मध्यप्रदेश से नैनीताल खुशियां समेटने आया परिवार, लौटी तो सिर्फ मासूम की यादें… एक पल की चूक ने छीन ली जिंदगी

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समाचार सच, हल्द्वानी/नैनीताल। पहाड़ों की वादियों में छुट्टियां बिताने निकला एक परिवार शायद ही कभी सोच सकता था कि यह सफर जिंदगी का सबसे बड़ा दर्द बन जाएगा। मध्यप्रदेश से नैनीताल घूमने आए परिवार की खुशियां उस वक्त मातम में बदल गईं, जब होटल की बालकनी में खेल रहा तीन वर्षीय मासूम अचानक नीचे गिर गया। उसे बचाने के लिए नैनीताल से हल्द्वानी और फिर दिल्ली तक जिंदगी की जंग लड़ी गई, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया।

मध्यप्रदेश के रानापुर (जिला झाबुआ) निवासी विशाल सोनी अपने परिवार के साथ नैनीताल घूमने आए थे। परिवार भवाली रोड स्थित जोखिया क्षेत्र के एक होटल में ठहरा हुआ था। रविवार सुबह तीन वर्षीय गौरांत कमरे के बाहर बालकनी में खेल रहा था। बताया जा रहा है कि बालकनी की रेलिंग के एक हिस्से में शीशा नहीं लगा था। खेलते-खेलते मासूम का संतुलन बिगड़ा और वह करीब 20 फीट नीचे जा गिरा।

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हादसे के बाद होटल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। परिजन तुरंत बच्चे को बीडी पांडे अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद सिर और गर्दन में गंभीर चोटें होने के चलते उसे हल्द्वानी रेफर कर दिया। हल्द्वानी में हालत नाजुक देखते हुए चिकित्सकों ने बेहतर इलाज के लिए दिल्ली भेज दिया।

पिता विशाल सोनी ने बताया कि परिवार उम्मीद नहीं छोड़ रहा था। हर किसी की दुआ थी कि मासूम ठीक होकर घर लौट आए, लेकिन दिल्ली पहुंचने से करीब 20 किलोमीटर पहले ही गौरांत ने रास्ते में दम तोड़ दिया। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

जिस बच्चे की किलकारियों से कुछ घंटे पहले पूरा परिवार मुस्कुरा रहा था, अब उसी की यादें परिजनों को जीवनभर रुलाती रहेंगी। इस हादसे ने न सिर्फ एक परिवार को तोड़ दिया, बल्कि पर्यटन स्थलों पर होटलों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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गौरतलब है कि नैनीताल में यह कोई पहली घटना नहीं है। करीब एक सप्ताह पहले तल्लीताल क्षेत्र के एक होटल के रिसेप्शन से भी दो वर्षीय बच्ची नीचे गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गई थी। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं इस ओर इशारा करती हैं कि होटलों में बालकनी, रेलिंग और ऊंचे स्थानों पर सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन कराया जाना बेहद जरूरी है।

सावधानी ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। यदि छोटे बच्चे साथ हों तो उन्हें होटल की बालकनी, खुली रेलिंग या ऊंचे स्थानों पर कभी भी अकेला न छोड़ें। होटल संचालकों की भी जिम्मेदारी है कि वे सुरक्षा मानकों में किसी तरह की लापरवाही न बरतें।

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