समाचार सच, काठमांडू।
नेपाल में बुधवार सुबह भोटेकोशी नदी ने ऐसा रौद्र रूप दिखाया कि देखते ही देखते कई इलाके पानी और मलबे के सैलाब में तब्दील हो गए। नेपाल-चीन सीमा के पास आई इस विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने कई कस्बों और गांवों को तबाह कर दिया। घर, वाहन, सड़कें और पुल पानी के तेज बहाव में बह गए, जबकि कई जलविद्युत परियोजनाओं पर भी इसका भारी असर पड़ा।
नेपाल पुलिस के मुताबिक कम से कम 157 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता हैं। चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी तीन मौतों की पुष्टि हुई है। दोनों देशों के आंकड़ों को मिलाकर 750 से ज्यादा लोगों के लापता होने की खबर सामने आई है। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है और मृतकों तथा लापता लोगों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है।
तिब्बत से आया सैलाब, नेपाल में मची तबाही
बताया जा रहा है कि बाढ़ की शुरुआत तिब्बत की तरफ से हुई। प्रारंभिक आकलन के मुताबिक चीन की ओर हिमस्खलन या बड़े पैमाने पर बर्फ और चट्टानों के खिसकने से भोटेकोशी नदी में अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा पहुंचा, जिसने कुछ ही समय में नदी को तबाही के सैलाब में बदल दिया।
सैलाब का असर भोटेकोशी से आगे त्रिशूली नदी तंत्र तक पहुंचा और मध्य नेपाल के कई इलाकों में भारी नुकसान हुआ। कई महत्वपूर्ण पुल बह गए और सड़क संपर्क टूटने से राहत एवं बचाव कार्यों में भी मुश्किलें आ रही हैं।
133 भारतीयों समेत सैकड़ों लोग लापता
इस त्रासदी में विदेशी नागरिक भी प्रभावित हुए हैं। ताजा रिपोर्टों के अनुसार कम से कम 133 भारतीय नागरिक और 37 NRI भी लापता लोगों में शामिल बताए जा रहे हैं। इनमें पर्यटक, तीर्थयात्री और नेपाल में काम करने वाले लोग शामिल होने की जानकारी सामने आई है।
नेपाल-चीन सीमा पर कैलाश-मानसरोवर यात्रा और पर्यटन से जुड़े कई लोग भी बाढ़ के बाद संपर्क से बाहर बताए गए हैं। पश्चिम बंगाल से नेपाल गया 32 सदस्यीय समूह भी लापता लोगों में शामिल होने की खबर सामने आई है।
सुरक्षा बलों के जवान भी लापता
बाढ़ की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि नेपाल पुलिस के 26 जवानों के भी लापता होने की जानकारी सामने आई है। रसुवा के तिमुरे, स्याफ्रुबेसी, सिमले और मेलुंग क्षेत्र में तैनात पुलिसकर्मियों से संपर्क टूट गया।
एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित
बाढ़ ने केवल आबादी को ही नहीं, बल्कि नेपाल के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। कई सड़कें और पुल बह गए हैं, जबकि करीब एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। कुछ क्षेत्रों में बिजली और संचार व्यवस्था भी बाधित हुई है।
भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ
नेपाल में आई इस भयावह आपदा के बाद भारत ने तत्काल सहायता पहुंचाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से फोन पर बात कर संवेदना जताई और भारत की ओर से हर संभव मानवीय सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया।
इसके बाद भारत ने नेपाल के लिए 10 टन मानवीय सहायता एवं आपदा राहत सामग्री और जरूरी दवाइयां भेजीं। भारतीय वायुसेना के C-130J विमान के जरिए राहत सामग्री काठमांडू पहुंचाई गई।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि इस मुश्किल समय में भारत नेपाल और वहां के लोगों के साथ खड़ा है।
बिहार-उत्तर प्रदेश तक बढ़ी चिंता
नेपाल में आई इस भीषण बाढ़ के बाद भारत में भी नदी किनारे के इलाकों में सतर्कता बढ़ाई गई है। नेपाल से आने वाले पानी के कारण बिहार और उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में भी बाढ़ का खतरा बढ़ने की आशंका जताई गई है। एनडीआरएफ की अतिरिक्त टीमें भी तैनात की गई हैं।
राहत-बचाव अभियान युद्धस्तर पर
नेपाल सरकार ने फिलहाल अपना पूरा ध्यान राहत, बचाव और लापता लोगों की तलाश पर केंद्रित कर दिया है। प्रभावित क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर और सुरक्षा बलों की मदद ली जा रही है। कई इलाकों में सड़क और पुल टूटने के कारण बचाव दलों को घटनास्थल तक पहुंचने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
नेपाल में तबाही का पूरा पैमाना अभी सामने आना बाकी है। लगातार जारी राहत एवं बचाव अभियान के साथ मृतकों और लापता लोगों के आंकड़ों में बदलाव संभव है।

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