आखिर क्यों नहीं लेना चाहिए सुबह उठकर बंदर का नाम, होता है यह

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समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। दिन की शुरुआत अच्छी हो तो पूरा दिन अच्छा रहता है। और आप यह कभी नहीं चाहेंगे कि आपका दिन उलझन और परेशानियों में बीते। लेकिन आपने महसूस किया होगा कि कभी-कभी दिन ऐसा बीतता है कि समय पर न तो भोजना मिलता है और न मन का चैन। प्राचीन मान्यता और शास्त्रों के अनुसार इसका असली कारण सुबह के समय की गई गलतियां हैं।

-सुबह के समय भोजन करने से पहले पशु या किसी गांव का नाम नहीं लेना चाहिए। इससे भी दिन प्रतिकूल हो जाता है। खास तौर पर बंदर तो बिल्कुल भी नहीं बोलें।

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-रामचरित मानस के सुंदरकंड में साफ-साफ लिखा है हनुमान जी कहते हैं मैं जिस कुल से यानी बानर कुल से हूं और जो कोई सुबह-सुबह मेरा नाम लेता है उसे उस दिन समय पर भोजन नहीं मिलता है। ‘प्रात लेइ जो नाम हमारा। तेहि दिन ताहि न मिलै अहारा।’ इसका मतलब यह नहीं कि आप हनुमान जी का नाम नहीं लें। हनुमान जी का खूब नाम लें लेकिन बानर शब्द नहीं बोलें। एक बात और ध्यान रखने की जरुरत है कि शास्त्रों के अनुसार सुबह उठकर कभी भी आईने में अपनी सूरत नहीं देखनी चाहिए। इससे पूरे दिन नकारात्मक उर्जा का प्रभाव अपने ऊपर बना रहता है। सुबह नींद खुलते ही किसी व्यक्ति का चेहरा भी देखने से बचना चाहिए।

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-इसका कारण यह है कि हर व्यक्ति में एक उर्जा का संचार होता है। सुबह जब नींद खुलती है तो आपका शरीर स्थिल होता है और आप दूसरे की उर्जा के प्रभाव में जल्दी आ जाते हैं। अगर कोई नकारात्मक उर्जा के प्रभाव में है तो आप भी इसके प्रभाव में आ जाते हैं।

-इसलिए सबसे पहले अपने ईष्ट देवता का ध्यान करें और उनके दर्शन करें। अगर ऐसा संभव नहीं हो तो अपनी हथेली देखकर भगवान का ध्यान करें। इससे आत्मबल बढ़ेगा और सकारात्मक उर्जा का संचार होगा।

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