भगवान गणेश का विसर्जन क्यों है जरूरी

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समाचार सच, हल्द्वानी। स्थापित करने के बाद भगवान गणेश की मूर्ति का विसर्जन क्यों जरूरी होता है उक्त जानकारी देते हुए गुरुदेव फाउंडेशन की संचालिका हर्षिता शर्मा ने जानकारी देते हुए कहा कि भगवान गणेश सकारात्मकता का प्रतीक हैं। गणेश जी को प्रथम पूजन देव के रूप में माना गया हैं। गणेशजी की पूजा करना ही काफी नहीं है, बल्कि हमें उनके स्वभाव को स्वीकार करना होगा और उनके जैसा बनने की कोशिश करनी होगी। गणेश जी का बड़ा सिर बुद्धिमत्ता का प्रतीक है, छोटी आंखें दूरदर्शिता का प्रतीक, उनके दो बड़े कान अच्छी बातें सुनने के लिए, वहीं गणेश जी की बड़ी सूंड इस बात का प्रतीक है कि हमको हमेशा समझदारी से काम लेना चाहिए जैसे गणेश जी की सूंड एक पेड़ को उठा लेती है तो वहीं एक बच्चे को प्यार भी कर सकती है। गणेश जी के चार हाथ जिसमें एक हाथ में वह कुल्हाड़ी जो नकारात्मकता को काटने का प्रतीक है वहीं दूसरे हाथ में वह एक रस्सी पकड़े जो कर्म को बनाए रखने का संदेश देता है। आशीर्वाद की मुद्रा में उठा हाथ इस बात का प्रतीक है कि हम हमेशा दूसरे का साथ दें, चौथे हाथ में उनके एक मोदक धारण किया गया है जो कि मेहनत और ज्ञान की मजबूत पकड़ का प्रतीक हैै। गणेश जी का बड़ा पेट आप के अधीन धैर्य और ज्ञान का प्रतीक है।

गणेश जी भारी पीठ आपके पीछे चल रही वार्ता के प्रति गंभीर नहीं होने का प्रतीक है। गणेश जी स्वयं ज्ञान के प्रतीक हैं।
नगर अध्यक्ष विवेक शर्मा ने हमें सूचित किया कि देव के आने और विसर्जन दोनों आवश्यक हैं। और विसर्जन एक उचित विधि द्वारा किया जाना है। विसर्जन से पहले संस्कार विधि भी आवश्यक है जिसके लिए हम सभी को इको फ्रेंडली व मिट्टी के गणेशजी ही बनाने चाहिए क्योंकि वह विसर्जन करते समय पानी के अन्दर घुल जाते हैं। फाउंडेशन की संचालिका हर्षिता शर्मा ने भी इको फ्रेंडली भगवान गणेश का विसर्जन घर पर ही एक बाल्टी में किया। बाद में उसी मिट्टी में पौधा लगाया !

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