समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। हर साल सावन पूर्णिमा पर रक्षा बंधन का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन से ही सावन महीने का समापन भी होता है। इस साल रक्षा बंधन की तारीख को लेकर कुछ लोगों में कंफ्यूजन है। इसके पीछे का कारण पूर्णिमा तिथि है। 27 अगस्त को पूर्णिमा तिथि पूरे दिन रहेगी, जबकि 28 अगस्त को पूर्णिमा तिथि सुबह 10 बजे से पहले ही समाप्त हो जाएगी। ऐसे में लोगों के मन में सवाल है कि आखिरी 27 अगस्त को पूरे दिन पूर्णिमा होने के बाद भी रक्षा बंधन का त्योहार 28 अगस्त को क्यों मनाया जाएगा। आइए जानते हैं पंडित नरेंद्र उपाध्याय से 28 अगस्त को राखी का पर्व मनाना क्यों उत्तम माना जा रहा है।
27 अगस्त को पूरे दिन पूर्णिमा, फिर 28 अगस्त को क्यों मनेगी राखी
पंडित उपाध्याय कहते हैं कि 27 अगस्त को करीब सुबह 09.09 बजे से पूर्णिमा तिथि शुरू हो गई है और 28 अगस्त को सुबह 09.48 बजे के आसपास खत्म होगी। अलग-अलग जगहों पर पूर्णिमा तिथि के समापन में 1-2 मिनट का अंतर संभव है। 27 अगस्त को पूर्णिमा तिथि भद्रा के साथ व्याप्त रहेगी। जबकि 28 अगस्त को उदया पूर्णिमा प्राप्त हो रही है। शास्त्रों में व्रत-त्योहार के लिए उदया तिथि महत्वपूर्ण मानी गई है।
27 अगस्त को सावन पूर्णिमा का व्रत है लेकिन स्नान-दान 28 अगस्त को ही किया जाएगा। दरअसल पूर्णिमा व्रत उस दिन रखना उत्तम माना गया है जब पूर्णिमा तिथि के साथ चंद्रोदय होता है। पूर्णिमा का चंद्रमा 27 अगस्त को ही मिल रहा है, इसलिए इस दिन व्रत का मान्य रहेगा। जबकि उदया तिथि में पूर्णिमा का स्नान-दान मनाया जाएगा।
भद्रा भी है एक कारण
ज्योतिष शास्त्र में राखी बांधने के लिए भद्रा को अशुभ माना गया है। 27 अगस्त को भद्रा सुबह 07 बजे से शाम 06 बजकर 02 मिनट तक रहेगी। जबकि 28 अगस्त को भद्रा का साया नहीं रहेगा। शास्त्रों में भद्रा रहित राखी का पर्व अत्यंत शुभ और लाभकारी माना गया है। मान्यता है कि भद्रा काल में राखी बांधने से भाई-बहन दोनों को ही अशुभ फलों की प्राप्ति होती है।
28 अगस्त को राखी बांधने का शुभ समय
28 अगस्त को राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह 05 बजकर 57 मिनट से सुबह 09 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। दोपहर के समय राखी दोपहर 12 बजकर 04 मिनट से दोपहर 12 बजकर 53 मिनट तक बांधना अत्यंत शुभ रहेगा। इस समय राहुकाल मौजूद नहीं रहेगा। राहुकाल सुबह 10 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 22 मिनट तक ही रहेगा।
राखी बांधने के ये भी हैं शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 05.39 बजे से सुबह 06.20 बजे तक।
प्रातः सन्ध्या- सुबह 06.00 बजे से सुबह 07.02 बजे तक।
अभिजित मुहूर्त- दोपहर 01.24 बजे से दोपहर 02.19 बजे तक।
विजय मुहूर्त- शाम 04.08 बजे से शाम 05.03 बजे तक।
गोधूलि मुहूर्त- रात 08.41 बजे से रात 09.02 बजे तक।
सायाह्न सन्ध्या- रात 08.41 बजे से रात 09.43 बजे तक।
अमृत काल- शाम 04.14 बजे से शाम 05.53 बजे तक।
भद्राकाल में राखी बांधने से क्या होता है
पौराणिक कथाओं के अनुसार, लंकापति रावण की बहन ने उसके भद्राकाल में राखी बांधी थी। जिसके कुछ समय बाद ही उसका विनाश हो गया था। इसलिए भद्राकाल में राखी बांधने से बचना चाहिए
रक्षा बंधन पर चंद्र ग्रहण का रहेगा प्रभाव
साल का अंतिम चंद्र ग्रहण रक्षा बंधन पर ही लगा रहा है। हालांकि इस ग्रहण का राखी के त्योहार पर किसी तरह का कोई प्रभाव नहीं रहेगा क्योंकि इस ग्रहण को भारत में नहीं देखा जा सकेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहण जहां नजर आता है, वहीं उसके सूतक काल और धार्मिक नियम मान्य होते हैं। इस तरह से बिना किसी बाधा के पूरे दिन राखी का त्योहार मनाया जा सकेगा।

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