जमरानी बांध परियोजना पर प्रशासन का कड़ा रुख, सीडीओ ने लगाई अफसरों को फटकार; गुणवत्ता, मलबा निस्तारण और पुनर्वास पर मांगा जवाब

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समाचार सच, हल्द्वानी। बहुप्रतीक्षित जमरानी बहुउद्देशीय बांध परियोजना की धीमी रफ्तार और निर्माण कार्यों में सामने आ रही खामियों पर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के निर्देश पर मुख्य विकास अधिकारी अरविन्द कुमार पांडे ने बुधवार को परियोजना स्थल का निरीक्षण कर निर्माण कार्यों, पुनर्वास, गुणवत्ता नियंत्रण और पर्यावरणीय व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान कई गंभीर कमियां सामने आने पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों और कार्यदायी संस्था को फटकार लगाते हुए समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए।

सीडीओ ने पाया कि परियोजना से निकलने वाले मलबे के निस्तारण के लिए तीन डंपिंग साइटें चिन्हित होने के बावजूद केवल एक ही स्थल का उपयोग किया जा रहा है। इतना ही नहीं, वहां भी वैज्ञानिक तरीके से मलबा नहीं डाला जा रहा, जिसके कारण बरसात में मलबा नदी में बहने का खतरा बना हुआ है। उन्होंने पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करते हुए सभी डंपिंग साइटों को तत्काल विकसित करने के निर्देश दिए।

पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (आरएंडआर) योजना की समीक्षा में सामने आया कि करीब 408 करोड़ रुपये के मुआवजे में से 68 करोड़ रुपये का भुगतान अभी शेष है, जबकि 14 परिवारों से जुड़े करीब 12 करोड़ रुपये के मामले मध्यस्थता में लंबित हैं। सीडीओ ने लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण कर प्रभावित परिवारों को राहत देने को कहा।

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निरीक्षण के दौरान गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर भी गंभीर लापरवाही सामने आई। निर्माण कार्यों की निगरानी करने वाली थर्ड पार्टी एजेंसी पिछले चार-पांच महीनों से साइट पर निरीक्षण करने नहीं पहुंची, जबकि नियमानुसार हर तीन महीने में निरीक्षण अनिवार्य है। इस पर नाराजगी जताते हुए नियमित गुणवत्ता परीक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

समीक्षा में यह भी स्पष्ट हुआ कि परियोजना पर आवश्यक संख्या में मशीनें और श्रमिक उपलब्ध नहीं हैं, जिसके चलते निर्माण कार्य निर्धारित लक्ष्य से पीछे चल रहा है। मुख्य विकास अधिकारी ने संसाधनों की संख्या बढ़ाकर कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए।

उन्होंने विस्थापित परिवारों के लिए पराग फार्म में विकसित की जा रही पुनर्वास कॉलोनी की प्रगति का भी जायजा लिया और सभी मूलभूत सुविधाएं तय समय में उपलब्ध कराने को कहा।

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कॉर्पोरेट पर्यावरणीय दायित्व (CER) के तहत 19 गांवों में 1,175 सोलर लाइटें लगाने की योजना की समीक्षा करते हुए सीडीओ ने स्पष्ट किया कि स्थापना और खरीद की पूरी प्रक्रिया जिला प्रशासन की निगरानी में होगी। साथ ही पिछले वर्ष लगाई गई सोलर लाइटों का भौतिक सत्यापन भी कराया जाएगा।

सामाजिक दायित्व के तहत शिक्षा, स्मार्ट क्लास, शौचालय और अन्य विकास कार्यों के लिए निर्धारित 13 करोड़ रुपये की राशि में अब तक केवल 40 लाख रुपये खर्च होने पर भी उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई। अधिकारियों को वर्षवार कार्ययोजना बनाकर प्रभावित गांवों में विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान परियोजना प्रबंधक ललित कुमार, हिमांशु पंत, जिला अर्थ एवं सांख्याधिकारी डॉ. मुकेश नेगी, यूयूएसडीए के परियोजना प्रबंधक कुलदीप कुमार सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। वहीं परियोजना के महाप्रबंधक के निरीक्षण के समय अनुपस्थित मिलने पर मुख्य विकास अधिकारी ने नाराजगी व्यक्त करते हुए इसका संज्ञान लिया।

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