंड में ग्रामीण क्षेत्रों तक नल से पेयजल पहुंचाने की कवायद अब तेजी पकड़ रही है। जल जीवन मिशन की समीक्षा के दौरान सामने आया है कि राज्य में स्वीकृत 16,555 पेयजल योजनाओं में से 15,540 योजनाएं पूरी हो चुकी हैं। यानी योजनाओं की कुल प्रगति 92.46 प्रतिशत पहुंच गई है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को सचिवालय में जल जीवन मिशन की समीक्षा बैठक करते हुए अधिकारियों को शेष योजनाओं को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने और हर पात्र ग्रामीण परिवार तक नल कनेक्शन पहुंचाने के निर्देश दिए।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि राज्य में कुल 14.48 लाख ग्रामीण परिवारों में से अब तक 14.20 लाख परिवारों को नल कनेक्शन उपलब्ध कराया जा चुका है।
वहीं, राज्य के 14,979 गांवों में से 9,796 गांवों में हर नल से जल की स्थिति का सत्यापन भी पूरा किया जा चुका है।
फिलहाल 1,015 पेयजल योजनाओं पर काम जारी है। मुख्यमंत्री ने इन योजनाओं को मिशन मोड में पूरा करने के साथ ही उनकी भौतिक और वित्तीय प्रगति की लगातार निगरानी करने को कहा।
मुख्यमंत्री धामी ने समीक्षा के दौरान साफ किया कि जल जीवन मिशन की सफलता केवल घरों में नल कनेक्शन पहुंचाने से तय नहीं होगी। असली लक्ष्य लोगों को नियमित, पर्याप्त, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराना है।
उन्होंने पूरी हो चुकी योजनाओं का स्थलीय सत्यापन कराने के भी निर्देश दिए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कागजों में पूरी दिखाई जा रही योजनाओं का वास्तविक लाभ ग्रामीण परिवारों को मिल रहा है।
मुख्यमंत्री ने पर्वतीय क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवीकरण पर विशेष ध्यान देने को कहा।
इसके साथ ही वर्षा जल संचयन और जल स्रोतों के पुनर्भरण को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में पानी के प्राकृतिक स्रोतों को बचाना और उन्हें पुनर्जीवित करना भविष्य की जल सुरक्षा के लिए जरूरी है।
बैठक में जिलाधिकारियों को संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर पेयजल योजनाओं से जुड़ी तकनीकी और अन्य समस्याओं का जल्द समाधान सुनिश्चित करने को कहा गया।
मुख्यमंत्री ने जिलावार लक्ष्य, समयसीमा और जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अनावश्यक देरी पाए जाने पर संबंधित कार्यदायी संस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
साथ ही पूरी हो चुकी योजनाओं के संचालन और रख-रखाव की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में नल कनेक्शन मिलने के बाद पानी की आपूर्ति लंबे समय तक सुचारू बनी रहे।

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